
गुजरात के मोरबी में सस्पेंशन ब्रिज हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. शासन-प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा 135 लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा. ये पहली बार नहीं है, जब किसी ब्रिज के गिरने पर इतनी बड़ी तादाद में लोग मारे गए. भारत ही नहीं अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और चीन से लेकर रूस तक इस तरह के तमाम हादसों से दुनिया का इतिहास भरा पड़ा है.
हम आपको दुनिया में हुए ऐसे 10 हादसों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें मरने वालों की संख्या को अगर जोड़ दें तो तादाद कई हजारों में पहुंच जाएगी. इनमें सबसे भयावह पुर्तगाल में हुआ पांटून ब्रिज का हादसा है, जिसमें 4 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. ये लोग अपनी जान बचाने के लिए ब्रिज के रास्ते से भाग रहे थे, लेकिन ब्रिज टूटने से ही उनकी जान चली गई.
अमेरिका: होटल का वॉकवे गिरने पर मारे गए 117 लोग
अमेरिका के मिसौरी (Missouri) राज्य का कैंसास (Kansas) शहर. 1980 की शुरुआत में यहां हयात रीजेंसी होटल की शुरुआत हुई. होटल की इमारत को इतनी खूबसूरती से डिजाइन किया गया कि लोग देखते रह गए. तीसरी और चौथी मंजिल पर होटल की लॉबी में दो वॉकवे बनाए गए, जो लोगों को सीधे होटल की दूसरी इमारत में ले जाते थे. कैंसास में होने वाले सभी बड़े आयोजन हयात होटल में ही होते थे. 17 जुलाई 1981 को भी ऐसा ही एक आयोजन था. पार्टी में करीब 2 हजार लोग मौजूद थे. कुछ हॉल में चल रहे नाच-गाने में व्यस्त थे तो कुछ लॉबी में खड़े होकर पार्टी का लुत्फ उठा रहे थे. अचानक चौथी मंजिल का वॉकवे ढह गया. इसका मलबा तीसरी मंजिल के वॉकवे पर गिरा और तीसरी मंजिल का वॉकवे भी भरभराकर ढह गया. 114 लोग मारे गए. बाद में जांच हुई. पता चला कि होटल संचालकों के कहने पर इंजीनियर ने डिजाइन में कुछ बदलाव किए थे, यही हादसे का कारण बना.
रूस: जब जहाज पर गिरने लगीं मालगाड़ी में रखी कारें
5 जून 1983 को सोवियत (USSR) मेड अलेक्जेंडर सुवोरोव (Aleksandr Suvorov) जहाज 330 यात्रियों और चालक दल के 30 सदस्यों को लेकर रोस्तोव से मास्को के लिए निकला. इस लग्जरी शिप के सबसे ऊपरी डेक पर एक सिनेमा हॉल था, जिसमें ठीक रात 10 बजे कार्यक्रमों का प्रसारण होता था. हादसे वाली रात भी प्रोग्राम देखने के लिए जहाज की छत पर सैकड़ों लोग जमा हुए. जहाज 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चल रहा था और शिप के कैप्टिन केबिन में आराम कर रहे थे. रात के अंधेरे में शिप को रेलवे ब्रिज के नीचे से गुजरना था, जूनियर कैप्टन जहाज और ब्रिज का सही कैलकुलेशन नहीं कर पाए और जहाज सीधे रेलवे ब्रिज से टकरा गया. ठीक इसी समय ब्रिज से एक मालगाड़ी गुजर रही थी, जिसमें कारें रखी हुई थीं. टक्कर लगते ही ट्रेन पटरी से उतर गई और ढेर सारी कारें जहाज पर आ गिरीं. 177 लोग मारे गए.
चीन: प्रकृति को बचाने की कीमत 41 लोगों की मौत
किसी भी नियम कायदे को माने बिना ताबड़तोड़ कंस्ट्रक्शन करने वाला चीन भी अतीत में ब्रिज हादसे का शिकार बना है. तारीख थी 15 अगस्त 2007. सेंट्रल चीन के हुनान प्रांत (Hunan province) की फेनघुआंग काउंटी (Fenghuang county) के फेनघुआंग हाईवे ब्रिज (Fenghuang highway bridge) पर रोज की तरह गाड़ियां आ-जा रही थीं. तुओ नदी (Tuo river) पर बना यह ब्रिज अचानक ढह गया. 41 लोग मारे गए. कम्युनिस्ट चीन से मामले की कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट तो सामने नहीं आई, लेकिन बाद में पता चला कि पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से ब्रिज स्टील और लोहे की जगह सिर्फ चट्टान और कंक्रीट की मदद से बना दिया गया था.
जापान: खर्च बचाने नहीं कराया मेंटेनेंस, गई 1400 लोगों की जान
भूकंप और सुनामी के कारण अक्सर तबाही झेलने वाला जापान भी ब्रिज हादसों से अछूता नहीं रहा. टोक्यो के बीचोंबीच से सुमिदा नाम की एक बड़ी नदी बहती है. इस नदी पर 1698 में लकड़ी का एक मजबूत पुल बनाया गया. ब्रिज की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोग इसे मामूली मरम्मत के साथ 100 साल तक इस्तेमाल करते रहे. साल 1807 में लंबे समय तक मेंटेनेंस ना होने के कारण पुल जर्जर हो गया. जीर्ण-शीर्ण हो चुके ब्रिज की मरम्मत सभी चाहते थे, लेकिन सवाल ये था कि पैसे कौन खर्च करेगा? दिन बीतने के साथ लोग मरम्मत की बात भूल ही गए. फिर आया 20 अक्टूबर. इस दिन जापान में एक बड़ा त्योहार था. लोग सजधज कर घरों से निकले. अचानक ब्रिज पर भीड़ कई गुना बढ़ गई और वह ढह गया. 1400 लोग नदी में डूबकर मर गए.
ब्रिटेन: 79 लोगों की मौत पर नदी किनारे बनाया स्मारक
दुनिया का इतिहास हादसों से भरा पड़ा है. ज्यादातर देश कुछ हफ्ते, महीने या साल में हादसों को भुला देते हैं. लेकिन ब्रिटेन (UK) में इतिहास को इतनी आसानी से नहीं भुलाया जाता. ऐसा ही एक हादसा इंग्लैंड की रिसॉर्ट सिटी कहे जाने वाले ग्रेट यारमाउथ (Great Yarmouth) शहर में हुआ. यहां डेक चेयर (बीच के किनारे बैठी जाने वाली कुर्सी) का बिजनेस करने वालीं 8 बच्चों की दादी जूली स्टाफ बताती हैं, '2 मई 1845 का दिन था. नदी में एक बड़ी नाव पर जोकर अपना खेल दिखाने वाले थे. हजारों लोग जोकरों की मसखरी देखने इकट्ठा हुए. अच्छा व्यू लेने के लिए सैकड़ों लोग पुल पर चढ़ गए. जैसे ही जोकर सामने आए सभी उन्हें देखने ब्रिज के एक कौने पर चले गए. इतने लोगों का वजन पुल सह नहीं सका और ढह गया. 400 लोग नदी में गिर गए. 79 की मौत हो गई, जिसमें 59 बच्चे थे. इग्लैंड के लोगों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए नदी के किनारे एक म्यूजियम बनाया, जिसे आज भी सैकड़ों लोग देखने आते हैं.
जर्मनी: बर्फीले पानी में जमकर 55 लोग की मौत
ब्रिज ढहने के ज्यादातर हादसे पुल पर भीड़ बढ़ने के कारण ही हुए हैं. जर्मनी में भी ऐसा एक दर्दनाक हादसा हो चुका है, जब निर्माण के 3 महीने बाद ही एक ब्रिज ढह गया और 50 से ज्यादा लोगों की मौत बर्फीले पानी में जमने के कारण हो गई. घटना 6 दिसंबर 1825 को हुई. आमतौर पर जर्मनी के ज्यादातर इलाकों में दिसंबर की शुरुआत में ही न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री तक पहुंच जाता है. इस महीने में जर्मनी के निएनबर्ग (Nienburg) में साले (Saale) नदी पर एक ब्रिज बनरकर तैयार हुआ. खुशी के इस पल को यादगार बनाने के लिए रात के समय उत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में अनुमान से ज्यादा भीड़ आ गई. लोग ब्रिज पर पहुंचकर सेलिब्रेट कर रहे थे कि अचानक पुल टूट गया. कंपकंपाती ठंड का मौसम होने के कारण 55 लोग नदी के बर्फीले पानी में जमकर मर गए.
