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'डिप्लोमेसी में ताकत की...', पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर ग्लोबल टाइम्स ने की ऐसी टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन दौरे पर गए हैं. पीएम के इस दौरे पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख प्रकाशित किया है. चीनी अखबार का कहना है कि मोदी यूक्रेन दौरे में योग डिप्लोमेसी से रूस-यूक्रेन के बीच खाई को पाटना चाहते हैं लेकिन भारत इतना ताकतवर नहीं है.

पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर ग्लोबल टाइम्स ने प्रतिक्रिया दी है (Photo- Reuters) पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर ग्लोबल टाइम्स ने प्रतिक्रिया दी है (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को एक दिवसीय दौरे पर यूक्रेन पहुंचे हैं. उनके इस दौरे को लेकर दुनियाभर की मीडिया में खूब चर्चा है. चीन के सरकारी मीडिया ने भी पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर एक लेख प्रकाशित किया है. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि मोदी इस दौरे से रूस और यूक्रेन के बीच खाई को पाटकर अपनी योग डिप्लोमेसी को सफल बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भारत में ताकत की कमी है.

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चीनी अखबार ने लिखा, 'रूस और यूक्रेन दोनों के बीच समझौता करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी पक्षों के बीच की खाई को पाटने में भारत के लचीलेपन को दिखाने के लिए "योग डिप्लोमेसी" का इस्तेमाल करना चाहते होंगे. हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि इस बार "योग डिप्लोमेसी" को सफल बनाने के लिए नई दिल्ली में ताकत की कमी है.'

चीनी अखबार ने लिखा कि मोदी का यूक्रेन दौरा 8-9 जुलाई के उनके रूस दौरे के बाद हो रहा है. मोदी के रूस दौरे की यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिका ने आलोचना की थी.

'मोदी का दौरा युद्ध को रोकने में...'

चीनी अखबार ने लिखा कि हाल के सालों में मीडिया योग डिप्लोमेसी शब्द का इस्तेमाल कर रही है जिसे भारत दुनिया के देशों को एक साथ लाकर और उनके बीच खाई को पाटकर अपने बढ़ते वैश्विक प्रभाव का दावा करने के लिए अपना रहा है. मोदी का यूक्रेन दौरा भी इसी का प्रदर्शन है.

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चीन के सरकारी अखबार ने विशेषज्ञों के हवाले से लिखा कि मोदी की यूक्रेन यात्रा इस "योग डिप्लोमेसी" का प्रतीक है, जिसका मकसद रूस और यूक्रेन दोनों के साथ जुड़ने की देश की क्षमता को दिखाना और रूस की पिछली यात्रा को लेकर कई पश्चिमी देशों की चिंताओं को कम करना है. हालांकि, मोदी का यह दौरा युद्ध में बढ़ते संकट को कम करने में कोई अहम भूमिका नहीं निभाएगा.

'रूस-यूक्रेन के बीच बातचीत की गुंजाइश...'

सिचुआन इंटरनेशनल स्टडीज यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर लॉन्ग जिंगचुन के हवाले से ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, 'भारत के पास इस समय रूस और यूक्रेन के बीच की दूरियों को पाटने की ताकत और प्रभाव की कमी है, क्योंकि इसका प्रभाव यूरोप में बहुत सीमित है. इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि रूस के कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के आक्रमण के कारण दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश अब कम हो रही है. '

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस की सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव ने बुधवार को कहा कि कुर्स्क में यूक्रेन की घुसपैठ का मतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच तब तक कोई बातचीत नहीं होगी जब तक यूक्रेन युद्ध के मैदान में पूरी तरह से हार नहीं जाता.

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चीनी अखबार ने एक्सपर्ट के हवाले से सवाल किया, 'क्या भारत के पास दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने और दोनों पक्षों को संतुष्ट करने वाला संघर्ष विराम प्रस्ताव पेश करने की ताकत है? यह एक सवाल है.'

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