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जिम्बाब्वे का जंगल... शेर, तेंदुए और लापता बालक, जिंदा रहने के लिए इस लिटिल 'बेयर ग्रिल्स' की होशियारी कमाल है!

जिम्बाब्वे का 8 साल का एक बच्चा पुंडु ने कारनामा कर दिखाया है. वो घने जंगलों में खो गया था. शेर, तेंदुए और हाथियों से भरे जंगल में. यहां पुंडु को काम आई अपने गांव की तरकीब. गांव में पुंडु को पानी के लिए न सिर्फ जमीन खोदने का तरीका बताया जाता था बल्कि ये तर जमीन की पहचान भी सिखाई जाती थी. पुंडु को ये सीख काम आई.

घने जंगल में लापता हो गया बालक. (फोटो-@mutsamu) घने जंगल में लापता हो गया बालक. (फोटो-@mutsamu)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

डिस्कवरी चैनल के कार्यक्रम मैन वर्सेज वाइल्ड में बेयर ग्रिल्स को आप कठिनतम परिस्थितियों में जिंदा रहने के गुर सिखाते हुए जरूर देखे होंगे. घनघोर जंगलों में कैसे जानवरों से बचना है, कड़कती धूप में पानी का जुगाड़, जंगली वृक्षों से खाने लायक फल चुनना ऐसे तमाम हुनर बेयर ग्रिल्स टीवी स्क्रीन पर लोगों को सिखाते रहे हैं. 

बात भारत से हजारों मील दूर जिम्बाब्वे की है. यहां जंगलों में बसे एक गांव में 7 या 8 बरस का एक प्यारा बच्चा था. नाम था टिनोटेंडा पुंडु. पुंडु ने बेयर ग्रिल्स के शोज तो नहीं देखे थे लेकिन उसने अपनी छोटी सी जिंदगी में जिंदा रहने के कारगर तरीके जरूर सीखे थे. 

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टिनोटेंडा पुंडु उत्तरी जिम्बाब्वे के एक गांव में रहता था. एक दिन वो अपने गांव से भटक कर घने जंगलों में चला गया. 8 साल का बालक, न रास्ता मालूम न कोई मदद करने वाला. पुंडु भटकता भटकता भटकता बीच जंगल में चला गया. अब संयोग देखिए ये जंगल नहीं दरअसल लॉयन सैंक्चुरी था. इसका नाम है माटुसाडोना नेशनल पार्क (Matusadona National Park). 

शेरों से आबाद और जानलेवा हालात के बीच माटुसाडोना नेशनल पार्क में शुरू हुई 8 साल के इस बच्चे की जिंदा रहने की जद्दोजहद. 

पुंडु का गांव सूखे से प्रभावित है. गांव में पुंडु को पानी के लिए न सिर्फ जमीन खोदने का तरीका बताया जाता था बल्कि ये तर जमीन की पहचान भी सिखाई जाती थी. पुंडु को ये सीख काम आई. उसने जंगल में डंडे की मदद से नदी के किनारे को खोदना शुरू किया. उससे जो पानी निकलता उससे वो अपनी प्यास बुझाने लगा और जिंदा रहने लगा. 

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पुंडु अपने गांव से 27 दिसंबर को गायब हुआ था. इधर इसके गांव वाले ढोल बजाकर उसे ढूंढ़ रहे थे. उन्हें उम्मीद थी कि आवाज सुनकर पुंडु आवाज की दिशा में आएगा और उसे खोज लिया जाएगा. लेकिन गांव वालों की ये कोशिश नाकाम हुई. 

दरअसल 8 साल का पुंडु भटकते-भटकते अपने गांव से 50 किलोमीटर दूर चला गया था. जबकि गांव वाले उसे आस-पास ही खोज रहे थे. एक दो दिन गुजरने के बाद पुंडु भूख से बेसुध सा होने लगा तो उसने जंगली फल खाने शुरू कर दिये. इस फल को जिम्बाब्बे में (Tsvanzva) के नाम  से जाना जाता है. 

पुंडु की होशियारी को बताते हुए स्थानीय सांसद कहते हैं कि वह इतना चतुर था कि ऊंचे चट्टानों पर सोता था ताकि शेर और अन्य वन्यजीव उस तक न पहुंच सकें.'

पांच दिनों के बाद टिनोटेंडा ने पार्क रेंजर की कार की आवाज सुनी और उसकी ओर दौड़ा, लेकिन जब तक वह वहां पहुंचा, तब तक कार जा चुकी थी.

शुक्र है कि रेंजर बाद में वापस लौटे और उन्होंने बच्चे के आकार के पैरों के निशान देखे और जल्द ही उसे ढूंढ लिया.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, उसे अस्पताल ले जाया गया और ड्रिप लगाई गई.

ज़िमपार्क्स के प्रवक्ता टीनाशे फ़रावो ने कहा,'यह अनुमान लगाया गया है कि वह अपने गांव से उस स्थान तक 49 किलोमीटर तक शेरों से भरे माटुसाडोना नेशनल पार्क के घने जंगलों से होकर चला, जहां उसे पाया गया.'

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रेंजर्स और पुलिस ने टिनोटेंडा के लापता होने की सूचना मिलने के तुरंत बाद उसकी तलाश शुरू कर दी थी. 

स्थानीय सांसद मुरोम्बेदज़ी ने कहा कि ग्रामीणों ने भी खोज में मदद की. उन्होंने कहा कि यह एक 'चमत्कार' था कि वह खतरनाक इलाके में इतने लंबे समय तक अकेला रहा. 

टिनोटेंडा की कहानी सोशल मीडिया पर शेयर की गई, जिसमें एक व्यक्ति ने पोस्ट किया,'यह एक अविश्वसनीय रूप से भाग्यशाली लड़का है. हम उस गेम पार्क में कैंपिंग करने गए थे और हमारे गाइड ने हमें बताया कि वहां  सबसे ख़तरनाक शेर हैं. हमने आठ शेरों का झुंड देखा. वो बहुत डरावनी जगह है'

ज़िम्बाब्वे की माटुसाडोना नेशनल पार्क शेर, तेंदुए, हाथी और भैंस सहित कई जंगली जानवरों का घर है. 
 

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