
अगले महीने डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे. इससे पहले उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन अमेरिका के प्रति कठोर नीतियां बनाने पर काम कर रहे हैं. मसलन, ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच भीषण कूटनीतिक जंग देखने को मिल सकती है. किम उन से ट्रंप ने तीन बार मुलाकात की है, और यह इसलिए ताकि न्यूक्लियर डील को अंजाम तक पहुंचाया जा सके, लेकिन अब तक बात नहीं बन पाई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप पहले यूक्रेन और मिडिल ईस्ट के मुद्दों पर फोकस करेंगे, जिससे किम और ट्रंप के बीच वार्ता में संभावित रूप से देरी हो सकती है. इस बीच किम उन को व्लादिमीर पुतिन का समर्थन मिल गया है, जिससे उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच कूटनीति एक चुनौती बना हुआ है.
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किम उन के अमेरिका पर आरोप
किम जोंग उन ने कहा कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान की सुरक्षा साझेदारी एक "आक्रामकता के लिए परमाणु सैन्य ब्लॉक" के रूप में स्थापित हो रही है. इनके अलावा किम उन ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नीतियों को कड़ाई से काउंटर किया जाएगा. हालांकि, किम उन ने अमेरिका की किन नीतियों के खिलाफ काउंटर करने की बात कर रहे थे, सरकारी मीडिया ने कुछ स्पष्ट नहीं किया है.
जब किम-ट्रंप के बीच शुरू हुई बात
उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने बताया कि किम जोंग उन दरअसल अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने और डिफेंस टेक्नोलॉजी को मजबूत करने की बात कर रहे थे. पहले देखा गया था कि किम जोंग उन और ट्रंप के बीच शुरू हुई बातचीत न सिर्फ अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच चल रही धमकियों और बर्बादी की चेतावनियों पर विराम लगाया, बल्कि दोनों नेताओं में अच्छी बातचीत शुरू हो गई थी.
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उत्तर कोरिया ने बढ़ाई मिसाइल की टेस्टिंग
किम-ट्रंप की बातचीत तब बंद हो गई जब उत्तर कोरिया पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर बात फंसी. इसके बाद देखा गया कि किम उन ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ, परमाणु मिसाइलों के निर्माण के लिए अपने हथियारों की टेस्टिंग भी बढ़ा दी. उध अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने आपसी सैन्य अभ्यास भी बढ़ा दिए, जिसका उत्तर कोरिया ने जवाबी प्रतिक्रिया के रूप में आलोचना की.