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अमेरिका के जबरा फैन! कभी एंजेला मर्केल के कारण छोड़नी पड़ी थी राजनीति, अब जर्मन चांसलर बनेंगे फ्रेडरिक मर्ज

फ्रेडरिक मर्ज अवैध प्रवासियों को लेकर बेहद सख्त हैं. उन्होंने इस बार भी चुनाव प्रचार के दौरान जमकर अवैध प्रवासियों पर निशाना साधा था. इस जीत के बाद उनका फोकस इमिग्रेशन और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर होगा.

फ्रेडरिक मर्ज फ्रेडरिक मर्ज
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

जर्मनी के आम चुनाव में फ्रेडरिक मर्ज (Friedrich Merz) की क्रिश्चियन डेमेक्रेटिक यूनियन (CDU) पार्टी को जबरदस्त सफलता मिली है. पार्टी बहुमत के करीब है और फ्रेडरिक देश के नए चांसलर बनने जा रहे हैं.

सीडीयू एक सेंटर राइट पार्टी है. क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (CSU) के गठबंधन को 28.5 फीसदी वोट मिले हैं. इस जीत के बाद फ्रेडरिक ने जर्मनी के हित में सरकार बनाने की बात करते हुए कहा कि दुनिया हमारा इंतजार नहीं करेगी बल्कि हमें आगे बढ़कर काम करना होगा.

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वहीं, धुर दक्षिणपंथी AfD पार्टी दूसरे स्थान पर रही है. चांसलर ओल्फ स्कॉल्ज की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. उनकी पार्टी को 16.5 फीसदी वोट मिले हैं.

एंजेला मर्केल की वजह से छोड़ी थी राजनीति

फ्रेडरिक मर्ज का जन्म 11 नवंबर 1955 को रोमन कैथोलिक परिवार में जर्मनी के साउरलैंड में हुआ था. वह पहली बार 1989 में यूरोपीय संसद के लिए चुने गए थे. वह दोबारा 1994 में भी सांसद चुने गए. हालांकि, वह एंजेला मर्केल की पार्टी से जुड़े हुए हैं लेकिन कई मायनों में वह उनसे अलग थे.

उन्होंने 1976 में लॉ की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. लेकिन वह 1972 से ही सीडीयू के सदस्य थे. वह 1989 में पहली बार यूरोपीय संसद के लिए चुने गए थे. 1994 में वह जर्मनी के सांसद बने. वह सीडीयू में कई अहम पदों पर रहे. 2000 में वह पार्टी के संसदीय नेता भी बने लेकिन 2002 में उन्हें एंजेला मर्केल के हाथों यह पद गंवाना पड़ा. लेकिन मर्केल की लोकप्रियता उन पर भारी पड़ी.

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सीडीयू/सीएसयू गठबंधन ने 2005 में जब एसपीडी के साथ मिलकर जर्मनी में सरकार बनाई तो फ्रेडरिक को नजरअंदाज कर दिया गया. इससे आहत होकर उन्होंने 2009 में सक्रिय राजनीति छोड़ने का फैसला किया. राजनीति से दूरी बना चुके फ्रेडरिक ने लॉ और फाइनेंस में करियर बनाया. लेकिन 2018 में मर्केल की रिटायरमेंट के बाद लगभग दस सालों के अंतराल के बाद उन्होंने 63 साल की उम्र  में राजनीति में वापसी की. 

2018 में फ्रेडरिक मर्ज ने वादा किया था कि वह धुर दंक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) के उभार को रोक सकते हैं. वह 2021 में राजनीति में लौटे और दो बार के प्रयासों के बावजूद इस बार वह चांसलर बनने जा रहे हैं.

इमिग्रेशन पर है बेहद सख्त रुख

फ्रेडरिक मर्ज अवैध प्रवासियों को लेकर बेहद सख्त हैं. उन्होंने इस बार भी चुनाव प्रचार के दौरान जमकर अवैध प्रवासियों पर निशाना साधा था. इस जीत के बाद उनका फोकस इमिग्रेशन और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर होगा.

उनका खुद की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी बिजनेस से जुड़ी हुई रही है जो इस बार चुनावों में उनकी लोकप्रियता की वजह रही. दरअसल पिछले कई सालों से जर्मनी की राजनीति में अस्थिरता के बीच लोगों की उम्मीदें रही हैं कि वह देश की अर्थव्यवस्था को इस गर्त से बाहर निकालेंगे. 

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फ्रेडरिक मर्ज को अमेरिका का जबरा फैन माना जाता है. कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि वह जर्मनी के अमेरिकी चांसलर होंगे. दरअसल वह अपने जीवन में 100 से अधिक बार अमेरिका जा चुके हैं और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्डक रीगन को वह अपना आदर्श मानते हैं. 

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