फ्रांस: चेतावनी नजरअंदाज करना सैनिकों को पड़ा भारी
एक समय था, जब फ्रांस में सस्पेंशन ब्रिज का क्रेज हुआ करता था. 18वीं शताब्दी में एक के बाद एक पूरे देश में धड़ल्ले से सस्पेंशन ब्रिज बनाए गए. ऐसा ही एक ब्रिज पश्चिमी फ्रांस की मायेन (Mayenne) नदी पर 1836 से 1839 के बीच बना. इसे एंगर्स ब्रिज (Angers Bridge) नाम दिया गया. करीब 14 साल तक धड़ल्ले से इस ब्रिज का इस्तेमाल किया गया. 16 अप्रैल 1850 की सुबह इस पुल पर भीड़ रोज के मुकाबले कुछ ज्यादा ही थी. ब्रिज के पास फ्रांसीसी सेना का एक बेस कैंप था, इसलिए सैनिक भी इसे इस्तेमाल कर रहे थे. सैनिकों को चेतावनी दी गई कि ज्यादा भारी सामान एक साथ ब्रिज से ना लेकर जाएं. लेकिन सिपाहियों ने नजरअंदाज कर दिया. तेज हवाएं चल रही थीं और अचानक पुल टूट गया. इस हादसे में 200 से ज्यादा लोग मारे गए.
कनाडा: हादसे के 3 सप्ताह पहले हुई थी पुल की जांच
कनाडा का ओंटारियो शहर भी एक दर्दनाक हादसे का सामना कर चुका है. यहां रेलवे ब्रिज ढहने से 59 लोगों की मौत हो हुई थी. इस हादसे ने कनाडा के साथ अमेरिका के लोगों को भी हिलाकर रख दिया था. उस समय कनाडा रेलवे में काम करने वाले रिचर्ड बॉन्ड बताते हैं कि उन्होंने तकरीबन 20 साल तक रेलवे की नौकरी की, लेकिन इतना भीषण हादसा अपने कार्यकाल में पहले कभी नहीं देखा. रिचर्ड बताते हैं कि सब कुछ ठीक चल रहा था. हादसे से तीन सप्ताह पहले पुल की जांच की गई. जांच में पुल सुरक्षित पाया गया. हादसा 12 मार्च 1857 को हुआ, उस समय सर्दी का मौसम था. नहर में बने पुल में उस समय पानी नहीं था. टोरंटो से निकली एक ट्रेन जब पुल से गुजरी तो पुल अचानक टूट गया और 59 लोगों की मौत हो गई.
नीदरलैंड: गम में बदली खुशियां, 400 मौतों से मची चीख-पुकार
यह हादसा है 13वीं शताब्दी का. तब नीदरलैंड का दक्षिणी हिस्सा रोमन साम्राज्य के अधीन था. उस जमाने के रोम और अब के नीदरलैंड में मास्ट्रिच नाम का एक शहर है. मास्ट्रिच में बहने वाली मीजूय नदी पर पत्थरों की मदद से एक ब्रिज बनाया गया. प्राचीन काल से ही ईसाइयत का केंद्र रहे रोम के इस ब्रिज का नाम शहर के पहले बिशप सेंट सर्वाटियस के नाम पर रखा गया. सन् 1275 में इस शहर में एक जुलूस का आयोजन हुआ. रैली में सैकड़ों लोग शामिल हुए. सभी ब्रिज पार कर ही रहे थे कि अचानक पुल भरभराकर ढह गया. हादसे में 400 लोग मारे गए.
पुर्तगाल: एक गलत फैसले ने ले ली 4 हजार लोगों की जान
शानदार तकनीक और बेहतर मटेरियल की बदौलत आज इंजीनियर एक से बढ़कर एक पुल बनाने की क्षमता रखता है. लेकिन पहले ज्यादातर लकड़ी के पुल या पांटून (फ्लोटिंग) ब्रिज का ही चलन था. कम समय में तैयार हो जाने वाले पांटून ब्रिज सेना की भी पहली पसंद थे. ये पुल कई नाव या तैरते हुए स्ट्रक्चर पर तैयार किए जाते थे. पुर्तगाल के दूसरे सबसे बड़े शहर पोर्टो के नजदीक ब्रागा शहर है. यहां डोरो (Douro) नदी पर भी ऐसा ही एक पांटून ब्रिज 15 अगस्त 1806 को शुरू हुआ. इसका नाम पोंटे दास बरकास (Ponte das Barcas) रखा गया. पुर्तगाली में इसका मतलब होता है'नावों का पुल'. यह 20 नावों के ऊपर बना था, जिसे स्टील के तार की मदद से जोड़ा गया.
1807 में फ्रांस और स्पेन की सेना ने मिलकर पुर्तगाल पर कब्जे की नीयत से हमला कर दिया. लंबी लड़ाई के बाद 1809 में दोंनों सेनाएं ब्रागा पहुंची. सेना के अत्याचार से बचने के लिए हजारों लोग 29 मार्च को पांटून ब्रिज पर चढ़कर भागने की कोशिश करने लगे. भीड़ इतनी बढ़ गई की पुल टूट गया और 4 हजार लोग मारे गए.