
ईरान में शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं. सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो गया है. पिछले महीने राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलिकॉप्टर हादसे में हुई मौत के बाद से ये पद खाली पड़ा था. राष्ट्रपति की दौड़ में कुल चार उम्मीदवार हैं.
शुरुआत में इस पद के लिए छह नाम सामने आए थे. लेकिन आखिरी समय पर उपराष्ट्रपति आमिर हुसैन काजीजादेह हाशमी और तेहरान के मेयर अली रजा जकानी ने अपने नाम वापस ले लिए. इसके बाद अब राष्ट्रपति की दौड़ में सिर्फ चार उम्मीदवार मोहम्मद बाकर कालीबाफ, सईद जलीली और, मुस्तफा पोरमोहम्मदी और मसूद पेजेशकियान हैं.
बता दें कि राष्ट्रपति पद के लिए कुल 80 लोगों ने आवेदन दिया था. लेकिन बाद में सिर्फ छह नामों पर मुहर लगी. तीन बार संसद स्पीकर रह चुके अली लारीजानी ने भी राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए आवेदन दिया था लेकिन उनके नाम पर भी मुहर नहीं लगी.
कौन हैं सईद जलीली?
सईद जलीली राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (NSC) के पूर्व सचिव रहे चुके हैं. वह देश के प्रमिुख परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं. उन्होंने पश्चिमी देशों और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को लेकर हुई बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी. परमाणु हथियार को लेकर उनका आक्रामक रुख रहा है. वे कट्टरपंथी खेमे के माने जाते हैं और अयातोल्ला खामेनई के काफी करीबी हैं. राष्ट्रपति पद के लिए इनका दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है.
कौन हैं मोहम्मद बाकर कालीबाफ?
मोहम्मद बाकर कालीबाफ को सईद जलीली गुट का ही माना जाता है. वह संसद के मौजूदा स्पीकर हैं. वे तेहरान के मेयर और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख भी रह चुके हैं. इसके साथ ही ईरान पुलिस प्रमुख भी रह चुके हैं.
कौन हैं मुस्तफा पोरमोहम्मदी?
मुस्तफा पोरमोहम्मदी पूर्व कानून और गृह मंत्री हैं. उनकी छवि कट्टरपंथी नेता की है. लेकिन वे ईरानी महिलाओं के साथ क्रूरता के खिलाफ रहे हैं. वह कह चुके हैं कि अगर राष्ट्रपति बनते हैं तो हिजाब कानून को खत्म कर देंगे.
कौन हैं मसूद पेजेशकियन ?
तबरेज सांसद मसूद पेजेशकियन कार्डियक सर्जन भी हैं. उनकी पहचान उदारवादी नेता की रही है. उन्हें पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी का करीबी माना जाता है. वह खुले तौर पर कई बार हिजाब का विरोध कर चुके हैं. वह कह चुके हैं कि किसी के भी पास मोरल पुलिसिंग का हक नहीं है. वह खुद को रूहानी और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी जैसे सुधारवादी लोगों और 2009 के ग्रीन मूवमेंट विरोध का नेतृत्व करने वालों के साथ जोड़ने की कोशिश कर चुके हैं.
क्या है राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे?
इस बार राष्ट्रपति चुनाव में कई अहम मु्द्दे चर्चा में बने हुए हैं. इनमें भ्रष्टाचार के लेकर ब्रेन ड्रेन, प्रेस की आजादी, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और हिजाब कानून जैसे मुद्दे हैं. साल 2022 में देशव्यापी हिजाब विरोधी आंदोलन के बाद से हिजाब एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है.