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अमेरिकी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण से ऐसे जुड़ गई 20 जनवरी की तारीख, रूजवेल्ट तक तो...

अमेरिकी पॉलिटिक्स में राष्ट्रपति चुनाव और शपथ ग्रहण समारोह तय समय पर होता है. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में नवंबर के पहले मंगलवार को होता है और नया राष्ट्रपति 20 जनवरी को ही शपथ लेता है. इसी दिन उपराष्ट्रपति भी शपथ लेता है. लेकिन 1933 तक शपथ लेने की तारीख चार मार्च हुआ करती थी. 

अमेरिका में कैसे बदली राष्ट्रपति शपथ ग्रहण की तारीख अमेरिका में कैसे बदली राष्ट्रपति शपथ ग्रहण की तारीख
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

अमेरिका में एक बार फिर ट्रंप युग शुरू होने जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. अमेरिकी इतिहास में शायद पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब किसी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण को ग्रैंड इवेंट के तौर पर पेश किया जाएगा. लेकिन क्या आपको पता है कि अमेरिका में नया राष्ट्रपति 20 जनवरी को ही शपथ लेता है लेकिन पहले ऐसा नहीं था.

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अमेरिकी पॉलिटिक्स में राष्ट्रपति चुनाव और शपथ ग्रहण समारोह तय समय पर होता है.अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल में नवंबर के पहले मंगलवार को होता है और नया राष्ट्रपति 20 जनवरी को ही शपथ लेता है. इसी दिन उपराष्ट्रपति भी शपथ लेता है. लेकिन 1933 तक शपथ लेने की तारीख चार मार्च हुआ करती थी. 

अमेरिकी संविधान 1789 में अस्तित्व में आया. 1789 से 1933 तक नया राष्ट्रपति 4 मार्च को शपथ लेता था. लेकिन 1933 में संविधान में 20वें संशोधन किया गया. यह संशोधन नेब्रास्का के सीनेटर जॉर्ज नॉरिस की पहल पर हुआ था. 

फ्रैंकलिन डी. रूसवेल्ट अमेरिका के  पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने 1933 में 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ ली. वह अमेरिकी इतिहास में सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति के पद पर रहने वाले शख्स भी थे. 

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शपथ ग्रहण की तारीख बदलने का इतिहास

अमेरिकी संघीय कानून के तहत देश में राष्ट्रपति चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होता है. लेकिन मंगलवार ही क्यों? दरअसल प्री-मॉडर्न अमेरिका में नवंबर को कई मायनों में शुभ माना जाता है. उस समय राष्ट्रपति चुनाव होने की तारीख और शपथ ग्रहण की तारीख (उस समय 4 मार्च) के बीच में महीनों के लंबे गैप को जानबूझकर रखा गया था ताकि मौजूदा सरकार इस बीच सभी लंबित कामकाज निपटा ले और दोनों सरकारों के बीच सत्ता का हस्तांतरण आसानी से हो सके. अमेरिका में इस अवधि को लेम डक कहा जाता है. 

लेकिन सिविल वॉर के बाद स्थिति तेजी से बदली. नई टेक्नोलॉजी के आने से अमेरिका दुनिया के बेहद अमीर मुल्कों में शुमार हुआ. टेलीग्राम और टेलीफोन के साथ-साथ रोडवेज और रेलवे से न सिर्फ अमेरिका को मजबूती मिली बल्कि इससे पॉलिटिकल ट्रांजिशन भी आसान हुआ.

ऐसे में नेब्रास्का के सीनेटर जॉर्ज नॉरिस ने 1920 की शुरुआत में मुहिम छेड़ दी कि शपथ ग्रहण की तारीख बदली जाए. ऐसे में संविधान में 20वां संशोधन किया गया और शपथ ग्रहण की तारीख को चार मार्च से बदलकर 20 जनवरी किया गया. शपथ ग्रहण में एक पेंच ये भी है कि अगर 20 जनवरी को रविवार का दिन हो तो राष्ट्रपति निजी समारोह में शपथ लेता है और अगले दिन सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया जाता है.

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