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वो राष्ट्रपति जो तख्तापलट करने बढ़ रहे जनरल, टैंक और सैनिकों के आगे डट गया, कौन हैं लुइस आर्से?

पूर्व अर्थशास्त्री आर्से काफी लो प्रोफाइल रहते हैं. वह एक समय पर मोरालेस के अंडर में काम करते थे. उन्होंने 2005 में मोरालेस के सफल चुनावी अभियान के लिए आर्थिक योजनाएं तैयारी की थीं. 2006 में चुनाव जीतने के बाद मोरालेस ने आर्से को देश का इकोनॉमी मिनिस्टर नियुक्त किया.

कौन हैं बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस आर्से? (Photo: AP) कौन हैं बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस आर्से? (Photo: AP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2024,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

दक्षिण अमेरिका का देश बोलीविया बुधवार को पूरी दुनिया में सुर्खियों का हिस्सा बन गया. एक टैंक और कुछ सैनिकों ने राष्ट्रपति भवन का दरवाजा तोड़कर भीतर घुसने की कोशिश की. बोलीविया के राष्ट्रपति ने इसे 'तख्तापलट की कोशिश' बताया. उन्होंने जनता से एकजुट होने की अपील की.

हालांकि यह कोशिश असफल साबित हुई और सैनिकों का नेतृत्व करने वाले जनरल कमांडर को लाइव टीवी पर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. बोलिवियाई टेलीविजन पर चले वीडियो में दिखाया गया कि राष्ट्रपति आर्से ने सेना के जनरल कमांडर जुआन जोस जुनिगा का राष्ट्रपति भवन के गलियारे में सामना किया, जो इस विद्रोह का नेतृत्व कर रहे थे. 

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बोलीविया में तख्तापलट की असफल कोशिश

आर्से ने कहा, 'मैं आपका कप्तान हूं और मैं आपको अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश देता हूं. मैं इस अवज्ञा की अनुमति नहीं दूंगा.' सरकारी भवन में प्रवेश करने से पहले जुनिगा ने प्लाजा में पत्रकारों से कहा, 'निश्चित रूप से जल्द ही मंत्रियों का एक नया मंत्रिमंडल होगा. हमारा देश, हमारा राज्य इस तरह नहीं चल सकता. अभी के लिए वह आर्से को कमांडर इन चीफ के रूप में मान्यता देते हैं.'

तख्तापलट के इस प्रयास को विफल करने वाले बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस आर्से की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. आइए जानते हैं कि तख्तापलट की मंशा से आगे बढ़ रहे सेना के जनरल कमांडर, टैंक और सैनिकों के आगे डट जाने वाले लुइस आर्से आखिर कौन हैं.

लुइस आर्से कौन हैं?

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आंखों पर चश्मा और सौम्य स्वभाव वाले बोलीविया के राष्ट्रपति लुइस आर्से देश के इकोनॉमी मिनिस्टर भी रह चुके हैं. 60 साल के आर्से ने राजनीतिक उथल-पुथल के बाद 2020 में चुनाव जीता था. एक साल पहले 2019 में चुनाव में धांधली के आरोप के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति इवो मोरालेस को इस्तीफा देना पड़ा था.

कभी सहयोगी और सहकर्मी रहे आर्से और मोरालेस अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं. दोनों की नजर अगले साल होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव पर है. दोनों मूवमेंट टू सोशलिज्म (एमएएस) राजनीतिक दल के अपने-अपने गुट का नेतृत्व करते हैं.
 
2006 में बने इकोनॉमी मिनिस्टर

पूर्व अर्थशास्त्री आर्से काफी लो प्रोफाइल रहते हैं. वह एक समय पर मोरालेस के अंडर में काम करते थे. उन्होंने 2005 में मोरालेस के सफल चुनावी अभियान के लिए आर्थिक योजनाएं तैयारी की थीं. 2006 में चुनाव जीतने के बाद मोरालेस ने आर्से को देश का इकोनॉमी मिनिस्टर नियुक्त किया. उन्होंने एक दशक से भी अधिक समय तक बोलीविया की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया.

समर्थक कहते हैं कि आर्से ने 2000 के दशक में बोलीविया में विकास का 'चमत्कार' किया, जिसने दक्षिण अमेरिका के सबसे गरीब देशों में से एक को गरीबी से बाहर निकाला. उन्होंने तेल और गैस सहित कई सेक्टर्स के राष्ट्रीयकरण पर जोर देकर निवेशकों को नाराज कर दिया.

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अमेरिकी डॉलर की कमी सबसे बड़ी चुनौती

2020 में आर्से ने जब चुनाव जीता तो देश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता की आंधी काफी हद तक शांत हुई. उनकी जीत के बाद मोरालेस लगभग एक साल के निर्वासन से लौटे. राष्ट्रपति के रूप में आर्से के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी डॉलर की कमी रही है जिसने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. क्रेडिट-रेटिंग एजेंसियों ने बोलीविया के कर्ज को 'जंक' स्टेट्स में डाउनग्रेड कर दिया है.

बुधवार को तख्तापलट का प्रयास करने वाले जुनिगा ने कहा कि सरकार देश को 'गरीब' बना रही है. आर्से की सरकार ने बोलीविया में लिथियम के विशाल भंडार को विकसित करने के लिए रूसी और चीनी कंपनियों के साथ कई समझौतों पर साइन किए हैं. लेकिन संसद में सांसदों ने अभी तक किसी भी कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी नहीं दी है.

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