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आतंकवाद पर ट्रंप की 'ढाई चाल', PAK से प्यार और नॉर्थ कोरिया से नफरत?

नॉर्थ कोरिया को आतंकी देश घोषित करने के ट्रंप का फैसले स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल ये है कि ट्रंप की नजर में अगर नॉर्थ कोरिया आतंकी देश है तो आतंक का खलीफा बन चुके पाकिस्तान को डिस्काउंट क्यों दिया जा रहा है?

डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप
जितेंद्र बहादुर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 8:26 AM IST

एक तरफ दुनिया भर में आतंकवाद का दूसरा नाम बन चुका पाकिस्तान है और दूसरी तरफ अमेरिका को युद्ध की धमकी देने वाला नॉर्थ कोरिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित कर दिया है.

सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को टेरर स्पॉन्सर देश का तमगा पहनाते हुए घोषणा की कि अब नॉर्थ कोरिया पर और बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे. नॉर्थ कोरिया पर आतंक का प्रायोजक देश होने का टैग लगाने के पीछे डोनाल्ड ट्रंप ने जो वजह बताई हैं.

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उनमें प्रमुख वजह ये हैं कि दुनिया को न्यूक्लियर तबाही की धमकी देने के अलावा नॉर्थ कोरिया ने बार-बार अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का समर्थन किया है. नॉर्थ कोरिया विदेशी धरती पर हत्याएं करवाने की साजिशों में भी शामिल रहा है. अमेरिका के बार-बार कहने के बावजूद नॉर्थ कोरिया की सरकार अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक नहीं लगा रही.

नॉर्थ कोरिया को आतंकी देश घोषित करने के ट्रंप का फैसले स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल ये है कि ट्रंप की नजर में अगर नॉर्थ कोरिया आतंकी देश है तो आतंक का खलीफा बन चुके पाकिस्तान को डिस्काउंट क्यों दिया जा रहा है?

नॉर्थ कोरिया तो सिर्फ धमकी देता है लेकिन पाकिस्तान तो भारत समेत दुनिया भर में आतंकी हमले करवाने के लिए बदनाम है तो आखिर वो कौन सी मजबूरियां हैं जिनके वशीभूत होकर डॉनल्ड ट्रंप पाकिस्तान को आतंकी देश साबित नहीं कर रहे हैं.

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अमेरिका का लिए खतरा बना नॉर्थ कोरिया

नॉर्थ कोरिया जब अमेरिका के सिर पर चढ़कर नाचने लगा और अमेरिका की धमकियों से डरने की बजाय उल्टा अमेरिका को धमकाने लगा, तो डोनाल्ड ट्रंप को नॉर्थ कोरिया एक आतंकवादी देश लगने लगा. अमेरिका की नजर में नौ साल पहले तक भी नॉर्थ कोरिया आतंकवाद का प्रायोजक देश हुआ करता था. लेकिन फिर उसपर से ये टैग हटा लिया गया.

जिस तरह नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका तक मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइल का टेस्ट किया और परमाणु मिसाइलों के कामयाब परीक्षण किए, उससे वो एक बार फिर अमेरिका के लिए खतरा बन गया है. ट्रंप ने इस खतरे का इजहार भी किया है.

होना तो ये चाहिए था कि डोनाल्ड ट्रंप , नॉर्थ कोरिया के साथ-साथ पाकिस्तान को भी आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित कर देते, क्योंकि अगर ट्रंप ये मानते हैं कि नॉर्थ कोरिया के परमाणु हथियार पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं तो उन्हें ये भी पता होगा कि उसे परमाणु बम बनाने की तकनीक देने वाला पाकिस्तान ही था.

नॉर्थ कोरिया को आतंकवादी देश घोषित करते हुए ट्रंप ने इस बात को नजरअंदाज क्यों कर दिया कि नॉर्थ कोरिया तो सिर्फ आतंकवाद का समर्थन करता है जबकि पाकिस्तान तो भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देता है. ट्रंप के मुताबिक अगर नॉर्थ कोरिया विदेशी धरती पर हत्याकांडों को अंजाम देने में शामिल है तो वो ये क्यों भूल रहे हैं कि इस काम में तो पाकिस्तान नॉर्थ कोरिया का भी बाप है.

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अमेरिका को हुई गलतफहमी

ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए आतंकवाद मायने नहीं रखता, सिर्फ एक ही चीज मायने रखती है कि पूरी दुनिया अमेरिका से डरे और उसकी इज्जत करे. जैसा कि नॉर्थ कोरिया बिलकुल नहीं कर रहा, इसलिए वो आतंकवादी देश है और पाकिस्तान ने अमेरिका के दबाव में एक अमेरिकी फैमिली को पांच साल बाद हक्कानी नेटवर्क के चंगुल से क्या छुड़ा लिया. डोनाल्ड ट्रंप को ये गलतफहमी हो गई कि उसने पाकिस्तान के नट बोल्ट टाइट कर दिए.

पाकिस्तान से प्यार और नॉर्थ कोरिया से नफरत, आतंकवाद पर अमेरिका की ये ट्रंप चाल है. एक तरफ नॉर्थ कोरिया है जो इरान, सूडान और सीरिया जैसे आतंकवाद के प्रायोजक देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, उसके साथ होना भी यही चाहिए था. लेकिन दूसरी तरफ पाकिस्तान है, जो आतंकवाद के प्रायोजक देशों की लिस्ट में नंबर वन होना चाहिए था, लेकिन आतंकवाद की दोहरी नीति के चलते वो इस लिस्ट से बाहर है.

जिस पाकिस्तान को सबक सिखाने की बड़ी-बड़ी बातें करके डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने. उसी पाकिस्तान के प्रति अब उनका ह्दय परिवर्तन हो गया है. सच ये है कि ट्रंप पाकिस्तान की नाक में सिर्फ उतनी ही नकेल डाल रहे हैं, जितने से पाकिस्तान अमेरिका की नाक में दम ना कर पाए.

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