Advertisement

'इस्लाम का गढ़ रहकर भी...', ईरान के नेता तुर्की पर क्यों झल्लाए, ट्रंप को भी दी नसीहत

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के सलाहकार ने सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध के बीच तुर्की को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि इस्लाम से जुड़ा लंबा इतिहास रखने वाला ईरान इजरायल और अमेरिका के जाल में फंस जाएगा, इसकी ईरान को उम्मीद नहीं थी.

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Photo- Anadolu agency) इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Photo- Anadolu agency)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध के बीच ईरान ने तुर्की पर निशाना साधा है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली वेलायती ने कहा है कि तुर्की अमेरिका और इजरायल के बिछाए जाल में फंस गया है जिसकी उनके देश को उम्मीद नहीं थी. 

समाचार एजेंसी Tasnim को दिए एक इंटरव्यू में अली अकबर वेलयाती ने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि हकन फिदान (तुर्की के विदेश मंत्री), जो खुफिया और विदेश नीति के क्षेत्र में एक अनुभवी व्यक्ति हैं, तुर्की की विदेश नीति की कुछ गलतियों को सुधार लेंगे. हालांकि, हमें उम्मीद नहीं थी कि इस्लाम से जुड़ा एक लंबा इतिहास रखने वाला तुर्की अमेरिका और इजरायल के बिछाए जाल में फंस जाएगा.'

Advertisement

उन्होंने कहा कि 'यह हैरानी की बात है कि इस तरह के काम तुर्की के लोगों के नाम पर किए जा रहे हैं जो पूरे इतिहास में इस्लाम पर अपनी स्थिति को लेकर अडिग रहे हैं.'

वेलायती ने आगे कहा कि ईरान अंत तक सीरिया की सरकार को अपना पूर्ण समर्थन देता रहेगा. उन्होंने कहा, 'आज, सीरिया के सहयोगियों की संख्या 2011 (सीरिया में युद्ध की शुरुआत) की तुलना में अधिक है. ईरान के अलावा, रूस, लेबनानी हिज्बुल्लाह, इराकी पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स, यमन में हूती और फिलिस्तीनी...ये सभी सीरिया और उसकी वर्तमान सरकार की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करने में एकजुट हैं.'

सीरिया में ऐसा क्या हुआ कि तुर्की पर झल्लाया ईरान

बीते शनिवार को चरमपंथी समूह हयात तहरीर अल शाम ने सीरिया के अलेप्पो शहर पर हमला कर दिया. अलेप्पो शहर पर असद सरकार का कब्जा था लेकिन एक बार फिर यहां विद्रोही सक्रिय हो गए हैं. अलेप्पो एयरपोर्ट पर भी विद्रोहियों का कब्जा हो चुका है. इसे देखते हुए रूस ने अपने मित्र असद की मदद के लिए चरमपंथी समूह पर एयरस्ट्राइक किए हैं.

Advertisement

ईरान भी मदद को आया है और उसने कहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद अगर आग्रह करते हैं तो वो अपनी सेना सीरिया में भेजेगा. 

इधर, तुर्की ने असद सरकार के समक्ष विद्रोहियों से बातचीत का प्रस्ताव रखा था लेकिन असद की सरकार ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है. 

तुर्की जहां बशर अल असद की सरकार के खिलाफ विद्रोहियों की मदद करता है, वहीं ईरान असद सरकार का समर्थन करता है. इसकी एक वजह धार्मिक भी है. तुर्की एक सुन्नी बहुल देश है जबकि असद सरकार अलावी समुदाय से संबंध रखती है जो शिया मुसलमानों का ही हिस्सा माने जाते हैं. ईरान शिया मुस्लिम बहुल देश है. 

तुर्की चाहता है कि सीरिया में सत्ता की कमान सुन्नी समुदाय के हाथ में आए ताकि उसे फायदा हो सके. इसके साथ ही बशर अल असद की सरकार में सीरिया में कुर्द मिलिटेंट्स और पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स के लोग बढ़ते जा रहे हैं जो तुर्की में अशांति फैलाने का काम करते हैं. 

जो बाइडेन प्रशासन पर भी बोले खामेनेई के सलाहकार

खामेनेई के सलाहकार वेलायती ने कहा कि जो बाइडेन के वर्तमान प्रशासन ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध भड़काने का काम किया है. उन्होंने कहा, 'मैं (अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति) डोनाल्ड ट्रंप को यह समझने की सलाह देता हूं कि डेमोक्रेटिक प्रशासन ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी नीति को आगे बढ़ाने के लिए बहुत कम काम किया है.

Advertisement

उन्होंने आगे कहा, 'प्रशासन ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष और युद्ध को बढ़ाने का काम किया है. जब भी युद्ध की आग भड़कती है, तो उसे बुझाने के बजाय अमेरिका उसमें घी डालने का काम करता है. अगर ट्रंप अपने नए कार्यकाल को समझदारी से चलाना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पहले कार्यकाल के अनुभव से सीखना होगा और समझना होगा कि आज दुनिया के हालात पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल और जटिल हैं. कोई भी स्वतंत्र देश उनकी धमकियों और डराने-धमकाने के आगे नहीं झुकेगा.'

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement