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'जो आपने किया, वही ईरान ने किया', पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक को लेकर हुए सवाल पर क्या बोला अमेरिका

ईरान की ओर से की पाकिस्तान में की गई एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनातनी का माहौल है. पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान की एयरस्ट्राइक के जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान में कई आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया है. ईरान और पाकिस्तान के बीच इस तनातनी पर दुनियाभर के देश प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

 अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST

ईरान की ओर से पाकिस्तान के बलूचिस्तान में की गई एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है. इस हमले के बाद पाकिस्तान ने ईरान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है. वहीं, पाकिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर बात करते हुए कहा है कि किसी भी देश को इस खतरनाक रास्ते पर नहीं चलना चाहिए.

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ईरान ने मंगलवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आतंकी संगठन जैश उल-अदल के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी. आतंकी संगठन जैश उल-अदल को 'आर्मी ऑफ जस्टिस' के नाम से भी जाना जाता है. साल 2012 में स्थापित यह संगठन एक सुन्नी आतंकवादी समूह है, जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से ऑपरेट होता है. अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संगठन को आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है. इस संगठन में 500 से 600 आतंकी हैं. 

ईरान और पाकिस्तान के बीच इस तनातनी पर दुनियाभर के देश प्रतिक्रिया दे रहे हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से जब पूछा गया कि ईरान भी अमेरिकी तर्ज पर इराक, सीरिया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों को निशाना बनाता है. उस पर अमेरिका का क्या स्टैंड है?

इस पर उन्होंने कहा कि संदर्भ बहुत मायने रखता है. एक तरफ ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देता है. दूसरी तरफ यह दावा करता है कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए वह हमला किया है. जबकि अमेरिका इराक में कार्रवाई करता है. जहां हमारी सेनाएं इराकी सरकार के नियंत्रण में हैं.

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आतंकवाद को लेकर हमारी नीति जीरो टॉलरेंस वालीः भारत

वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि यह मामला ईरान और पाकिस्तान के बीच का है. जहां तक भारत की बात है. आतंकवाद को लेकर हमारी नीति जीरो टॉलरेंस वाली है. आत्मरक्षा में की गई उन कार्रवाइयों को हम समझते हैं.

अमेरिकी ने ईरानी हमलों की निंदा की

नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से जब पूछा गया, "अमेरिका का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में अमेरिका अपने हितों की रक्षा करेगा. ईरान भी यही तर्क देते हुए इराक, सीरिया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी समूहों को निशाना बनाता है. उस पर अमेरिका का क्या स्टैंड है? क्या अमेरिका उन हमलों की निंदा करता है? क्या अमेरिका को लगता है कि ईरान को अमेरिका की तरह ही अपनी रक्षा करने का अधिकार है?"

इसका जवाब देते हुए मैथ्यू मिलर ने कहा, "अमेरिका इन हमलों की निंदा करता है. हमने पिछले कुछ दिनों में ईरान को अपने तीन पड़ोसियों की संप्रभु सीमाओं को उल्लंघन करते हुए देखा है. संदर्भ बहुत मायने रखता है. एक तरफ ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देता है. दूसरी तरफ यह दावा करता है कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए वह हमला किया है. जबकि अमेरिका इराक में कार्रवाई करता है. जहां हमारी सेनाएं इराकी सरकार के नियंत्रण में हैं."

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चीन ने क्या कहा?

ईरान और पाकिस्तान के बीच उत्पन्न हुए इस हालिया तनाव पर चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने जोर देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बुनियादी मानदंडों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के आधार पर हल करने की जरूरत है. 

नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माओ निंग ने यह भी कहा कि चीन का मानना है कि दो देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के आधार पर हल किया जाना चाहिए. इसके अलावा सभी देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए.

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