
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से पहले रिसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान कर दिया है. ट्रंप रिसिप्रोकल टैरिफ में जैसे तो तैसा वाली नीति पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो देश हम पर जैसा टैरिफ लगाता है, हम उनसे वहीं टैरिफ वापस लेंगे. हम भी उनसे न ज्यादा टैक्स लेंगे और न कम टैक्स लगाएंगे.
ट्रंप ने रिसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान करते हुए कहा, उन्होंने न्यायसंगत टैक्स वापस लेने के लिए रिसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान लगाने का फैसला किया है. हम सभी को एक स्तर पर रखना चाहते हैं. यानी जो भी देश संयुक्त राज्य अमेरिका से शुल्क लेंगे, हम उनसे शुल्क लेंगे. न ज़्यादा, न कम. वे हमसे कर और शुल्क वसूलते हैं, यह बहुत आसान है कि हम उनसे बिल्कुल वैसे ही कर और शुल्क वसूलेंगे. वह उन देशों पर भी विचार करेंगे जो वैल्यू एडेड टैक्स सिस्टम का इस्तेमाल टैरिफ के रूप में करते हैं. टैरिफ से बचने के लिए किसी अन्य देश के माध्यम से माल भेजना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ट्रंप ने कहा कि नॉन-मॉनिटर टैरिफ के लिए प्रावधान किए जाएंगे. नॉन मॉनिटर टैरिफ के प्रावधानों में व्यापार पर लिमिट शामिल होंगी. कॉमर्स नोमनी हॉवर्ड लुटनिक उन लिमिटों और अन्य नॉन टैरिफ बाधाओं के बराबर संख्या के साथ आएंगे. अन्य देश टैरिफ कम कर सकते हैं या खत्म कर सकते हैं. कारों पर लगने वाले टैरिफ भी जल्द आएगा.
'दुश्मनों से भी हैं बदतर सहयोगी'
पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने यह भी कहा कि जब व्यापार नीतियों की बात आती है तो अमेरिकी सहयोगी अक्सर हमारे दुश्मनों से भी बदतर होते हैं.
वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रंप द्वारा लागू किए गए टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होंगे, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापार और आर्थिक टीम द्वारा द्विपक्षीय टैरिफ और व्यापार गतिशीलता की समीक्षा के बाद कुछ हफ्ते के अंदर लागू किए जा सकते हैं.
भारत पर क्या होगा रिसिप्रोकल टैरिफ का असर
भारत उन देशों में से है, जहां टैरिफ की दरें काफी ज्यादा हैं और इस लिए वह रिसिप्रोकल टैरिफ को लेकर काफी संवेदनशील है. अमेरिका की नई टैक्स नीति भारत के ऑटोमोबाइल, कपड़ा और अन्य उद्योगों पर पड़ सकता है. वहीं, अगर भारत टैरिफ की दरों में कटौती करता है तो सीधे तौर पर सरकार के राजस्व में कमी आएगी जो कि भारत के नजरिए से साफ तौर पर घाटा है.