Advertisement

साल में दो बार इंजेक्शन लगवाने से ठीक हो सकता है HIV, क्लिनिकल ट्रायल में बड़ा दावा

यह ट्रायल 'डबल ब्लाइंडेड' तरीके से हुआ. इसका मतलब है कि न तो प्रतिभागियों और न ही शोधकर्ताओं को ट्रायल खत्म होने तक पता था कि उन्हें कौन सा इलाज दिया जा रहा है. हाल ही में स्वतंत्र डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड की समीक्षा के नतीजों से यह सिफारिश की गई कि परीक्षण के 'ब्लाइंडेड' चरण को रोक दिया जाना चाहिए और सभी प्रतिभागियों को PrEP का विकल्प दिया जाना चाहिए.

सांकेतिक फोटो सांकेतिक फोटो
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 10:41 PM IST

दक्षिण अफ्रीका और युगांडा में एचआईवी को लेकर एक बड़ा क्लिनिकल ट्रायल हुआ. इस ट्रायल में दावा किया गया है कि एक नई प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस दवा का इंजेक्शन साल में दो बार लगवाने से एक महिला एचआईवी संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित हो गई.

ट्रायल में इस बात की जांच की गई कि क्या लेनकापाविर (Lenacapavir) का छह महीने का इंजेक्शन दो अन्य दवाओं, दैनिक रूप से ली जाने वाली गोलियों, की तुलना में एचआईवी संक्रमण से बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है. ये सभी तीन दवाएं प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (या PrEP) दवाएं हैं. इस स्टडी के दक्षिण अफ्रीकी भाग के प्रमुख इन्वेस्टिगेटर, फिजिशियन-साइंटिस्ट लिंडा-गेल बेकर ने बताया कि यह सफलता इतनी अहम क्यों है और आगे क्या उम्मीद की जाए.

Advertisement

ट्रायल में शामिल 5000 प्रतिभागी

लेनकापाविर और दो अन्य दवाओं के असर का परीक्षण करने के लिए 5,000 प्रतिभागियों के साथ युगांडा में तीन साइटों और दक्षिण अफ्रीका में 25 साइटों पर ट्रायल हुआ. पहला यह था कि क्या लेनकापाविर का छह महीने वाला इंजेक्शन सुरक्षित है और 16 से 25 साल की उम्र के बीच की महिलाओं के लिए पीआरईपी के रूप में एचआईवी संक्रमण के खिलाफ ट्रूवाडा एफ/टीडीएफ की तुलना में बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा, जो व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली एक दैनिक पीआरईपी गोली है.

दूसरा, इस बात की भी जांच की गई कि क्या डेस्कोवी एफ/टीएएफ, एक नई दैनिक गोली, एफ/टीडीएफ जितनी प्रभावी है. एफ/टीएएफ एक छोटी गोली है और उच्च आय वाले देशों में पुरुष और ट्रांसजेंडर महिलाएं इसका इस्तेमाल करती हैं. पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में, युवा महिलाएं सबसे अधिक एचआईवी संक्रमण से जूझती हैं. कई कारणों से, उन्हे दैनिक PrEP इलाज काफी चुनौतीपूर्ण लगता है.

Advertisement

100 प्रतिशत प्रभावी साबित हुई दवा

ट्रायल के दौरान लेनकापाविर प्राप्त करने वाली 2134 महिलाओं में से कोई भी एचआईवी से संक्रमित नहीं हुई. यह दवा 100 प्रतिशत प्रभावी साबित हुई. तुलनात्मक रूप से, ट्रूवाडा (एफ/टीडीएफ) लेने वाली 1,068 महिलाओं में से 16 (या 1.5%) और डेस्कोवी (एफ/टीएएफ) लेने वाली 2,136 (1.8%) में से 39 एचआईवी वायरस से संक्रमित हो गईं.

यह ट्रायल 'डबल ब्लाइंडेड' तरीके से हुआ. इसका मतलब है कि न तो प्रतिभागियों और न ही शोधकर्ताओं को ट्रायल खत्म होने तक पता था कि उन्हें कौन सा इलाज दिया जा रहा है. हाल ही में स्वतंत्र डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड की समीक्षा के नतीजों से यह सिफारिश की गई कि परीक्षण के 'ब्लाइंडेड' चरण को रोक दिया जाना चाहिए और सभी प्रतिभागियों को PrEP का विकल्प दिया जाना चाहिए.

यह बोर्ड विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति है. वे सुरक्षा की निगरानी के लिए परीक्षण के दौरान निर्धारित समय पर 'अनब्लाइंड' डेटा देखते हैं. वे यह सुनिश्चित करते हैं कि यदि एक पक्ष को दूसरे पक्ष की तुलना में नुकसान पहुंच रहा है तो यह ट्रायल रोक दिया जाए.

ट्रायल 'ओपन लेबल' फेज में जारी रखने की योजना

यह सफलता एक बड़ी उम्मीद जगाती है कि लोगों को एचआईवी से बचाने के लिए हमारे पास एक अत्यधिक प्रभावी रोकथाम उपकरण उपलब्ध है. पिछले साल वैश्विक स्तर पर 13 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हुए. हालांकि यह 2010 में दर्ज किए गए 20 लाख संक्रमणों से कम है. 

Advertisement

इस ट्रायल को 'ओपन लेबल' फेज में जारी रखने की योजना है. इसका मतलब यह है कि अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों को 'अनब्लाइंड' रखा जाएगा यानी उन्हें बताया जाएगा कि वे 'इंजेक्शन' ग्रुप में हैं या 'टीडीएफ' या 'टीएएफ' ग्रुप में. उनके सामने PrEP का विकल्प भी रखा जाएगा.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement