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'सादे कपड़ों में भी भारतीय सैनिकों को मालदीव में नहीं रहने देंगे', चीन से डील के बाद मुइज्जू ने फिर दिखाए तेवर

चीन के साथ हुए सैन्य समझौतों के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohammad Muizzu) ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि 10 मई के बाद किसी भी भारतीय सैनिक को मालदीव में रहने की इजाजत नही दी जाएगी, फिर चाहे वो सादे कपड़ों में ही क्यों ना हो.

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने समुद्री क्षेत्र को लेकर कई बातें कही हैं (Photo- AP) मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अपने समुद्री क्षेत्र को लेकर कई बातें कही हैं (Photo- AP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 2:43 PM IST

चीन के साथ हुए सैन्य समझौतों के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohammad Muizzu) ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि 10 मई के बाद किसी भी भारतीय सैनिक को मालदीव में रहने की इजाजत नही दी जाएगी, फिर चाहे वो सादे कपड़ों में ही क्यों ना हो.

मुइज्जू ने कहा कि उनकी सरकार मालदीव से भारतीय सैनिकों को बाहर करने में सफल रही है, जो लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे स्थिति को और गड़बड़ करने की कोशिश कर रहे हैं. ये लोग अफवाह फैला रहे हैं कि भारतीय सेना मालदीव से नहीं जा रही और भारतीय सैनिक सादे कपड़े पहनकर वापस लौट रहे हैं. हमें इस तरह की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए, जो संदेह पैदा करे.

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मुइज्जू ने कहा कि दस मई के बाद किसी भी भारतीय सैनिक को मालदीव नहीं आने दिया जाएगा. ना ही सैन्य वर्दी में और ना ही सादे कपड़ों में. भारतीय सेना मालदीव में नहीं रहेगी, फिर चाहे उन्होंने कोई भी वर्दी पहनी हो. मैं ये आत्मविश्वास के साथ कह रहा हूं.

मालदीव और चीन के बीच हुए सैन्य समझौते

मालदीव और चीन की करीबियां बढ़ रही हैं. दोनों देशों के बीच दो सैन्य समझौते हुए हैं. इन समझौतों को इन मुल्कों के द्विपक्षीय संबंधों का न्याय अध्याय बताया जा रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने बिना किसी शर्त के मालदीव को सैन्य सहायता देने का वादा किया है. हालांकि, यह सैन्य मदद किस तरह की होगी, अभी इस बारे में अधिक जानकारी सामने नहीं आ पाई है. लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध प्रगाढ़ हुए हैं. 

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यह भी पढ़ें: भारत से दुश्मनी और चीन से सैन्य मदद, मुइज्जू सरकार के नए कदम से ड्रैगन के जाल में फंस जाएगा मालदीव

इसके अलावा चीन के शोध जहाज शियांग यांग हॉन्ग-3 को लेकर भी एक समझौता हुआ है. यह जहाज हाल ही में मालदीव पहुंचा था. इसे चीन का जासूसी जहाज भी कहा गया. दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते से भारतीय सागर क्षेत्र में समुद्री अनुसंधान प्रभावित हो सकता है. 

भारत और मालदीव के बीच कैसे शुरू हुआ तनाव?

हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद मालदीव की सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी के इस दौरे की कुछ तस्वीरों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद गहराया. मामले पर विवाद बढ़ने के बाद इन तीनों मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया गया था. 

दोनों देशों के इस तनाव के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू चीन के पांच दिन के राजकीय दौरे पर चले गए थे. इस दौरे से लौटने पर मुइज्जू लगातार भारत पर निशाना साध रहे हैं. 

यह भी पढ़ें: मुइज्जू के 'बिग बुलीज' वाले बयान पर क्या बोले एस जयशंकर?

मुइज्जू ने मालदीव लौटते ही दो टूक कह दिया था कि हमें बुली करने का लाइसेंस किसी के पास नहीं है. उन्होंने कहा था कि हम भले ही छोटा देश हो सकते हैं लेकिन इससे किसी को भी हमें बुली करने का लाइसेंस नहीं मिलता. हालांकि, मुइज्जू ने प्रत्यक्ष तौर पर किसी का नाम लेकर ये बयान नहीं दिया है. लेकिन माना जा रहा है कि उनका निशाना भारत की तरफ है.

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इसके बाद मुइज्जू ने भारत से 15 मार्च से पहले मालदीव से अपने सैनिकों को हटाने को कहा था. बता दें कि चीन समर्थक माने जाने वाले मुइज्जू ने पांच दिन के अपने चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. उनका ये दौरा ऐसे समय पर हुआ था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मालदीव सरकार के तीन मंत्रियों को सस्पेंड किया गया. इस मामले को लेकर भारत और मालदीव दोनों देशों में राजनयिक विवाद बढ़ा हुआ है.

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