
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर पर खालिदा जिया अपने बेटे तारिक रहमान से गले लगकर मिलीं. व्हील चेयर पर बैठी 79 साल की खालिदा जिया से तारिक रहमान 2731 दिनों यानी कि लगभग 7 सालों के बाद मिल रहे थे. ये एक भावुक मुलाकात थी. बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की इस यात्रा की चर्चा मीडिया में नहीं थी.
मंगलवार को कतर के अमीर द्वारा उपलब्ध कराये गये विशेष एयर एम्बुलेंस में सवार होकर खालिदा जिया मंगलवार आधी रात 11:47 बजे ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुई थीं. ये 16 जुलाई 2017 के बाद खालिदा की पहली विदेश यात्रा थी. खालिदा जिया की राजनीतिक पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने कहा कि खालिदा इलाज के लिए लंदन गईं हैं. 2017 में भी खालिदा इलाज के मकसद से ही लंदन आई थीं.
गौरतलब है कि तारिक रहमान बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. रहमान 2008 से ही लंदन में रह रहे हैं और वहीं से पार्टी चलाते हैं. इस तरह से खालिदा जिया के लंदन जाने के बाद बांग्लादेश से BNP का शीर्ष नेतृत्व बाहर हो गया है.
अब बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया पार्टी का नेतृत्व संभालने के लिए कब लौटेंगी? सवाल ये भी है कि क्या बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थिति उन्हें लौटने की इजाजत भी देगी.
बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर मानते हैं कि शेख हसीना की सरकार के दौरान कैद में रह रहीं खालिदा जिया गंभीर रूप से बीमार थीं. उन्हें इलाज की जरूरत थी लेकिन बाहर जाने की अनुमति नहीं मिली थी.
बीबीसी बांग्ला से बात करते हुए बीएनपी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य डॉ मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि खालिदा जिया स्वस्थ होने के बाद देश का नेतृत्व करने के लिए लौटेंगी.
यहां बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की चर्चा भी जरूरी है. शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्रों के आंदोलन के बाद भारत में रह रही हैं. बांग्लादेश की युनुस सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है लेकिन भारत ने हाल ही में शेख हसीना के वीजा की वैधता बढ़ाकर बांग्लादेश को संदेश दे दिया है कि भारत फिलहाल ऐसी कोई मंशा नहीं रखता है.
इस बीच मोहम्मद यूनुस ने शेख हसीना का पासपोर्ट भी रद्द कर दिया है.
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के दूसरी पंक्ति के नेता भी सरकारी कार्रवाई के डर से बांग्लादेश में नहीं हैं. यूनुस प्रशासन ने पूर्व पीएम और उनके प्रशासन के सीनियर अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.
इस तरह से बांग्लादेश की राजनीति में कई दशकों तक प्रभुत्व कायम रखने वाली दो नेत्रियां खालिदा जिया और शेख हसीना सक्रिय राजनीति से बाहर हैं. इधर मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश में नए चुनाव की चर्चा भी नहीं कर रहे हैं.
इस नई राजनीतिक परिस्थिति की चर्चा बांग्लादेश के पत्रकार कर रहे हैं. बांग्लादेश के एक पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने एक्स पर लिखा है कि मोहम्मद यूनुस और उनके छात्र समर्थकों ने पहले शेख हसीना को सत्ता से बाहर किया और अब चुनाव नहीं करा कर बीएनपी को भी रास्ते से हटाना चाहते हैं.
गौरतलब है कि जब यूनुस को बांग्लादेश की कमान सौंपी गई थी तो उन्होंने वादा किया था कि वे तीन महीने के अंदर चुनाव कराएंगे. उनकी ये मियाद नवंबर में ही खत्म हो चुकी है. पिछले साल दिसंबर में उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि देश में चुनाव 2025 के अंत में या फिर 2026 की पहली छमाही में करवाया जा सकता है.
इस लिहाज से भी खालिदा जिया की लंदन रवानगी को शक की निगाहों से देखा जा रहा है. गौरतलब है कि यूनुस सरकार ने शेख हसीना सरकार द्वारा खालिदा जिया पर लगाये गए सारे आरोपों को खत्म कर दिया था. इसके बाद वे देश छोड़कर लंदन चली गई हैं.
खास बात यह है कि खालिदा लंदन तब गईं है जब उनकी पार्टी के अलावा देश के दूसरे राजनीतिक दल भी चुनाव की मांग कर रहे हैं. लेकिन बांग्लादेश का चुनाव आयोग अभी मतदाता सूची बनाने की प्रक्रिया में ही लगा हुआ है.
बांग्लादेश का इतिहास कहता है कि यहां से बाहर जाने के बाद नेताओं की वापसी मुश्किल होती है.
इतिहास बताता है कि 2007 में सेना समर्थित बांग्ला सरकार ने अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना को बांग्लादेश लौटने से रोक दिया था. तब उनके सामने शर्त रखी गई थी कि वह आने के बाद सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगी.
इन्ही उदाहरणों को देखकर बीएनपी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य सैयद हुसैन अलाल ने बीबीसी बांग्ला को कहा, "बांग्लादेश के लोग शायद निराश होंगे क्योंकि अतीत के अनुभव बहुत खराब रहे हैं. फिर भी हम सतर्क हैं."
मोहम्मद यूनुस ने फिलहाल देश की सेना को भी अपने साथ कर लिया है. इसलिए उनका विरोध आसान नहीं हैं. कुछ दिन पहले ही में बांग्लादेश के आर्मी चीफ वकार-उज-जमां और खालिदा जिया की मुलाकात हुई थी. इसे लेकर भी कई चर्चाएं हुई और लोगों ने कहा कि कोई डील तो फाइनल नहीं की गई है.
हालांकि बांग्लादेश की राजनीति कई आश्चर्यजनक मोड़ से होकर गुजरी है. 1982 में सेना के जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद ने तख्तापलट कर बांग्लादेश की सत्ता पर कब्जा कर लिया था और वे खुद राष्ट्रपति बन गये. तब इस सैन्य शासक के खिलाफ शेख हसीना और खालिदा जिया एक जुट हुई थीं और आखिरकार संयुक्त विरोध प्रदर्शन, हड़ताल और अंतरराष्ट्रीय दबाव में इरशाद को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.