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'रामास्वामी अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो व्हाइट हाउस में अजीब हिंदू देवताओं... ',ट्रंप समर्थक पादरी का विवादित बयान

विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी हैं जो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवारी के दावेदार हैं. रामास्वामी हिंदू धर्म को मानते हैं जिसे लेकर ईसाई बहुल अमेरिका में उनके विरोधी उन्हें निशाना बना रहे हैं.

विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी हैं (Photo- Reuters) विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी हैं (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 12:02 PM IST

अमेरिका में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं जिसमें रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के विकल्प के रूप में कुछ लोग विवेक रामास्वामी को समर्थन दे रहे हैं. हालांकि, विवेक रामास्वामी भारतीय मूल के अमेरिकी हिंदू हैं और उनके आलोचक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में उनकी उम्मीदवारी की दावेदारी के खिलाफ उनके धर्म को मुद्दा बना सकते हैं. ट्रंप समर्थक पादरी हैंक कुन्नेमन ने रामास्वामी की आस्था को लेकर उन पर जुबानी हमला भी कर दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर रामास्वामी जीतते हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति भवन में अजीब तरह के हिंदू देवताओं की तस्वीरें लगेंगी.

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द रोलिंग स्टोन्स के एक लेख के अनुसार, कुन्नमैन ने अपने हालिया उपदेश कार्यक्रम में रामास्वामी पर उनके धर्म को लेकर खूब हमले किए और कहा कि लोगों को इस 'नए युवा व्यक्ति' से खतरा है. ट्रंप समर्थक पादरी ने दावा किया, 'अगर वो इंसान प्रभु यीशु मसीह की सेवा नहीं करता है तो फिर आपकी अपने भगवान से नहीं बनेगी, ईश्वर आपसे नाराज हो जाएंगे.'

कुन्नेमन ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि अगर रामास्वामी राष्ट्रपति चुनकर व्हाइट हाउस में जाएंगे तो वहां हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरें होंगी. उन्होंने कहा, 'हम क्या कर रहे हैं? क्या आप किसी व्यक्ति को बाइबल के अलावा किसी दूसरे धर्मग्रंथ पर अपना हाथ रखने देंगे? क्या आप उन्हें (विवेक रामास्वामी को) अपने सभी अजीब देवताओं को व्हाइट हाउस में रखने देंगे?'

कुन्नेमन ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि शासन चलाने की किसी की नीतियां कितनी अच्छी हैं अगर वो इंसान भगवान यीशु को नहीं मानता. 

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रामास्वामी धर्म को अपने लिए बाधा नहीं मानते

रामास्वामी ने कभी भी अपने हिंदू धर्म मानने से इनकार नहीं किया है. उनका कहना रहा है, 'समाज में असली विभाजन हिंदू, ईसाई या यहूदी धर्म के लोगों के बीच नहीं है, बल्कि उन लोगों के बीच है जो एक सच्चे ईश्वर में विश्वास करते हैं और उन लोगों के बीच है जिन्होंने शून्यता को वोकिज्म (उदार प्रगतिशील विचारधारा), ट्रांसजेंडरिज्म, जलवायुवाद और कोविडवाद' जैसे नए धर्मों से बदल दिया है.'

रामास्वामी मानते हैं कि उनका धर्म उनके लिए बाधा नहीं बल्कि एक अद्वितीय लाभ है. वो कहते हैं, 'मैं धर्म के पुनरुद्धार के लिए बिना बिना किसी हिचक के हमेशा खड़ा हूं. मैं इसे और अधिक स्वतंत्रता के साथ इसलिए कर सकता हूं क्योंकि कोई मुझ पर ईसाई राष्ट्रवादी होने का आरोप भी नहीं लगा सकता.'

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप समर्थक पादरी के अलावा रामास्वामी पर अन्य ईसाई राष्ट्रवादियों ने भी हमला किया है. ट्रंप के पादरी जैक्सन लैहमेयर ने रामास्वामी के धर्म पर हमला करते हुए कहा, 'एक हिंदू जो कि 35 साल का है, रॉन डी सैंटिस के साथ रिपब्लिकन उम्मीदवार के लिए दूसरे स्थान पर है.'

इस बीच, ओक्लाहोमा के पादरी जॉन बेनेट ने भी रामास्वामी को उनके धर्म के कारण निशाने पर लिया है. बेनेट ने उन्हें एक 'इंडोनेशियाई व्यक्ति' कहा. उन्होंने कहा कि रामास्वामी ईसाई वोट हासिल करने के लिए ईसाई होने का दावा कर रहे थे. हालांकि, रामास्वामी ने कभी भी ईसाई होने का दावा नहीं किया. भले ही उन्होंने यीशु को ईश्वर का पुत्र कहा है.

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रामास्वामी के धर्म को उनके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं विरोधी

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने एक लेख में दावा किया है कि रामास्वामी के विरोधी उनके धर्म को उनके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं.

लेख में कहा गया, 'रामास्वामी के साथ दूसरे नंबर के रिपब्लिकन उम्मीदवारी के दावेदार डी सैंटिस उनके धर्म और पृष्ठभूमि को निशाना बनाकर ईसाई रूढ़िवादी वोटिंग का फायदा उठा सकते हैं. रामास्वामी के माता-पिता भारत के अप्रवासी हैं. रामास्वामी ने अपनी हिंदू धर्म की आस्था को बनाए रखा है और जैसा कि डी सैंटिस ने कहा कि वह भारत की जाति व्यवस्था में बहुत विश्वास करते हैं. रामास्वामी का परिवार ब्राह्मण है, जो हिंदू वर्ण व्यवस्था में सबसे ऊंची जाति है.'

भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने की वकालत

विवेक रामास्वामी ने हाल ही में भारत के साथ साझेदारी का विस्तार करने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक अविश्वास का रिश्ता है क्योंकि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच 'विश्वास-आधारित बातचीत' नहीं की है.

उन्होंने कहा, 'वास्तव में, हमारे बीच अविश्वास का रिश्ता है. मैं कहूंगा कि भारत के साथ रिश्तों में सुधार की गुंजाइश है क्योंकि हमारे बीच विश्वास आधारित बातचीत नहीं हुई है. और अगर मैं अपने पहले कार्यकाल तक अगर ऐसा नहीं कर पाया तो मैं इसे जातीय आधार पर अपनी व्यक्तिगत विफलता मानूंगा.'

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विवेक रामास्वामी के चुनाव अभियान के 10 ट्रुथ

हाल ही में, विवेक रामास्वामी ने अपने चुनाव अभियान के लिए 10 ट्रुथ जारी किया है. जो इस तरह हैं-
1. ईश्वर साकार है.
2. दो लिंग हैं.
3. मानव के विकास के लिए जीवाश्म ईंधन की जरूरत है.
4. उल्टा नस्लवाद ही नस्लवाद है.
5. किसी देश की खुली सीमा का अर्थ है कि उसने कोई सीमा तय ही नहीं की.
6. माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा का निर्धारण करते हैं.
7. एकल परिवार मानव जाति के लिए अब तक ज्ञात शासन का सबसे महान रूप है.
8. पूंजीवाद लोगों को गरीबी से ऊपर उठाता है.
9. अमेरिकी सरकार की तीन शाखाएं हैं, चार नहीं.
10. अमेरिकी संविधान इतिहास में स्वतंत्रता का सबसे मजबूत गारंटर है.  

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