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अमेरिकियों पर कैसे होगा 'टैरिफ WAR' का असर? ट्रंप की जिद बिगाड़ सकती है US की इकोनॉमी

चुनावी प्रचार में भी ट्रंप ने कहा था कि ये शुल्क "आपके लिए कोई लागत नहीं होंगे, यह एक दूसरे देश के लिए लागत होगी". लेकिन दुनियाभर के तमाम अर्थशास्त्रियों ने ट्रंप के इस फैसले पर हैरानी जताई है. उनका कहना है कि ट्रंप का ये कदम अन्य देशों के लिए तो नुकसानदेह है ही लेकिन ये खुद आम अमेरिकियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST

अमेरिका की सत्ता संभालते ही डोनाल्ड ट्रंप के कई फैसलों ने दुनिया में हलचल बढ़ा दी है. ताजा मामला अन्य देशों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर है. ट्रंप ने हाल ही में कनाडा, मेक्सिको और चीन से आने वाले सामानों पर नए शुल्क (टैरिफ) लगाए हैं. ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत कनाडा और मेक्सिको से आने वाले सभी सामानों पर 25% शुल्क लगाया जाएगा. वहीं, चीन से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी शुल्क लगाए जाने की बात कही गई है. 

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ट्रंप और उनके समर्थकों का मानना है कि यह कदम इन देशों को अवैध प्रवासन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. वहीं, ये भी कहा गया कि टैरिफ ट्रंप की आर्थिक रणनीति का हिस्सा हैं. वह इस कदम के जरिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने, अमेरिकी लोगों के हितों की रक्षा करने और नौकरियां बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. चुनावी प्रचार में भी ट्रंप ने कहा था कि ये शुल्क "आपके लिए कोई लागत नहीं होंगे, यह एक दूसरे देश के लिए लागत होगी". लेकिन दुनियाभर के तमाम अर्थशास्त्रियों ने ट्रंप के इस फैसले पर हैरानी जताई है. उनका कहना है कि ट्रंप का ये कदम अन्य देशों के लिए तो नुकसानदेह है ही लेकिन ये खुद आम अमेरिकियों के लिए भी एक बड़ा खतरा है.

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अमेरिका में बढ़ सकती है महंगाई

आसान भाषा में समझें तो टैरिफ एक घरेलू कर होता है जो सामानों पर उस समय लगाया जाता है जब वे किसी देश में प्रवेश करते हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक,  उदाहरण के लिए, अगर किसी कार की कीमत $50,000 है और उस पर 25% टैरिफ है, तो उस कार पर $12,500 का शुल्क लगेगा. खास बात ये है कि यह शुल्क उस घरेलू कंपनी द्वारा चुकाया जाता है जो सामानों का आयात करती है, न कि उस विदेशी कंपनी द्वारा जो सामानों का निर्यात करती है. इस लिहाज से, यह एक सीधा कर होता है जिसे घरेलू अमेरिकी कंपनियां अमेरिकी सरकार को चुकाती हैं.

जानकारी के अनुसार, 2023 में अमेरिका ने करीब 3.1 ट्रिलियन डॉलर के सामानों का आयात किया, जो अमेरिकी जीडीपी का लगभग 11% था. इनपर टैरिफ से उस साल 80 बिलियन डॉलर की कमाई हुई, जो कुल अमेरिकी कर राजस्व का लगभग 2% था.

अमेरिकियों की कैसे बढ़ेगी मुश्किलें

सवाल ये उठता है कि आखिर टैरिफ का बोझ अमेरिकियों पर कैसे पड़ेगा. दरअसल, अगर अमेरिकी आयातक कंपनी टैरिफ की लागत के चलते अपने सामानों की कीमतें बढ़ा देती हैं तो इसका बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. अगर अमेरिकी आयातक कंपनी इस लागत को खुद सहन करती है और इसे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाती, तो इसे आर्थिक बोझ अमेरिकी कंपनियों के रूप में देखा जाएगा.

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कई अर्थशास्त्रियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-2020) में लागू किए गए टैरिफ का ज्यादातर आर्थिक बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं ने ही उठाया. उदाहरण के लिए चीनी आयात पर लगने वाले टैरिफ के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, खिलौने, और यहां तक ​​कि घरेलू सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है. 

कोलंबिया विश्वविद्यालय के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर जोसेफ स्टिग्लिट्ज का कहना है कि इन टैरिफों का असर अमेरिका और दुनिया के लिए बहुत नकारात्मक होगा. यह स्पष्ट रूप से महंगाई का कारण बनेगा.
 
कनाडा और मेक्सिको से आयातित कारों और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ लागू होने से अमेरिका में कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं, और इस वृद्धि का असर न केवल कार खरीदारों पर पड़ेगा, बल्कि इस उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों पर भी पड़ सकता है.

2018 का उदाहरण लीजिए

उदाहरण के तौर पर, ट्रंप ने 2018 में वाशिंग मशीनों पर 50% टैरिफ लगाया था. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इसके चलते वाशिंग मशीनों की कीमत में लगभग 12% का इजाफा हुआ, इसके कारण अमेरिकी उपभोक्ताओं को इन उत्पादों के लिए हर साल करीब $1.5 बिलियन अधिक चुकाना पड़ा.

यह भी पढ़ें: टैरिफ के बदले टैरिफ... ट्रंप ने 25 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाई तो भड़क उठा कनाडा, ट्रूडो ने भी कर दिया ऐलान

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रोजगार पर भी पड़ेगा असर

टैरिफों के प्रभाव से अमेरिकी श्रमिकों को भी नुकसान हो सकता है. ट्रंप का दावा था कि उनका टैरिफ नीति अमेरिकी श्रमिकों के लिए काम के अवसर पैदा करेगी, लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक भ्रम है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में स्टील उद्योग पर 25% टैरिफ लागू करने के बावजूद, अमेरिकी स्टील उद्योग में रोजगार संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई. इसके विपरीत, अन्य उद्योगों, जो स्टील पर निर्भर थे, जैसे कृषि मशीनरी, में नौकरियों में गिरावट आई. 

यह भी पढ़ें: ट्रंप का ताबड़तोड़ एक्शन... कनाडा, चीन और मैक्सिको पर भारी इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का आदेश

साझेदारों पर बुरा असर होगा

ट्रंप के टैरिफ फैसले से अमेरिका के प्रमुख व्यापार साझेदारों से संबंधों में तनाव बढ़ सकता है. यदि कनाडा, मेक्सिको और चीन इस नीति का विरोध करते हैं, तो व्यापार युद्ध का खतरा हो सकता है. इस स्थिति में, इन देशों द्वारा अमेरिकी सामान पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं, जो अमेरिकी उत्पादों की मांग को घटा सकता है. 2018 में चीन पर टैरिफ लगाने के बाद, चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे सोयाबीन पर 25% का टैरिफ लगा दिया था, जिससे अमेरिकी किसानों को भारी नुकसान हुआ था.

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क्या बोले ट्रूडो

अमेरिका के फैसले पर कनाडा के पीएम ट्रूडो ने कहा कि मैं अमेरिकियों से सीधे बात करना चाहता हूं. यह टैरिफ का फैसला कनाडाई लोगों को नुकसान पहुंचाएगा, लेकिन यह अमेरिकी लोगों के लिए भी खतरनाक है. इससे अमेरिका में भी महंगाई बढ़ेगी और उसे कई क्षेत्रों में नुकसान होगा.

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