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भारत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीत! ईरान ने 5 भारतीय नाविकों को छोड़ा, जानें इजरायल से क्या है कनेक्शन

भारत को एक बड़ी डिप्लोमेटिक जीत मिली है. ईरान ने उन 5 भारतीय सैलर्स (नाविक) को छोड़ दिया है, जिन्हें ईजरायल से संबंधित जहाज को कब्जे में लेने के बाद पकड़ लिया गया था. ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है. पांचों सैलर्स तेहरान से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं.

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aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2024,
  • अपडेटेड 9:39 AM IST

भारत को एक बड़ी डिप्लोमेटिक जीत मिली है. ईरान ने उन 5 भारतीय सैलर्स (नाविक) को छोड़ दिया है, जिन्हें ईजरायल से संबंधित जहाज को कब्जे में लेने के बाद पकड़ लिया गया था. ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है. पांचों सैलर्स तेहरान से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं.

रिहाई के बारे में बताते हुए भारतीय दूतावास ने ईरानी अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया है. सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट में ईरान के भारतीय दूतावास ने लिखा,'MSC एरीज (इजरायल संबंधित जहाज) पर सवार 5 भारतीय नाविकों को ईरान से रिहा कर दिया गया है. बंदर अब्बास दूतावास के भारतीय वाणिज्य दूतावास के साथ अच्छे समन्वय के लिए ईरानी अधिकारियों का धन्यवाद.'

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सबसे पहले केरल की महिला को किया था रिहा

दरअसल, इजराइल से जुड़े कार्गो शिप को ईरान ने 13 अप्रैल को अपने कब्जे में ले लिया था. इस जहाज में 17 भारतीय नागरिक सवार थे. जहाज को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) के पास जब्त किया था. इसके बाद 18 अप्रैल को 17 भारतीय नाविकों में से एक महिला को रिहा कर दिया गया था. वह केरल के त्रिशूर में स्थित अपने घर लौट आई थी. त्रिशूर की एन टेसा जोसेफ जब कोचीन पहुंचीं तो अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया था.

ईरान ने सबसे पहले केरल की महिला क्रू मेंबर ऐन टेसा को छोड़ा था.

जहाज में सवार 25 क्रू मेंबर्स को बनाया था बंधक

बता दें कि इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष चल रहा है. इस बीच ही इजरायल के मालवाहक जहाज एमएससी एरीज को ओमान की खाड़ी से गुजरते वक्त ईरान ने जब्त कर लिया था. शिप में सवार क्रू मेंबर्स समेत 25 लोगों को भी ईरान ने बंधक बना लिया था. इनमें एक महिला कैडेट समेत 17 भारतीय स्टाफ था. मामला संज्ञान में आने के बाद भारत सरकार एक्टिव हो गई थी और ईरान सरकार से सीधे संपर्क किया था. इसके बाद सबसे पहले महिला कैडेट एन टेसा जोसेफ को छोड़ा गया था.

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ईरान से लौटकर महिला ने बताई थी आपबीती

ईरान से लौटने के बाद ऐन टेसा ने बताया था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी घटना घटेगी. वह जानती थीं कि युद्ध चल रहा है, लेकिन इसकी उम्मीद नहीं थी. भले ही ईरान ने जहाज को जब्त कर लिया, लेकिन उन्होंने हमारे क्रू मेंबर्स के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया. खाने की कोई दिक्कत नहीं थी. मेस में खाना बना सकते थे, अनाउंसमेंट करा देते थे- हमें खाना खाना है और वापस केबिन में जाना है. उन्होंने हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. उनका क्रू को नुकसान पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. वहां एन टेसा के अलावा चार केरलवासी थे. 

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