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अफगानिस्तान में बदलने लगे हालात! हिंदुओं-सिखों की हड़पी जमीन लौटा रहा तालिबान

तालिबान ने ये फैसला ऐसे समय लिया है, जब हाल ही में नरेंद्र सिंह खालसा कनाडा से अफगानिस्तान लौटे हैं. नरेंद्र सिंह खालसा अफगानिस्तान की संसद में हिंदुओं और सिखों के प्रतिनिधि थे. तालिबान जब अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर रहा था, तब उसने वहां रह रहे हिंदुओं और सिखों की जमीनें भी हड़प ली थीं.

अफगानिस्तान में तालिबान शासन अफगानिस्तान में तालिबान शासन
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 6:16 AM IST

अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान के तेवर थोड़े नरम पड़ने लगे हैं. खबर है कि तालिबान अफगानिस्तान के हिंदुओं और सिखों से छीनी गई उनकी जमीनें और संपत्तियां उन्हें वापस लौटाने जा रहा है.

कहा जा रहा है कि तालिबान ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जब हाल ही में नरेंद्र सिंह खालसा कनाडा से अफगानिस्तान लौटे हैं. नरेंद्र सिंह खालसा अफगानिस्तान की संसद में हिंदुओं और सिखों के प्रतिनिधि थे. साल 2022 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा किया था, तब उसने वहां रह रहे हिंदुओं और सिखों की जमीनें भी हड़प ली थीं.

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अफगानिस्तान में हिंदुओं और सिखों की जमीन अधिग्रहण की जांच शुरू कर दी गई है. ये पहल तालिबान के न्याय मंत्रालय की ओर से की गई है. अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान ने देशभर में विस्थापित हिंदुओं और सिखों को उनकी जमीन और संपत्तियां लौटाना शुरू कर दिया है.

तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस के प्रमुख सुहैल शाहीन का कहना है कि हिंदुओं और सिखों की हड़पी गई सभी संपत्तियों को उनके मालिकों को वापस करने के लिए न्याय मंत्री की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया है.

अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन साल में हिंदू और सिख प्रतिनिधियों ने काबुल में तालिबान के अधिकारियों के साथ कई बैठकें की थीं. इसमें उन्होंने उनकी जमीनों पर कब्जे को लेकर चिंता जाहिर की थी और तालिबान से इस मुद्दे को हल करने की अपील की थी.

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अफगानिस्तान से भाग आए थे हिंदू-सिख

तालिबान के सत्ता में आने के बाद ही अफगानिस्तान में बसे ज्यादातर हिंदू और सिख भागकर भारत आ गए गए थे. 2022 में काबुल में एक गुरुद्वारे पर हमला हुआ था, जिसकी जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएस ने ली थी. इस हमले ने वहां बसे आखिरी हिंदुओं और सिखों को वहां से भागने पर मजबूर कर दिया था.

अफगानिस्तान से भाग रहे कई सिखों और हिंदुओं ने भारत में शरण ली. भारत सरकार ने भी वहां बसे इन हिंदुओं और सिखों को हवाई मार्ग से निकाला था.

2021 में जैसे ही तालिबान सत्ता में आया, वैसे ही अफगानिस्तान में हिंदुओं और सिखों पर हमले बढ़ गए थे. गुरुद्वारों को लगातार निशाना बनाया जा रहा था. 

काबुल लौटने लगे सिख-हिंदू

अफगानिस्तान इंटरनेशनल पोर्टल ने 9 अप्रैल को अफगानी संसद में हिंदुओं और सिखों के एकमात्र प्रतिनिधि रहे नरेंद्र सिंह खालसा की वापसी की सूचना दी. खालसा की अफगानिस्तान वापसी उन खबरों के बीच अहम है, जब तालिबान सरकार हिंदुओं और सिखों की हड़पी जमीन को वापस करने का काम कर रही है.

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