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'तीसरे पक्ष को नहीं करना चाहिए टारगेट,' भारत-अमेरिका की डील पर बौखलाया चीन

चीन ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों पर प्रतिक्रिया दी है. चीन ने कहा है कि राज्यों के बीच सहयोग में तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करना चाहिए. देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए. दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच सैन्य विमानों के लिए भारत में जेट इंजन का संयुक्त उत्पादन और सशस्त्र ड्रोन को लेकर डील हुई है.

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदे की डील पर चीन सरकार ने प्रतिक्रिया दी है. (फाइल फोटो) भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदे की डील पर चीन सरकार ने प्रतिक्रिया दी है. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • बीजिंग,
  • 27 जून 2023,
  • अपडेटेड 6:57 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा कई मायनों में खास रही है. भारत और अमेरिका ने दोस्ती और मजबूत होने का दावा किया है. दोनों देशों के बीच कई बड़ी बिजनेस डील भी हुई है. पीएम मोदी की इस यात्रा पर सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है और तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करने की दुहाई दी है. उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि संबंधित देश क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के मामले में क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी विश्वास के अनुकूल काम करेंगे.

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चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि राज्यों के बीच सैन्य सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए, किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए या किसी तीसरे पक्ष के हितों को भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. चीन की यह प्रतिक्रिया भारत और अमेरिका के बीच कई रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद आई है.

'क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए'

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में कहा, यह चीन की लंबे समय से स्थिति रही है कि राज्यों के बीच सैन्य सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए, किसी तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं बनाना चाहिए या किसी तीसरे पक्ष के हितों को भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. वे रूस की एक सरकारी न्यूज एजेंसी के सवाल का जवाब दे रही थीं. उनसे पीएम मोदी की वाशिंगटन की स्टेट विजिट में कई रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों के बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई थी.

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'भारत और अमेरिकी के बीच हुई बिजनेस डील'

बता दें कि जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि उसने भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान (LCA)-Mk-II तेजस के लिए संयुक्त रूप से लड़ाकू जेट इंजन बनाने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ समझौता किया है. साथ ही भारत ने जनरल एटॉमिक्स से सशस्त्र MQ-9B सीगार्जियन ड्रोन खरीदने का ऐलान किया है. यह ड्रोन भारत की खुफिया और निगरानी क्षमताओं को बढ़ाएगा.

'सीमा पर तैनात होगा ताकतवर ड्रोन'

जनरल एटॉमिक्स MQ-9B रीपर ड्रोन कई मायने में अहम है. यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा में मददगार माना जा रहा है. इस ड्रोन की तैनाती चीन बॉर्डर के साथ हिंद महासागर और इंटरनेशनल बॉर्डर पर की जाएगी. सशस्त्र ड्रोन 500 प्रतिशत अधिक पेलोड ले जा सकता है और पहले के एमक्यू-1 प्रीडेटर की तुलना में इसमें 9 गुना हॉर्स पावर है. इसके अलावा, एमक्यू-9 यूएवी युद्धक को लंबे समय तक सहनशक्ति, लगातार निगरानी और हमला करने की क्षमता प्रदान करता है.

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बीते कुछ सालों में चीन, अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. चीन को लेकर माना जाता रहा है कि वही भविष्य में अमेरिका को टक्कर दे सकता है. बात चाहे फिर मजबूत अर्थव्यवस्था की हो या फिर मजबूत सेना की. दोनों ही मामलों में चीन अब अमेरिका को टक्कर दे रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन से बिगड़ते रिश्ते ही अमेरिका को भारत के करीब ला रहे हैं. क्योंकि भारत का साथ लेकर अमेरिका, चीन को चुनौती दे सकता है. चीन भी यही मानता है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने रविवार को एक लेख में लिखा कि लंबे समय से अमेरिका, चीन से निपटने के लिए भारत का सहारा लेता रहा है. अखबार लिखता है कि अमेरिका ऐसे देशों से गठजोड़ करता है, जिनसे उसे फायदा हो सके. वो अपने हितों के आधार पर ही देशों को वरीयता देता है.

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, अमेरिका के लिए भारत बिल्कुल सही सहयोगी है, क्योंकि वही उसके सभी लक्ष्यों को पूरा कर सकता है. इस लेख में चेतावनी देते हुए ये भी लिखा गया है कि अमेरिका से दोस्ती बढ़ाते वक्त भारत को सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि उसका इतिहास पीठ में छुरा घोंपने वाला रहा है. अमेरिका अपने दोस्तों को धोखा देने के लिए बदनाम है. अमेरिका और भारत के संबंध टिकाऊ नहीं हैं. अमेरिका ने अभी भारत के लिए अपने दरवाजे सिर्फ इसलिए खोले हैं, ताकि वो चीन से निपट सके. ऐसे में चीन का मुकाबला करने के लिए भारत से अच्छे रिश्ते बनाना अमेरिका की मजबूरी भी है. इसकी वजह भी है. और वो ये कि चीन की तरह ही भारत भी बड़ी आबादी वाला देश है. भारत और चीन की सेना भी लगभग बराबर है. भारत एक बड़ा बाजार भी है. लिहाजा, भारत को नजरअंदाज कर चीन का मुकाबला नहीं किया जा सकता.

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