
ईरान ने मंगलवार को पाकिस्तान में आतंकी संगठन जैश अल-अदल (Jaish Al-Adl) के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की. इस एयरस्ट्राइक के बाद से ही दुनियाभर में ये संगठन सुर्खियों में बना हुआ है. अब पता चला है कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा करने के पीछे इसी संगठन का हाथ था.
जैश अल-अदल ने मार्च 2016 में कुलभूषण जाधव को ईरान के चाबहार से अगवा कर लिया था. जाधव के अपहरण के बाद से यह आतंकी संगठन भारतीय खुफिया एजेंसियों की रडार पर आ गया था. एजेंसियों का कहना है कि जाधव के अपहरण के बाद जैश अल-अदल ने उसे पाकिस्तान के आंतकी संगठन आईएसआई को सौंप दिया था. इसके बाद पाकिस्तान ने जाधव पर भारतीय जासूस होने का आरोप लगाकर उसे कैद कर लिया था. इस मामले से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
लेकिन अब बलूचिस्तान में जैश अल-अदल के ठिकानों पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद यह संगठन एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है. इस हमले को लेकर पाकिस्तान ने दावा किया है कि इस हमले में दो पाकिस्तानी बच्चों की मौत हो गई. पाकिस्तान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' है और उसे गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है.
बता दें कि ईरान का ये हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब मिडिल ईस्ट में संकट गहराया हुआ है. इजरायल और हमास के बीच संघर्ष जारी है. ईरान ने जिस आतंकी संगठन को निशाना बनाया है उसके दहशतगर्द आए दिन ईरान-पाकिस्तान बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाते आए हैं. ईरान की समाचार एजेंसी ने इस हमले की जानकारी देते हुए कहा कि इस हमले में आतंकी ग्रुप जैश-अल-अद्ल को बिशेष रूप से टारगेट किया गया. ईरान का दावा है कि उसने आतंकियों को दो गढ़ को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया.
600 आतंकियों का संगठन है जैश अल अदल
जैश-अल-अद्ल यानी कि "न्याय की सेना" 2012 में स्थापित एक सुन्नी आतंकवादी समूह है जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान में ऑपरेट होता है. पाकिस्तान के सिस्तान-बलूचिस्तान से ऑपरेट करना वाला ये आतंकी संगठन ईरान और पाकिस्तान की सीमा पर काफी एक्टिव है. यही वजह है कि ये संगठन दोनों ही सरकारों के लिए सिरदर्द बना हुआ है.
अमेरिका और ईरान दोनों ही इस संगठन को आतंकी घोषित किया हुआ है. इस सुन्नी संगठन में 500 से 600 आतंकी हैं. ईरान के मंत्री अहमद वाहिदी के अनुसार, पिछले महीने, दक्षिणपूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के एक पुलिस स्टेशन पर रात को हुए हमले में कम से कम 11 ईरानी पुलिस अधिकारी मारे गए थे. ईरान ने इस घटना के लिए जैश-अल-अद्ल को दोषी ठहराया था.
जैश अल अद्ल की करतूतें
अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (डीएनआई) के मुताबिक, जैश अल अद्ल ने 2013 से ईरान की सीमावर्ती पुलिस और सेना पर लगातार कई हमले किए हैं. ये संगठन सरकारी अधिकारियों और नागरिकों की हत्या, अपहरण, हिट एंड रन और रेड जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है.
इस संगठन ने 2013 में पहली बार तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब उसने ईरान के 14 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी. इसके बाद ईऱान सरकार ने कुछ बलोच कैदियों के लिए फांसी की सजा का ऐलान किया था. इस हमले के अगले ही दिन ईरान ने कई कैदियों को फांसी की सजा दे भी दी थी.