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नेपाल में भारी बारिश के बाद भूस्खलन से 11 लोगों की गई जान, 22 लापता

अधिकारी ने बताया कि जब यह हादसा हुआ तो लोग अपने घरों में निश्चिंत होकर सो रहे थे. इसके साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हो रही थी.

भूस्खलन से नौ लोगों की गई जान (फाइल फोटो) भूस्खलन से नौ लोगों की गई जान (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • काठमांडू,
  • 13 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST
  • भूस्खलन की घटना में नौ लोगों की मौत
  • अब तक 22 स्थानीय लोग लापता
  • गांवों में जारी है राहत और बचाव कार्य

सेंट्रल नेपाल के तीन गांवों में देर रात हुई भूस्खलन की घटना में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 लोग लापता हैं. इन सभी इलाकों में पूरी रात भारी बारिश हो रही थी. इस वजह से यह घटना घटी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी. यह घटना रात के 2:30 के करीब की है. जब ऊपरी बेल्ट से गिरता हुआ मिट्टी का एक विशाल टीला, सिंधुपालचौक जिले के नागपुजे, भीरखरका और नेवर टोला गांव को हिला कर रख दिया. यह जिला राजधानी काठमांडू से 120 किलोमीटर दूर पड़ता है.  

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अधिकारी ने बताया कि जब यह हादसा हुआ तो लोग अपने घरों में निश्चिंत होकर सो रहे थे. इसके साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हो रही थी. जिला पुलिस ऑफिस प्रमुख राजन अधिकारी ने बताया कि 9 डेड बॉडी घटना स्थल से मिले हैं, जबकि दो अन्य लाशें  भोटोकोशी और सुनकोशी नदी से प्राप्त हुए हैं.   

उन्होंने आगे बताया कि सभी पीड़ितों की पहचान कर ली गई है. तीनों गांव से तीन-तीन लोगों की जानें गईं हैं. हालांकि 22 स्थानीय नागरिक अब भी लापता हैं. हालांकि इस भूस्खलन की वजह से वास्तविक रूप में कितना नुकसान हुआ है. इस बारे में ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता है. इसका आंकलन करना होगा. 

शुरुआती जानकारी के मुताबिक तीन गांवों के 11 घर बह गए हैं. नेपाल आर्मी, आर्म्ड पुलिस और पुलिस की एक ज्वाइंट टीम बचाव कार्यों में लगी हुई है. पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान भूस्खलन बेहद आम है. यह सितंबर महीने तक चलता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल मानसून कारणों से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 351 हो गई है. जबकि अब तक 85 लोग लापता हैं.  

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