Advertisement

ट्रंप का विस्तारवादी प्लान... विशलिस्ट में कनाडा, पनामा से लेकर ग्रीनलैंड तक क्यों?

डोनाल्ड ट्रंप की विस्तारवादी विशलिस्ट में नया नाम ग्रीनलैंड का है. लेकिन कनाडा-कनाडा जपते-जपते वह पनामा और ग्रीनलैंड तक कैसे पहुंच गए?  वैसे तो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व की ट्रंप की इच्छा कोई नई नहीं है. वह राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करते रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप
Ritu Tomar
  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

कैपिटलिस्ट डोनाल्ड ट्रंप चीन की तरह ही विस्तारवादी नीतियों पर अमल करने का मन बना चुके हैं. कनाडा को अमेरिका में शामिल कर उसे 51वां स्टेट बनाने के सपने देख रहे ट्रंप अब पनामा और ग्रीनलैंड तक को अमेरिकी जद में लाने की बातें कर रहे हैं. ट्रंप की बयानबाजियों ने लगभग-लगभग स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने अमेरिका के विस्तार का एजेंडा तैयार कर लिया है और इसी एजेंडे को वह अमलीजामा पहनाएंगे. 

Advertisement

ट्रंप की इसी विस्तारवादी विशलिस्ट में नया नाम ग्रीनलैंड का है. लेकिन कनाडा-कनाडा जपते-जपते वह पनामा और ग्रीनलैंड तक कैसे पहुंच गए? वैसे तो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व की ट्रंप की इच्छा कोई नई नहीं है. वह राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भी ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात करते रहे हैं. 2019 में उन्होंने बकायदा ग्रीनलैंड को खरीदने की मंशा भी जाहिर की थी तो ग्रीनलैंड की सरकार भड़क गई थी, जिसके बाद उन्होंने ग्रीनलैंड का पहले से निर्धारित अपना दौरा रद्द कर दिया था.

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के इरादे क्या हैं?

अब सवाल है कि ग्रीनलैंड ही क्यों? ग्रीनलैंड की स्ट्रैटैजिक लोकेशन दरअसल उत्तरी अटलांटिक महासागर है. वैसे तो यह उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप का हिस्सा ही है लेकिन जियो पॉलिटकली देखें तो यूरोप से भी इसका कनेक्शन है. ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर ग्रीनलैंड पर कब्जे की बातें कर रहे हैं. लेकिन असल वजह ये भी है कि जमीन के इस टुकड़े पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और उसकी भू-राजनीतिक स्थिति की वजह से ट्रंप की नजर इस पर है.

Advertisement

अब जरा ग्रीनलैंड की मौजूदा स्थिति को समझ लेते हैं. 1953 तक ग्रीनलैंड डेनमार्क का उपनिवेश था. मौजूदा समय में भी इस पर डेनमार्क का नियंत्रण ही है लेकिन 2009 से वहां पर सेमी-ऑटोनोमस सरकार है. घरेलू नीतियों से लेकर अन्य मामलों में ग्रीनलैंड की सरकार ही सर्वेसर्वा है लेकिन रक्षा और विदेश संबंधी मामले लेने का हक डेनमार्क की सरकार के पास है. 

पनामा नहर से कमाई बहाना है, चीन को रोकना इरादा है

डोनाल्ड ट्रंप भले ही अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति हों लेकिन पहले वह एक कारोबारी हैं. व्यापार और लाभ उनके जीन हैं. पनामा नहर के जरिए जहाजों की आवाजाही से जो कारोबार होता है, उससे अमेरिका को बहुत लाभ होता है. लेकिन बीते दिनों ट्रंप अचानक ही पनामा सरकार पर भड़क गए और जरूरत से अधिक फीस वसूलने को उन्होंने बेतुका कह डाला.

ट्रंप चाहते हैं कि पनामा नहर के इस्तेमाल के लिए वसूले जाने वाली फीस कम की जाए और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इस का नियंत्रण अमेरिका को वापस दे देना चाहिए. 

अब जरा पनामा नहर से होने वाली कमाई का खेल समझिए. एक अनुमान के मुताबिक, पनामा नहर से रोजाना लगभग 14 हजार जहाज और पोत गुजरते हैं. ऐसे में इनसे होने वाली कमाई की कल्पना कीजिए. कहा जाता है कि पनामा गवर्मेंट को इस नगर से हर साल तकरीबन एक अरब डॉलर की ट्रांजिट फीस मिलती है.

Advertisement

लेकिन कमाई के साथ-साथ एक बड़ी वजह चीन भी है क्योंकि पनामा नहर अमेरिका का पूर्वी तट को चीन से भी जोड़ती है. चीन का भी बहुत बड़ा कारोबार इसी नहर के जरिए होता है, ऐसे में ट्रंप को ये भी लगता है कि इस नहर से होने वाले वैश्विक कारोबार में चीन का दबदबा बढ़ सकता है. चीन के इस संभावित दबदबे को रोकने के लिए ट्रंप इस नहर पर नियंत्रण चाहते हैं.

लेकिन ये पनामा दुनिया के नक्शे पर आखिर हैं कहां? पनामा एक मध्य अमेरिकी देश है. यह नहर 82 किलोमीटर लंबी है जो अटलांटिक और प्रशांत महासागर को कनेक्ट करती है. फ्रांस की अगुवाई में 1900 के दशक में इस नहर के कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हुआ था. 1977 आते-आते अमेरिका ने इसके कंस्ट्रक्शन का जिम्मा संभाला, जिसके बाद संयुक्त रूप से अमेरिका और पनामा दोनों का ही इस पर कंट्रोल हुआ लेकिन 1999 में जाकर पनामा का इस पर पूरा नियंत्रण हो गया.

ट्रूडो की धुकधुकी बढ़ा रहे हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद से सबसे ज्यादा धुकधुकी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की बढ़ी है. ट्रंप और ट्रूडो दोनों के रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है. ट्रंप को ट्रूडो से एकमात्र आपत्ति यही है कि कनाडा की सीमा से अमेरिका में अवैध रूप से प्रवासी दाखिल हो रहे हैं. लेकिन ट्रूडो हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. 

Advertisement

ट्रूडो के इस रवैये से आजिज आकर ट्रंप ने अपना ट्रंप कार्ड चला. फ्लोरिडा में ट्रंप के आलीशान मार-ए-लागो पहुंच ट्रूडो को ट्रंप ने कहा दिया कि कनाडा को अब अमेरिका का 51वां स्टेट बनने में देर नहीं करनी चाहिए. हंसी-मजाक में कही गई इस बात को लेकर अब ट्रंप खुद सीरियस हो गए हैं और जहां मौका मिलता है, कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य और ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर बता देते हैं. 

ट्रूडो की सरकार को दो टूक चेता भी दिया गया है कि अगर कनाडा से अमेरिका में दाखिल होने वाले अवैध प्रवासियों पर नकेल नहीं कसी गई तो अमेरिका में इंपोर्ट होने वाले कनाडा के उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. 

ट्रंप और ट्रूडो के इस कोल्ड वॉर में कनाडा पिस रहा है. दरअसल दोनों नेताओं की छवि एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है. एक नॉर्थ पोल है तो दूसरा साउथ पोल. ट्रंप जहां कट्टर राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं, जो दक्षिणपंथी हैं और ग्रेट अमेरिका और मेक अमेरिका ग्रेट अगेन की बातें करते हैं तो वहीं कनाडाई पीएम ट्रूडो की छवि एक लिबरल नेता की है जो खालिस्तानियों के लिए नरम है तो खुली विचारधारा को अधिक तवज्जो देते हैं. ऐसे में रिश्तों में ठंडेपन की एक वजह अलग-अलग विचारधारा का होना भी है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement