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तेवर दिखाने के बाद झुका पाकिस्तान! बिलावल के भारत आने की ये है असली वजह?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो SCO की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. भारत और पाकिस्तान के रिश्ते 2019 में धारा 370 हटाए जाने के बाद से ही खराब दौर में हैं. ऐसे में पाकिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा अहम माना जा रहा है, भले ही महज एससीओ की बैठक में शामिल होने के लिए आ रहे हैं.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर
राधा कुमारी
  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2023,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी गोवा में आयोजित हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होने के लिए गुरुवार को भारत आ रहे हैं. पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब पाकिस्तान का कोई विदेश मंत्री भारत आ रहा है. पिछली बार साल 2011 में तत्कालीन विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार भारत आई थीं. भुट्टो का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है जब दोनों देशों के रिश्ते अपने निम्नतम स्तर पर हैं. 

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साल 2019 में पुलवामा हमला और फिर भारत का पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक करना, इन घटनाओं से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे. भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तब और तल्ख हो गए जब 5 अगस्त 2019 को भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा लिया.

पाकिस्तान ने भारत के इस कदम पर सख्त आपत्ति जताते हुए राजनयिक संबंधों को सीमित कर लिया और भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते भी तोड़ लिए. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच का तनाव बना हुआ है.

अमेरिका के डेलावेयर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर मुक्तदर खान कहते हैं, 'इमरान खान के दौर में पाकिस्तान का रुख था कि जब तक कश्मीर में धारा 370 को फिर से बहाल नहीं किया जाता, भारत के साथ कोई बातचीत नहीं होगी. अब ये पता नहीं कि उनकी ये पॉलिसी बदली कि नहीं बदली लेकिन चीफ जस्टिस की एससीओ मीटिंग में पाकिस्तान के चीफ जस्टिस नहीं आए. एससीओ रक्षा मंत्रियों की मीटिंग में भी पाकिस्तान ने वर्चुअल तरीके से हिस्सा लिया था. अब उनके विदेश मंत्री ने भारत आने का फैसला किया है. हालांकि, पाकिस्तान ने कहा है कि यह भारत का दौरा नहीं है बल्कि भुट्टो एससीओ की मीटिंग में जा रहे हैं '

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दोनों देशों में तनाव के बीच बिलावल के भारत आने के मायने क्या?

दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बावजूद भी बिलावल भुट्टो के भारत आने को लेकर मुक्तदर खान कहते हैं कि जब भारत और पाकिस्तान ने 2017 में एससीओ ज्वाइन किया था तब एक शर्त ये थी कि दोनों देश द्विपक्षीय मुद्दों को अलग रखकर बहुपक्षीय हित देखेंगे और पाकिस्तान उसी का पालन कर रहा है. उन्होंने कहा कि दोनों ही देश एससीओ को काफी महत्व देते हैं.

पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने भी बिलावल भुट्टो के भारत आने की घोषणा करते हुए कहा था, 'एससीओ की मीटिंग में शामिल होने का फैसला ये दिखाता है कि पाकिस्तान एससीओ के चार्टर को लेकर कितना प्रतिबद्ध है. इससे यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में इस क्षेत्र को कितनी प्राथमिकता देता है.'

पाकिस्तान के लिए एससीओ की अहमियत

पाकिस्तान के करीबी दोस्त चीन के नेतृत्व वाला संगठन एससीओ पाकिस्तान के लिए बेहद अहम है. पाकिस्तान रूस के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. ऊर्जा के लिहाज से रूस पाकिस्तान के लिए एक अहम देश बनकर उभरा है.

एससीओ से पाकिस्तान के हित गहरे रूप से जुड़े हुए हैं. ऐसे में वो मीटिंग से दूर रहकर एससीओ में खुद को अलग-थलग नहीं करना चाहता. भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव के बावजूद भी पाकिस्तानी विदेश मंत्री का भारत आना इस बात की तस्दीक करता है.

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मुक्तदर खान का कहना है कि मीटिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्री को अपने करीबी देश चीन के विदेश मंत्री किन गांग और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलने का मौका मिलेगा. वो कहते हैं, 'पाकिस्तान जो अंतरराष्ट्रीय एरिना में अलग-थलग पड़ रहा है, इस बैठक में शामिल होने से उसे फायदा होगा.'

क्या भारत-पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की होगी मुलाकात?

विदेश मंत्री एस जयशंकर एससीओ मीटिंग से इतर जिन देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे, उनमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री का नाम शामिल नहीं है.

मुक्तदर खान का कहना है कि अगर दोनों किसी तरह मिलते या जयशंकर के बजाए निचले स्तर की बातचीत में ही बिलावल अगर यह संकेत देते कि पाकिस्तान भारत से बात करने को इच्छुक है तो दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी नरमी आने की उम्मीद थी. लेकिन साथ ही वो कहते हैं कि अगर बिलावल भुट्टो किसी तरह एस जयशंकर से मिलते हैं तो उन्हें अपने ही देश में काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ जाएगा.

बिलावल के भारत आने के पीछे चीन का कितना प्रभाव?

पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका की तरफ से बुलाए गए समिट फॉर डेमोक्रेसी के दूसरे शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था. दरअसल, अमेरिका ने सम्मेलन में चीन को आमंत्रित नहीं किया था. इसी कारण पाकिस्तान ने भी सम्मेलन से दूरी बना ली.

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समिट फॉर डेमोक्रेसी का पहले शिखर सम्मेलन जो 2021 में आयोजित किया गया था, उससे भी पाकिस्तान दूर रहा. चीन ने पाकिस्तान के इस कदम का स्वागत किया था. माना गया कि चीन के इशारे पर ही पाकिस्तान दूसरे शिखर सम्मेलन में भी शामिल नहीं हुआ.

इधर, भारत से तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत आने का फैसला किया है. इसमें चीन की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता. प्रोफेसर खान कहते हैं, 'एससीओ में पाकिस्तान के विदेश मंत्री के आने का फैसला...कहा जा सकता है कि अगर पाकिस्तान नहीं आता तो चीन नाराज होता.'

हालत बदहाल, क्या इसलिए भारत से रिश्ते सुधारने की फिराक में पाकिस्तान?

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इस वक्त बेहद खराब स्थिति में है. डिफॉल्ट होने के कगार पर खड़े पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से बेलआउट पैकेज को लेकर भी किसी तरह की सहमति नहीं बन पा रही है. देश में महंगाई चरम पर है और आम लोग आटा, दाल, चीनी, दूध जैसी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं.

अगस्त 2019 से पहले भारत-पाकिस्तान के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता था लेकिन धारा 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने भारत से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया जिसके बाद भारत से पाकिस्तान में होने वाले निर्यात में 90 फीसद की गिरावट आई.

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इस बदलाव से पाकिस्तान के चीनी और कपड़ा उद्योग पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा है. पाकिस्तान में चीनी की कीमतें काफी बढ़ गईं हैं जिससे आम पाकिस्तानियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं. पाकिस्तान फिलहाल गेहूं की किल्लत से भी जूझ रहा है. अगर भारत के साथ उसके व्यापारिक रिश्ते सामान्य होते तो भारत उसकी मदद कर सकता था.

मुक्तदर खान कहते हैं, 'भारत-पाकिस्तान व्यापार में फायदा भारत को ज्यादा होता है क्योंकि पाकिस्तान के उद्योग भारत जितने प्रतिस्पर्धी नहीं हैं. लेकिन जो मूलभूत चीजे हैं जैसे- दूध, आटा...इससे पाकिस्तान की जनता को फायदा होता. पाकिस्तान को भारत से ये चीजें सस्ती मिल जाती.'

उनका कहना है कि भारत से रिश्ते सुधारने के लिए पाकिस्तान की सेना और वहां की सरकार, दोनों का सहमत होना जरूरी है.

बिलावल के दौरे से भारत-पाकिस्तान के रिश्ते कैसा मोड़ लेंगे?

विश्लेषकों का मानना है कि बिलावल भुट्टो का यह दौरा द्विपक्षीय न होकर बहुपक्षीय है. वो एससीओ की मीटिंग में शामिल होने के लिए आ रहे हैं इसलिए उनके दौरे से दोनों देशों के रिश्ते सुधरने की उम्मीद करना बेमानी है. हालांकि, उनका यह दौरा दोनों देशों के बीच एक सकारात्मक बदलाव है. 

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