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कैसे एक 'मासूम' बच्चे की नफरत से खड़ा हुआ हमास? इजरायल का खात्मा ही है मकसद

फिलिस्तीनी आतंकी गुट हमास के इजराइल पर हमला के बाद से माहौल गर्म है. इस हमले ने इजराइल को हिलाकर रख दिया है. हालांकि अब इजरायल की ओर से भी जवाबी कार्रवाई जारी है. लेकिन बड़ा सवाल है कि ये हमास कहां से और क्यों आया और इसे किसने बनाया था. 

फोटो- AFP/Getty Images फोटो- AFP/Getty Images
मृणाल सिन्हा
  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 12:36 PM IST

बीते दिन फिलिस्तीनी आतंकी गुट हमास ने इजराइल पर हमला कर 300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. हमास ने इजराइल पर एक के बाद एक 5 हजार रॉकेट दागकर तबाही मचा दी. यूं तो हमास और इजराइल के बीच का संघर्ष कोई नया नहीं है लेकिन शनिवार को किए गए हमले ने पूरे इजराइल को हिलाकर रख दिया है. सवाल है कि आखिरी हमास है क्या? ऐसे में ये बता देना जरूरी है कि ये बर्बर आतंकी संगठन ऐसे इंसान के दिमाग की उपज है जिसके दिल में बचपन से ही इजरायल के लिए जहर भर गया था. जी हां सही पढ़ा आपने.

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हमास की कहानी 1948 के कब्जे के बाद इजरायली सेना द्वारा नष्ट कर दिए गए एक छोटे फिलिस्तीनी गांव अल-जुरा में पैदा हुए शेख अहमद यासीन से जुड़ी है. 1936 में पैदा हुए यासीन को 12 साल की उम्र में अल-जुरा पर बुलडोजर चल जाने के चलते अपने परिवार के साथ गाजा पट्टी में शिफ्ट होना पड़ा.  व्हील चेयर पर चलने वाले मासूम यसीन के मन ने उसी समय से इजरायल के लिए नफरत के बीज पनप गए. बाद में ये शेख अहमद यासीन ही था जिसने हमास की नींव रखी.  

मिस्र में पढ़ाई की और गाजा में बना नेता

1959 में, यासिन ने मिस्र के ऐन शम्स विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन पैसों की दिक्कत के चलते उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. गाजा लौटने पर, वह मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड शिक्षाओं से प्रभावित हो गए. इस्लामी अध्ययन और अरबी शिक्षा के प्रति यासीन के लगाव  ने  उसे गाजा में जाना माना एक धार्मिक नेता बना दिया. यहां तक भी ठीक था लेकिन किसे पता था कि यासीन अब क्या करने वाला है.

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अहमद यासीन ने क्यों बनाया हमास?

1983 में, शेख यासीन को गाजा में इजरायली सेना ने हिरासत में ले लिया. कथित तौर पर उसपर चुपचाप संगठन बनाने और हथियार रखने के लिए 13 साल की जेल की सजा मिली. दो साल की सजा के बाद, उन्हें कैदी विनिमय (प्रिजनर एक्सचेंज) में रिहा कर दिया गया. बचपन से इजरायल के लिए मन में जहर पाले यासीन ने 1987 में  गाजा स्थित मुस्लिम ब्रदरहुड का नेतृत्व करते हुए हमास की स्थापना की.  हमास की स्थापना सीधे- सीधे इजराइल को खदेड़ने और उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से की गई थी.  हमास और पूरे फिलिस्तीन द्वारा पूरे देश पर कब्जा करने के लिए हमलावर के रूप में देखा जाने लगा. 

फोटो- AP

'फिलिस्तीन में तख्ता पलट'

2006 में फिलिस्तीनी संसदीय चुनावों में अपनी जीत के बाद हमास ने गाजा पर कब्ज़ा कर लिया था. तब यहां आखिरी बार चुनाव आयोजित हुए थे. 2007 में हमास ने वेस्ट बैंक में सत्ता पर काबिज और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के प्रमुख राष्ट्रपति महमूद अब्बास के लड़ाकों को एक गृह युद्ध शिकस्त दी थी. अब्बास ने गाजा पर हमास के कब्जा करने को तख्तापलट करार दिया था.

बताते चलें कि आज हमास को  इजराइल समेत अमेरिका, यूरोपीय संघ, कनाडा, मिस्र और जापान भी आतंकवादी संगठन मानता है. लेकिन चीन, मिस्त्र, ईरान नॉर्वे, कतर, ब्राजील, रूस, तुर्की और सीरिया ऐसे देश हैं इसे आतंकी संगठन नहीं मानते हैं.

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1989 में 40 साल जेल की सजा

साल 1989 में, हिंसा भड़काने और एक इजरायली सैनिक की हत्या का आदेश देने के आरोप में यासिन को फिर से गिरफ्तार किया गया और 40 साल जेल की सजा सुनाई गई. इस बार उन्होंने आठ साल जेल में बिताए, उसके दो बेटे स्वेच्छा से उसके साथ जेल गए. 1997 में, यासीन को इज़राइल और जॉर्डन के राजा हुसैन के बीच एक समझौते के हिस्से के रूप में रिहा कर दिया गया था. लेकिन इन आठ सालों में उसे कई बीमारियां लग गईं.

 फिलिस्तीनी प्रशासन के काम से चिढ़

हमास नेता के रूप में, यासीन ने इजरायल के कब्जे के खिलाफ प्रतिरोध की पुरजोर वकालत की, इजरायल के साथ बातचीत में इस दृष्टिकोण को प्राथमिकता न दिए जाने पर वे फिलिस्तीनी प्रशासन से चिढ़ भी गए. गैर-इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों पर शासन करने वाली फिलिस्तीनी अथोरिटी, कुछ क्षेत्रों में इजरायल के डोमिनेंस के साथ को- एगजिस्टेंस में थी, जिससे क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ गई.  

2004 में हवाई हमले में मौत

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष जारी रहा, सितंबर 2000 में शुरू हुए विद्रोह के दौरान यासीन ने युद्धविराम पहल का प्रस्ताव रखा, वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी यरुशलम से इज़राइल की वापसी का आह्वान किया और फिलिस्तीनी कार्यकर्ताओं की हत्या को समाप्त करने का आग्रह किया. लेकिन, सितंबर 2003 में, एक इजरायली F-16 हमले ने गाजा शहर में यासीन को निशाना बनाया, जिससे वह घायल हो गया लेकिन जीवित रहा. हालाँकि, 22 मार्च 2004 को, सुबह की अजान के दौरान एक इजरायली हेलीकॉप्टर हमले में नौ अन्य लोगों के साथ यासीन की जान चली गई.

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फोटो- Reuters

क्या हैं हमास के सिद्धांत 
 
एक विदेशी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार,  हमास इज़रायल के स्टेटहुड को मान्यता नहीं देता है जबकि 1967 की सीमाओं पर फिलिस्तीन के स्टेटहुड को स्वीकार करता है. फिलिस्तीनी समूह के नेता खालिद मेशाल ने 2017 में कहा था, “हम फिलिस्तीनी घरेलू जमीन का एक इंच भी नहीं छोड़ेंगे, चाहे हालिया दबाव कुछ भी हो और कब्ज़ा कितना भी लंबा क्यों न हो.” हमास के पास एक सशस्त्र विंग है, जिसका नाम इज़ अल-दीन अल-क़सम  ब्रिगेड है. यह ब्रिगेड इज़राइल में बंदूकधारी और आत्मघाती हमलावर भेजता रहा है.

इसके सहयोगी और समर्थक कौन हैं?

हमास एक क्षेत्रीय गठबंधन का हिस्सा है जिसमें ईरान, सीरिया और लेबनान में हिजबुल्लाह समूह भी शामिल है, जो मिडिल ईस्ट और इज़राइल के प्रति अमेरिकी नीतियों का विरोध करता है. हमास और क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा सशस्त्र समूह इस्लामिक जिहाद  अक्सर इज़राइल के खिलाफ एकजुट होते हैं और ज्वाइंट ऑपरेशन रूम के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य हैं जो गाजा में विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच मिलिट्री एक्टिविटी का कॉर्डिनेशन करते हैं. दोनों समूहों के बीच संबंध तब तनावपूर्ण हो गए हैं जब हमास ने इज़राइल के खिलाफ हमले रोकने के लिए इस्लामिक जिहाद पर दबाव डाला है.

  

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