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इराक में 9 की उम्र में होगी बच्चियों की शादी, नहीं रहेगा तलाक का अधिकार!

इराक में विवाह से जुड़ा कानूनी संशोधन पारित होने को तैयार है, जिसके तहत पुरुषों को नौ साल की उम्र तक की बच्चयों से शादी करने की अनुमति होगी. इतना ही नहीं, महिलाओं को तलाक, बच्चों की देखभाल और विरासत के अधिकार से वंचित करने के लिए भी संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं.

प्रतीकात्मक फोटो (AI Meta Generated Photo) प्रतीकात्मक फोटो (AI Meta Generated Photo)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

इराक की सरकार देश में विवाह कानून में संशोधन करने जा रही है, जिसके तहत लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र को 18 वर्ष से घटाकर 9 साल कर दिया जाएगा, जिससे पुरुषों को छोटी बच्चियों से विवाह करने की अनुमति मिल जाएगी.

प्रस्तावित कानूनी बदलाव महिलाओं को तलाक, बच्चों की देखभाल और उत्तराधिकार के अधिकारों से भी वंचित करता है. इराक की संसद, जिसमें रूढ़िवादी शिया मुस्लिम दलों के गठबंधन का प्रभुत्व है, वह एक संशोधन पर मतदान करने की तैयारी कर रही है जो देश के "पर्सनल स्टेट्स लॉ" को पलट देगा.

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महिलाओं के कई अधिकार छीन लेगा नया कानून

 पुराने कानून को लॉ 188 के नाम से भी जाना जाता है और इसे 1959 में जब पेश किया गया था. तब इसे मध्य पूर्व के सबसे प्रगतिशील कानूनों में से एक माना गया था. इस कानून में इराकी परिवारों के मामलों को नियंत्रित करने के लिए कई नियम प्रदान किए गए थे जिसमें धार्मिक संप्रदाय से संबंधित मामले भी शामिल थे. पुराना नियम अब्दुल करीम कासिम सरकार ने बनाया था. कासिम की पहचान प्रोग्रेसिव लेफ्टिस्ट के तौर पर थी, जिनके समय में कई बड़े बदलाव लाए गए. इनमें से एक था- 18 साल की उम्र होने पर ही लड़कियों की शादी.

विवाह की कानूनी आयु कम करने के साथ-साथ नया संशोधन महिलाओं के तलाक, बच्चों की देखभाल और उत्तराधिकार के अधिकार को भी समाप्त कर देगा.

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पहले महिलाओं की नाराजगी की वजह से विफल हई थी कोशिश

सत्तारूढ़ गठबंधन का कहना है कि यह कदम इस्लामी कानून की सख्त व्याख्या के अनुरूप है और इसका उद्देश्य युवा लड़कियों को “अनैतिक संबंधों” से बचाना है. लॉ 188 में संशोधन का दूसरा भाग 16 सितंबर को पारित किया गया था. यह पहली बार नहीं है जब इराक में शिया पार्टियों ने पर्सनल स्टेट्स लॉ में संशोधन करने की कोशिश की है - 2014 और 2017 में इसे बदलने के प्रयास विफल हो गए थे, जिसका मुख्य कारण इराकी महिलाओं की नाराजगी थी.

यह भी पढ़ें: लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 साल करने की तैयारी, क्या है इराक का प्रस्तावित कानून जिसपर मचा हल्ला?

चैथम हाउस के वरिष्ठ अनुसंधान फेलो डॉ. रेनाड मंसूर ने कहा कि गठबंधन के पास अब बड़ा संसदीय बहुमत है और वह संशोधन आराम से पारित करा सकता है. डॉ. रेनाड ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन शिया इस्लामवादी समूहों द्वारा “अपनी ताकत को मजबूत करने” और वैधता हासिल करने की दिशा में उठाया गया राजनीतिक कदम का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संशोधन विधेयक संसद में मतदान के लिए कब आएगा, लेकिन यह किसी भी समय आ सकता है.

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क्या कहते हैं  एक्सपर्ट
विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह संशोधन महिलाओं, लड़कियों और इराक के सामाजिक ताने-बाने पर हमला है जो महिलाओं के सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों को प्रभावी रूप से समाप्त कर देगा.

ह्यूमन राइट्स वॉच की इराक शोधकर्ता सारा सनबार ने कहा, "संशोधन न केवल इन अधिकारों को कमजोर करेगा, बल्कि उन्हें मिटा भी देगा." अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनी सलाहकार और मॉडल ने द टेलीग्राफ को बताया कि उन्हें "डर" है कि इराक की शासन प्रणाली को एक नई प्रणाली से बदल दिया जाएगा. यह वही प्रणाली है जो अफगानिस्तान और ईरान की शासन व्यवस्था का आधार है, जहां एक संरक्षक न्यायवादी देश के सर्वोच्च नेता के रूप में कार्य करता है.

यह भी पढ़ें: वो मुस्लिम देश, जो गैर-मजहब में शादी पर नहीं लगाता रोकटोक, क्या हैं इस्लाम में शादी के नियम?

इराक में बहुत होते हैं बाल विवाह

 इराक में पहले से ही बाल विवाह की दर बहुत ज़्यादा है. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, इराक में 28 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र तक हो जाती है. ऐसा व्यक्तिगत कानून में एक खामी के कारण है, जो अदालतों के बजाय धार्मिक नेताओं को हर साल हजारों विवाह संपन्न कराने की अनुमति देता है. इनमें पिता की अनुमति से 15 वर्ष की आयु तक की लड़कियों की शादियां भी शामिल हैं.

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ये अपंजीकृत विवाह इराक के आर्थिक रूप से गरीब, अति-रूढ़िवादी शिया समुदायों में व्यापक रूप से प्रचलित हैं.  चूंकि इन विवाहों को कानून द्वारा मान्यता नहीं दी गई है, इसलिए लड़कियों और उनके बच्चों को अनेक अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है. उदाहरण के लिए, अस्पताल विवाह प्रमाण पत्र के बिना प्रसव के लिए महिलाओं को भर्ती करने से मना कर सकते हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, यह संशोधन इन धार्मिक विवाहों को वैध बना देगा, जिससे युवा लड़कियों को यौन और शारीरिक हिंसा का खतरा बढ़ जाएगा.साथ ही उन्हें शिक्षा और रोजगार से भी वंचित किया जाएगा.

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