
रूसी तेल पर अमेरिका की सख्ती बढ़ती जा रही है. हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत रूसी कच्चे तेल से भरे एक जहाज को अपने बंदरगाह पर उतरने की अनुमति नहीं दे रहा है और अब ग्रीस को लेकर ऐसी ही एक खबर आ रही है. दुनिया के सबसे अधिक जहाजों वाले देश ग्रीस की कुछ जहाज कंपनियों को अमेरिका ने एक पत्र भेजकर सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वो अपने जहाजों को रूसी तेल के निर्यात के लिए इस्तेमाल न होने दें. इसके बाद से ही ग्रीस के जहाज रूस से दूरी बनाने लगे हैं.
ब्लूमबर्ग ने जो शिपिंग डेटा जमा किए हैं, उसके मुताबिक, रूसी तेल ढोने वाले ग्रीस के तेल टैंकरों की संख्या में इस महीने 25% की कमी आएगी, अक्टूबर में जहां ग्रीस के 20 जहाज रूसी तेल ढो रहे थे, नवंबर के महीने में उनकी संख्या घटकर महज 15 हो गई है.
रूसी तेल ढोने वाले ग्रीस के टैंकरों में 2023 के मध्य से ही गिरावट दर्ज की जा रही है. 2023 के मध्य से पहले जहां 50 ग्रीस तेल टैंकर रूसी तेल ढो रहे थे, अब उनकी संख्या में 60% की गिरावट आई है.
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, रूसी अर्थव्यवस्था में तेल के योगदान को देखते हुए ग्रीस के अधिकतर तेल टैंकरों का रूसी तेल न ढोना रूस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है. ग्रीस में दुनिया के सबसे अधिक जहाज हैं. UNCTAD के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जनवरी में दुनिया के जहाज बाजार में ग्रीस की हिस्सेदारी 18% थी, जो किसी भी दूसरे देश से ज्यादा थी.
रूसी तेल ढोने से बच क्यों रहे ग्रीस के जहाज?
रूस की शिपिंग गतिविधियों में ग्रीस के जहाजों में गिरावट ऐसे वक्त में आई है जब हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी ने कुछ ग्रीक जहाज मालिकों को एक पत्र भेजा है. पत्र में जहाज मालिकों से सख्त लहजे में पूछा गया है कि वो रूसी तेल पर जी7 की 60 डॉलर प्रति बैरल प्राइस कैप का पालन कैसे कर रहे हैं.
पत्र रूसी तेल पर नकेल कसने का अमेरिकी नेतृत्व में पश्चिमी प्रयासों का हिस्सा है. यूक्रेन पर आक्रमण को देखते हुए पिछले साल पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्राइस कैप लगा दिया था जिसके तहत रूसी तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत पर नहीं बेचा जा सकता है.
हालांकि, पिछले समय से ऐसी खबरें आ रही हैं कि रूस पश्चिम के इस प्राइस कैप से ज्यादा कीमत पर अपना तेल बेच रहा है. कहा जा रहा है कि रूस अपने गुप्त टैंकरों के माध्यम से प्राइस कैप से ज्यादा कीमत पर विदेशों में तेल भेज रहा है. ऐसी बातें भी सामने आई है कि रूस अपने तेल की कीमत को छिपाने के लिए कच्चे तेल पर शिपिंग लागत बढ़ाकर प्राइस कैप से ज्यादा कीमत पर तेल बेच रहा है.
इसे देखते हुए अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध और कड़े करने के लिए कदम उठाए हैं. अमेरिका के नेतृत्व में जी7 देशों ने पिछले हफ्ते रूस के 5 जहाजों पर 60 डॉलर प्रति बैरल के प्राइस कैप से ऊपर तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस प्रतिबंध से रूस को झटका लगा है साथ ही भारत को भी काफी नुकसान हुआ है.
भारतीय तट के पास भटक रहा रूसी तेल से भरा जहाज
हाल ही में ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल से भरा रूस का एक टैंकर भारत के तट के पास पिछले कई दिनों से भटक रहा है लेकिन उसे गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर ठहरने की इजाजत नहीं दी जा रही है.
रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी तेल टैंकर भारत के तट से 1,600 मील दूरी पर भटक रहा है. रूसी तेल जहाज एनएस सेंचुरी दक्षिण कोरिया के जरिए आ रहा था और भारत के बंदरगाह पर रुकने वाला था लेकिन अब पिछले 10 दिनों से समुद्र में ही भटक रहा है. यह जहाज उन पांच जहाजों में शामिल है जिनपर अमेरिका ने नए प्रतिबंध लगाए हैं.
भारत के नौवहन महानिदेशालय (Directorate Generale of Shipping) ने जानकारी दी है कि भारत के अधिकारी फिलहाल यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि भारत में टैंकर से कच्चा तेल उतारने दिया जाए या नहीं.
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही रूस भारत की शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की सख्ती भारत के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है. भारत पर अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का भी दबाव है. माना जा रहा है कि इसी कारण रूसी टैंकर को भारतीय बंदरगाह पर उतरने की इजाजत देने में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.