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'दूसरों से बोलने की आजादी सीखने की जरूरत नहीं', भारत-कनाडा विवाद पर बोले विदेश मंत्री जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयंशकर ने वॉशिंगटन में एक प्रेस का्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि कनाडा ने हमारे ऊपर कुछ आरोप लगाए हैं. हमने भी उसका जवाब दिया है कि ये भारत सरकार की पॉलिसी नहीं है. हालांकि अगर वे हमारे साथ कोई ठोस सबूत साझा करते हैं तो हम उन पर विचार करने को तैयार हैं.

विदेश मंत्री एस जयशंकर विदेश मंत्री एस जयशंकर
aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 30 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:38 AM IST

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने 5 दिवसीय दौरे के दौरान शनिवार तड़के करीब 1:30 बजे (भारतीय समयानुसार) वॉशिंगटन में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कनाडा पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हमें दूसरों से सीखने की ज़रूरत नहीं है कि बोलने की आजादी क्या है. इस मुद्दे पर अपना रुख दोहराते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा के प्रति कनाडा की उदारता एक समस्या है. भारत ने कनाडा से कई आरोपियों के प्रत्यर्पण का अनुरोधों किया, लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं दिया गया है. ये ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं, जो कनाडा में बैठकर भारत के खिलाफ गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. 

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एस जयंशकर ने कहा कि कनाडा ने हमारे ऊपर कुछ आरोप लगाए हैं. हमने भी उसका जवाब दिया है कि ये भारत सरकार की पॉलिसी नहीं है. हालांकि अगर वे हमारे साथ कोई ठोस सबूत साझा करते हैं तो हम उन पर विचार करने को तैयार हैं. लेकिन, मैं यह देखना चाहता हूं कि क्या एक घटना को अलग-थलग करके देखा जाता है. क्योंकि तब वह कहीं न कहीं सही तस्वीर पेश नहीं करती है. सच यह है कि पिछले कुछ वर्षों से कनाडा और कनाडाई सरकार के साथ हमारी समस्या चल रही है. समस्या वास्तव में आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा की अनुमति के इर्द-गिर्द घूमती है. यह अनुमति इस सच्चाई से भी साबित होती है कि हमारे द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण प्रत्यर्पण अनुरोधों का उनकी ओर से जवाब नहीं दिया गया है. 

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'हमारे राजनयिक कर्मियों को लगातार धमकाया जा रहा है'

उन्होंने कहा कि ये ऐसे ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं जो स्पष्ट रूप से भारत में हिंसा और अवैध गतिविधियों में शामिल हैं. यह कोई रहस्य नहीं है. वे कनाडा में अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं और सबसे महत्वपूर्ण सच यह है कि हमारे राजनयिक मिशनों और हमारे राजनयिक कर्मियों को कनाडा में लगातार धमकाया जा रहा है. हालात ये हैं कि अब उनके लिए वहां काम करना सुरक्षित नहीं है. इसलिए हमें अपने वीज़ा संचालन को अस्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा है. क्योंकि उन्होंने हमारे लिए उन सेवाओं को संचालित करना बहुत कठिन बना दिया है.

'इसे पूरे सिख समुदाय का मामला न समझा जाए'

सिख समुदाय को लेकर चल रही चर्चाओं पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हर कोई जानता है कि पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने सिख समुदाय के मुद्दों और सुझावों पर बहुत ध्यान दिया है. मैं नहीं मानता कि अभी जो चर्चा हो रही है, वह पूरे समुदाय (सिखों) के प्रतिनिधि मुद्दे हैं. जो लोग आतंकवाद की बात करते हैं, अलगाववादी लोग हैं, जिनके तर्कों में हिंसा शामिल है, यह एक कुछ ही लोग हैं. इनके लिए सरकार को निष्पक्ष तरीके से देखना चाहिए. इसे पूरे समुदाय का मामला न समझें. इसको गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए.

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एक सवाल के जवाब में उन्होंने भारत और कनाडा के बीच संबंधों में तनाव पर कहा हमें दूसरों से यह सीखने की ज़रूरत नहीं है कि अभिव्यक्ति की आजादी क्या है. आतंकवाद, उग्रवाद और हिंसा के प्रति कनाडा की उदारता एक समस्या है. हम एक लोकतंत्र हैं. हमें दूसरों से यह सीखने की ज़रूरत नहीं है कि बोलने की आज़ादी क्या है. हमें नहीं लगता कि बोलने की आज़ादी हिंसा भड़काने तक फैली हुई है. हमारे लिए यह आजादी का दुरुपयोग है, आजादी की रक्षा नहीं.

'कनाडा में जो हो रहा है इसे सामान्य न बनाएं'

कनाडा द्वारा चरमपंथियों और अलगाववादियों को पनाह देने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जयशंकर ने कहा कि वहां जो हो रहा है उसे सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए. हमारे वाणिज्य दूतावासों के सामने हिंसा हुई है, पोस्टर लगाए गए हैं. क्या आप इसे सामान्य मानते हैं? अगर यह किसी अन्य देश के साथ हुआ होता तो वे कैसे प्रतिक्रिया देते. कनाडा में जो हो रहा है इसे सामान्य न बनाएं. वहां क्या हो रहा है, यह बताना महत्वपूर्ण है.

उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि जो कनाडा में हो रहा है, अगर वह किसी अन्य देश में हो तो दुनिया की क्या प्रतिक्रिया होगी. कनाडा में जो हो रहा है, अगर यह कहीं और होता, तो क्या आपको लगता है कि दुनिया इसे हलके में लेती? 

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'अमेरिका को कनाडा में कुछ और दिखता है'

उन्होंने कहा कि कोई भी घटना अलग नहीं होती और कोई भी घटना समग्र नहीं होती. हर चीज का एक संदर्भ होता है और वहां कई समस्याएं होती हैं. लेकिन एक बड़ा मुद्दा है. मुझे लगता है कि बड़े मुद्दे को उजागर किया जाना चाहिए. भारत में, यह किसी के लिए आश्चर्य की बात नहीं होगी यदि आप उन्हें बताएं कि कनाडा में ऐसे लोग हैं जो हिंसा, अलगाववाद की वकालत कर रहे हैं. सभी भारतीय इस नोटिस करते हैं लेकिन मुझे संदेह है कि बहुत कम अमेरिकियों ने इसे नोटिस किया है. जब अमेरिकी कनाडा को देखते हैं, तो उन्हें कुछ और दिखता है, जब हम भारत में कनाडा को देखते हैं, तो हमें कुछ और दिखाई देता है और यह समस्या का एक हिस्सा है. हमने जो अपनाया है वह एक बहुत ही उचित रुख है. आखिरी बार ऐसा कब हुआ था कि हमारे किसी राजदूत कर्मी को इस हद तक डरा दिया गया था कि वह अपना सामान्य कामकाज जारी नहीं रख सका था. अगर कोई कहता है कि जी7 देश में ऐसा हो सकता है, तो यह आपको एक संकेत देता है बहुत कुछ सोचने का.

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