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ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक... परमाणु संयंत्र और यूरेनियम प्रोग्राम वाले ईरानी शहर को इजरायल ने बना दिया बदलापुर

ईरान का इस्फहान स्ट्रैटेजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण शहर है. यहां मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट साइट्स के साथ-साथ कई अहम बेस हैं. यह तेहरान और मशाद के बाद ईरान का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. यहां की आबादी लगभग 22 लाख है. यहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का सैन्यअड्डा है. देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट भी इसी शहर में है. 

इजरायल का ईरान पर हमला इजरायल का ईरान पर हमला
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 11:00 AM IST

इजरायल ने ईरान के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद काउंटर अटैक किया है. इजरायल ने शुक्रवार तड़के ईरान के कई शहरों में मिसाइलें दागीं. लेकिन इस हमले का मुख्य केंद्र ईरानी शहर इस्फहान (Isfahan) है. इस शहर के न्यूक्लियर प्लांट और एयरपोर्ट को निशाना बनाकर हमला किया गया. लेकिन अहम सवाल ये है कि इजरायल ने 'बदले' के लिए इसी शहर को क्यों चुना?

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ईरान का इस्फहान स्ट्रैटेजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण शहर है. यहां मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट साइट्स के साथ-साथ कई अहम सैन्यअड्डे हैं. यह तेहरान और मशाद के बाद ईरान का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. यहां की आबादी लगभग 22 लाख है.

इजरायल ने क्यों बनाया इस्फहान को निशाना?

ईरानी शहर इस्फहान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रमुख सैन्यअड्डा है. देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट भी इसी शहर में है. इस शहर में कई न्यूक्लियर प्लांट हैं. ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम प्रोग्राम भी इसी जगह से ऑपरेट होता है.

इस्फहान में ईरानी सेना का प्रमुख एयरबेस भी है, जहां ईरान का सबसे बड़ा जहाजी बेड़ा है. यहां US मेड F-14 टॉमकैट लड़ाकू विमान है, जो उसे 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले अमेरिका से मिला था. इस लड़ाकू विमान की रफ्तार 2485 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसकी कॉम्बैट रेंज 930 किलोमीटर है और इसमें दस तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं, जिसमें रॉकेट, बम और मिसाइलें शामिल हैं. ईरान कई अहम जंगों में इसका इस्तेमाल करता आया है. माना जा रहा है कि ईरान के एक महत्वपूर्ण शहर को निशाना बनाकर इजरायल एक बड़ा संदेश देना चाहता है कि वह ईरान की रीढ़ की हड्डी तोड़कर उसे कमजोर कर सकता है.

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इजरायल के हमले पर ईरान का जवाब

इजरायल के हमले को लेकर ईरान ने कहा है कि इस्फहान में हमारे सभी न्यूक्लियर प्लांट सुरक्षित है. ईरान के नेशनल साइबरस्पेस सेंटर के प्रवक्ता हुसैन दलीरियन ने कहा कि हमने इजरायल के तीन ड्रोन मार गिराए हैं. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी का कहना है कि इजरायल ने संभावित रूप से ईरान के सैन्य रडार को निशाना बनाकर हमला किया था.

ईरान के न्यूक्लियर प्लांट पर लटक रही थी खतरे की तलवार

ईरान पर इजरायल के हमले से पहले से ही अंदेशा जताया जा रहा था कि तेहरान के न्यूक्लियर प्लांट्स खतरे की जद में हैं. कई विश्लेषकों ने कहा था कि नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को डीरेल करने का मन बना लिया है और इसके लिए सबसे आसान रास्ता इस्फहान शहर को टारगेट करना है. 

जब ईरान ने इजरायल पर दागी थी मिसाइलें

बता दें कि ईरान ने 13 अप्रैल तड़के इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए थे. ईरान ने इजरायल पर 300 से ज्यादा अलग-अलग तरह के ड्रोन हमले किए थे, जिनमें किलर ड्रोन से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइलें शामिल थी. इस हमले के तुरंत बाद इजरायली सेना ने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया था.

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इजराली सेना IDF के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने बताया था कि ईरान ने इजरायल पर सीधे हमला किया है. इजरायल ने एरो एरियल डिफेंस सिस्टम के जरिए इन अधिकतर मिसाइलों को मार गिराया है. कहा गया कि इजरायल ने ईरान के 99 फीसदी हवाई हमलों को विफल कर दिया था. इस हमले के बाद अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देश इजरायल की मदद को आगे आए थे. 

ईरान ने इजरायल पर क्यों किया था हमला?

एक अप्रैल को सीरिया में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया गया था. इस हमले में ईरान ने अपने एक टॉप कमांडर सहित कई सैन्य अधिकारियों की मौत का दावा किया गया था. ईरान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया था. यही वजह है कि उसने बदला लेने के लिए इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले किए और इस कार्रवाई को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस का नाम दिया था.

ईरान का कहना है कि उसने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' इसलिए कोडनेम दिया है ताकि वो अपने दोस्तों और दुश्मनों को बता सके कि वो जो भी कहता है उस पर अमल करता है. वो सच्चा वादा करना जानता है. जो वादा करता है उसे निभाता है.

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