
मिस्र ने रविवार को कहा कि वह 'फिलिस्तीनी मुद्दे के भविष्य पर' एक शिखर सम्मेलन बुलाने की योजना बना रहा है. इजरायल-हमास की लड़ाई के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन रविवार को राजधानी काहिरा में मौजूद थे. इसी बीच मिस्र ने फिलिस्तीनियों के समर्थन में यह घोषणा की है.
गाजा पट्टी के अंदर जाने और बाहर आने का एकमात्र रास्ता राफा बॉर्डर क्रॉसिंग पर मिस्र का नियंत्रण है. इजरायल हमास के नियंत्रण वाले गाजा पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. हमास को खत्म करने के मकसद से इजरायल ने गाजा को बिजली, पानी और बाकी सभी जरूरी चीजों की सप्लाई रोक दी है. राफा बॉर्डर को भी इजरायल ने मंगलवार को बंद कर दिया.
इजरायल के राफा बॉर्डर बंद करने से फिलिस्तीनी और गाजा में फंसे बाकी देशों के लोग गाजा छोड़कर भाग नहीं पा रहे हैं. बॉर्डर बंद होने से गाजा को जा रही मानवीय मदद भी रुकी हुई है. मदद से भरे ट्रक राफा बॉर्डर से 50 किलोमीटर दूर अल एरिश में इंतजार कर रहे हैं.
फिलिस्तीनी मुद्दे के भविष्य पर शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा मिस्र
मिस्र के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सिसी ने गाजा में सैन्य अभियान की तीव्रता पर रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की.
राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि बैठक के दौरान संघर्ष को कम करने और गाजा को जरूरी मदद पहुंचाने के लिए सहयोगियों और मानवीय समूहों के साथ मिलकर राजनयिक प्रयास करने पर जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि मिस्र आने वाले समय में फिलिस्तीनी मुद्दे के भविष्य पर एक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. हालांकि, उन्होंने शिखर सम्मेलन की कोई तारीख नहीं बताई.
फिलिस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास के लड़ाकों ने 7 अक्टूबर को अचानक इजरायल पर हमला कर दिया जिसमें सैकड़ों फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए. बदले की कार्रवाई में इजरायल ने गाजा पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं.
दोनों पक्षों की लड़ाई में अब तक 1,300 से अधिक इजरायलियों की जान गई है और गाजा में 2,300 लोग मारे गए हैं.
इजरायल की गाजा में जमीनी कार्रवाई की तैयारी और लोगों को चेतावनी
इजरायल गाजा में जमीनी कार्रवाई शुरू करने की पूरी तैयार कर चुका है और उसने गाजा से लगी अपनी सीमा पर लाखों रिजर्व सैनिकों की तैनाती कर दी है. सैनिक भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद लेकर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बस एक आदेश का इंतजार कर रहे हैं. जमीनी कार्रवाई से पहले इजरायल ने उत्तरी गाजा में रहने वाले 11 लाख लोगों को दक्षिणी गाजा में चले जाने की चेतावनी दी थी. हालांकि, अभी भी उत्तरी गाजा की आधे से अधिक आबादी अपने घरों में ही है.
मिस्र ऐतिहासिक रूप से इजरायल और हमास के बीच प्रमुख मध्यस्थ रहा है. गाजा पर इजरायली हमले शुरू होने के बाद हजारों की संख्या में फिलिस्तीनी भागकर मिस्र में शरण ले रहे हैं. इससे मिस्र पर शरणार्थियों का दबाव बढ़ रहा है.
फिलिस्तानी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन को चेतावनी दी थी कि गाजा के लोगों का अपने घरों को छोड़कर बाहर निकलना 'दूसरा नकबा' होगा. 1948 में जब इजरायल बना था तब 7 लाख 60 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों को विस्थापन का सामना करना पड़ा था जिसे मुस्लिम देश 'नकबा' कहते हैं.
फिलिस्तीनियों को गाजा से निकालकर कहीं और बसाना चाहता है इजरायल?
फिलिस्तीनियो के गाजा छोड़ने की इजरायल की चेतावनी ने यह आशंका भी पैदा कर दी है कि इजरायल गाजा में रहने वाले लोगों को मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में फिर से बसाने पर जोर दे रहा है. इजरायल ने पूर्व में इस प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया था.
अलजजीरा के साथ एक टीवी इंटरव्यू में इजरायल के पूर्व उप विदेश मंत्री डैनियल अयालोन ने कहा भी है कि मिस्र को आगे आना होगा और सिनाई प्रायद्वीप के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र में गाजा को लोगों को अस्थायी रूप से रहने की अनुमति देनी होगी.
हालांकि, मिस्र ने इसे लेकर सख्त प्रतिक्रिया दी है. रविवार की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा गया, 'मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा हमारे लिए रेड लाइन है और इसकी रक्षा करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी.'