
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा है कि इजरायल युद्ध के समय नैरेटिव की जंग जीतने के लिए सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल भारत से सीख सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के पास शक्तिशाली मीडिया आउटलेट्स हैं जो अलजजीरा (कतर का न्यूज नेटवर्क) और टीआरटी वर्ल्ड (तुर्की का सरकारी ब्रॉडकास्टर) जैसे मीडिया आउटलेट्स की तरह अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं. उनका कहना है कि इससे भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ी है लेकिन इजरायल इसमें पिछड़ गया है.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि जब इजरायल ने हमास के खात्मे के लिए अपना सैन्य अभियान आगे बढ़ाया तो गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन की लहर चल पड़ी. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में एकमात्र यहूदी देश होने के नाते इजरायल भू-राजनीतिक संरचना में पिछड़ गया है.
उन्होंने कहा, 'हम एकमात्र यहूदी देश हैं. आपके पास भी कई शक्तिशाली मीडिया आउटलेट्स हैं जिसमें अलजजीरा और टीआरटी जैसे मीडिया संगठनों की तरह अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है. ये बात साफ है कि हम इसमें पर्याप्त निवेश नहीं कर रहे हैं क्योंकि हमारा अधिकांश निवेश हार्ड पावर में चला गया है, सॉफ्ट पावर में नहीं. जबकि आप अपनी हार्ड और सॉफ्ट पावर को मिलाकर ऐसे समूहों को चुनौती दे पा रहे हैं.'
इजरायल के राष्ट्रीय हितों का समर्थन करती है भारत सरकार
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत से ही जंग छिड़ी है. इजरायल का कहना है कि जब तक फिलिस्तीनी समूह हमास का खात्मा नहीं हो जाता, वो गाजा में अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा. इस संबंध में भारत ने हमेशा की तरह तटस्थता की नीति अपनाए रखी है.
भारत ने इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों के साथ अपने संबंध एकसमान बनाए रखा है. भारत एक तरफ जहां गाजा में युद्धविराम के लिए बार-बार आह्वान करता रहा है. वहीं, दूसरी तरफ आतंकवाद से रक्षा करने के इजरायल के अधिकार का भी दृढ़ता से समर्थन करता रहा है. इस संबंध में अजार ने कहा कि भारत सरकार इजरायल के 'मुख्य राष्ट्रीय हितों' का समर्थन करती रही है.
राजदूत अजार ने इजरायल की तरफ से प्रतिबंधित फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNRWA ( United Nations Relief and Works Agency for Palestine Refugees) को भारतीय मदद जारी रखने पर भी बात की. साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में लाए गए प्रस्ताव पर भारत की वोटिंग पर बात करते हुए कहा कि इजरायल-भारत दोस्त हैं और दोनों देश इन मुद्दों पर बात करना जारी रखेंगे.
उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि जब हमारे मूल राष्ट्रीय हितों की बात आती है, तो भारत काफी सहयोगी रहा है. बेशक, हम चाहेंगे कि भारत सहित कई देश अपने वोटिंग पैटर्न में बदलाव करें. मैंने अपने भारतीय दोस्तों से इस संबंध में बात भी की है कि अगर वो लोगों को सहायता ही पहुंचाना चाहते हैं तो UNRWA के अलावा और भी रास्ते हैं. आखिरकार हम दोस्त हैं और हमें इस संबंध में बातचीत जारी रखनी चाहिए.'
पिछले साल की तरह, भारत ने इस साल भी UNRWA के लिए 50 लाख डॉलर जारी किए हैं. सरकार ने पिछले हफ्ते संसद को यह भी बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए 13 प्रस्तावों में से 10 के पक्ष में उसने मतदान किया तथा 3 प्रस्तावों पर मतदान नहीं किया.
टू स्टेट सॉल्यूशन पर क्या बोले इजरायली राजदूत
इजरायल फिलिस्तीनी मुद्दे के समाधान के लिए टू स्टेट सॉल्यूशन यानी फिलिस्तीनियों के लिए एक अलग राष्ट्र का विरोध करता रहा है. हालांकि, भारत बार-बार फिलिस्तीनियों के लिए एक अलग राष्ट्र का बात करता है. राजदूत अजार ने कहा कि इजरायल चाहता है कि फिलिस्तीनी लोग जब तक इजरायल को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहेंगे, उन्हें संप्रभुता न दी जाए.
उन्होंने कहा, 'जब तक आपके पास ऐसी आबादी है जो आपको नष्ट करने की कोशिश करती रहेगी, आप उन्हें पूरी संप्रभुता नहीं दे पाएंगे क्योंकि वो इसका इस्तेमाल आपको बर्बाद करने के लिए करेंगे. हमने गाजा पट्टी को पूरी संप्रभुता देने की कोशिश की. देखिए क्या हुआ... 17 साल तक हमने मौका दिया. और फिर हमास ने यहूदियों को मारने के लिए दो या तीन साल की उम्र से ही अपने लोगों को ट्रेनिंग दी. इसलिए, हमें फिलिस्तीनियों को पूरी संप्रभुता देने को लेकर यथार्थवादी होना चाहिए जब तक कि नई पीढ़ी न आ जाए जो अलग तरह से सोचती हो.'