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भारत पर क्या रही है बाइडेन की सोच, परमाणु डील में निभाई थी अहम भूमिका

भारत समेत दुनिया की नजरें इस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर टिकी हैं. जो बाइडेन लगातार बढ़त बनाए हुए हैं, ऐसे में भारत के साथ उनके संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

जीत की ओर बढ़ रहे हैं जो बाइडेन जीत की ओर बढ़ रहे हैं जो बाइडेन
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST
  • अमेरिकी चुनाव में जो बाइडेन निकले आगे
  • परमाणु डील में निभाया था अहम किरदार

अमेरिका में डेमोक्रेट्स पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन अगले राष्ट्रपति बनते हुए दिख रहे हैं. इलेक्टोरल वोटों की जंग में जो बाइडेन ने डोनाल्ड ट्रंप को पछाड़ दिया है और बहुमत के करीब हैं. ऐसे में अब हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगर जो बाइडेन सत्ता में आते हैं तो अमेरिका-भारत के रिश्ते किस ओर करवट लेंगे. एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को लेकर हमेशा अस्थिर बनी रहती थी, तो वहीं जो बाइडेन लंबे वक्त से राजनीति में हैं ऐसे में उनके बयानों को ठोस समझा जाता है. 

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अगर भारत के साथ जो बाइडेन के रिश्तों की बात करें तो 2008 में भारत और अमेरिका के बीच जो ऐतिहासिक परमाणु डील हुई थी, उस वक्त जो बाइडेन ने अहम रोल निभाया था. साथ ही सीनेटर में इस डील के पक्ष में वोट भी डाला था. 

दरअसल, अक्टूबर 2008 में जब भारत और अमेरिका न्यूक्लियर डील पर मंथन कर रहे थे तब इसके लिए अमेरिकी सीनेट में वोटिंग हुई थी. उस वक्त जो बाइडेन ने इस डील के पक्ष में वोट डाला था. अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव में इस डील के पक्ष में कुल 298 और विरोध में 117 वोट पड़े थे, जबकि सीनेट में पक्ष में 86 और विरोध में सिर्फ 13 वोट पड़ पाए थे. 

इतना ही नहीं, डेमोक्रेट्स की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार की रेस में चुनाव लड़े बर्नी सेंडर्स ने तब भारत के साथ डील के खिलाफ वोट डाला था. 

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तब किस रोल में थे जो बाइडेन?
सिर्फ पक्ष में वोटिंग ही नहीं बल्कि उस वक्त जो बाइडेन सीनेट की फॉरेन रिलेशन कमेटी के प्रमुख थे, जिसने इस डील में अहम भूमिका निभाई थी. जो बाइडेन ने इस डील के बारे में कहा था, ‘मेरी अगुवाई में भारत-अमेरिका ने ऐतिहासिक डील पर साइन किए थे, जिससे दोनों देशों के दोस्ती मजबूत हुई थी.’

इसके अलावा जो बाइडेन 1998 में भारत द्वारा किए गए परमाणु टेस्ट के समर्थन में भी बयान दे चुके हैं. तब उन्होंने कहा था कि भारत के रुख को लोगों ने गलत समझा, भारत ऐसा देश नहीं है जो परेशानी करेगा. वो लीबिया, नॉर्थ कोरिया या इराक नहीं है.

आपको बता दें कि इसके अलावा जो बाइडेन की ओर से कहा जा चुका है कि दुनिया की मौजूदा परिस्थतियों को देखते हुए भारत और अमेरिका की दोस्ती काफी अहम है. अगर भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे, तो दुनिया सुरक्षित रहेगी.

भारत और अमेरिका के रिश्तों में 2008 के परमाणु समझौते को काफी अहम माना जाता है. जहां दोनों देशों के बीच काफी तनाव भरे बिंदुओं को दूर कर ये समझौता किया गया था. भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने को अमेरिका ने अपना कानून बदला था, जिससे दुनिया में बड़ा संदेश गया था.

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