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सबसे सख्त मानी जाती है इन नेताओं की सुरक्षा, शिकारी पक्षी और 'बॉडी डबल' भी करते हैं 24 घंटे काम

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin जहां रहते हैं, वहां सिक्योरिटी गार्ड्स तो हैं ही, साथ ही शिकारी परिंदों की फौज भी ड्यूटी करती है. अस्सी के दशक से बाज और उल्लू जैसे पक्षी क्रेमलिन में फेडरल गार्ड सर्विस का हिस्सा हैं. इन्हें आसपास नजर रखने के अलावा विदेशी ड्रोन्स को पहचानने की ट्रेनिंग भी मिलती है. इनका काम दूसरे पक्षियों को राष्ट्रपति निवास से दूर रखना भी है.

हर देश के सर्वोच्च लीडर की सुरक्षा सबसे मजबूत कमांडो करते हैं. सांकेतिक फोटो (Pixabay) हर देश के सर्वोच्च लीडर की सुरक्षा सबसे मजबूत कमांडो करते हैं. सांकेतिक फोटो (Pixabay)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 16 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

हर देश अपने नेताओं की सेफ्टी पर जमकर तामझाम करता है. घेराबंदी ऐसी कि इंसान तो इंसान, परिंदा भी तोड़ न सके. कई देश इस मामले में सबसे आगे हैं. वहां के सुप्रीम लीडर सुरक्षा की कई लेयर्स के बीच रहते हैं, जिसपर भारी-भरकम रकम के साथ पूरी रणनीति रहती है कि कोई सेंध न लगा सके. 

ऐसी है रूसी राष्ट्रपति की सिक्योरिटी
व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा में लगे जवानों की एक पूरी बॉडी है, जिसे फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस कहते हैं. इसमें हजारों की संख्या में कमांडो होते हैं, लेकिन पुतिन की सुरक्षा के लिए इसमें से भी क्रीम लेयर को छांटकर अलग रखा गया. ये लगभग हर तरह का हथियार चलाने में माहिर होते हैं, साथ ही ऑपरेशनल साइकोलॉजी आती है, यानी जो खतरा किसी को भी न दिख रहा हो, उसे ताड़ जाना और खत्म कर देना. 

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ऐसे होते हैं गार्ड्स
इन गार्ड्स को कोई दो विदेशी भाषाएं भी आनी चाहिए, साथ ही पॉलिटिक्स की समझ भी जरूरी है. इसे एक उदाहरण से समझते हैं- बीते साल आयरलैंड के मार्शल आर्टिस्ट कोनोर मैकग्रेगर ने पुतिन से मुलाकात के दौरान उनके कंधे पर हाथ रख दिया. स्पोर्ट्स की दुनिया में ये दोस्ताना तरीका है, लेकिन पुतिन जैसे बेहद ताकतवर शख्स को शायद ये उतना पसंद न आया हो. पुतिन ने विरोध नहीं किया, लेकिन उनके गार्ड्स ने तुरंत हाथ हटवा दिया.

माइनस तापमान में भी हल्के कपड़े पहनकर कंफर्टेबल
रूस की सरकार इस बारे में काफी गोपनीयता रखती है इसलिए ज्यादातर चीजों का अनुमान ही लगाया जाता है, लेकिन माना जाता है कि ये गार्ड्स इतने ताकतवर होते हैं कि माइनस डिग्री में भी हल्का कोट पहनकर आराम से काम करते हैं. सर्दियों में जमे हुए रूस में अक्सर ये नजारा दिख जाता है. एक दिलचस्प बात ये है कि पुतिन की सुरक्षा में रहते हुए भी इन्हें स्मोक करने की छूट रहती है, जो कि आम नेताओं के कमांडोज को नहीं. 

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पुतिन की सुरक्षा को दुनिया में सबसे मजबूत माना जाता है. (AP)

पुतिन के निवास यानी क्रेमलिन की सेफ्टी भी कहीं कम नहीं. यहां सीसीटीवी और सैनिकों के अलावा बाज और उल्लू जैसे पक्षी सुरक्षा करते हैं. अस्सी की शुरुआत ये ही ये ट्रेन्ड पक्षी फेडरल गार्ड सर्विस का हिस्सा हैं इसमें चुन-चुनकर ऐसे शिकारी पक्षी रखे जा रहे हैं, जिनकी अलग-अलग खासियत हो. जैसे कोई रात में शिकार करता हो तो कोई दिन का शिकारी हो. 

उत्तर कोरिया में गाड़ी के साथ दौड़ते जवान
नॉर्थ कोरिया के सैन्य शासक किम जोंग उन की कार के पीछे दौड़ते सिक्योरिटी गार्ड्स की तस्वीर कई बार आ चुकी. लंबे-चौड़े और सूट में रहते ये गार्ड्स मामूली नहीं, बल्कि बेहद ताकतवर होते हैं. कोरियन पीपल्स आर्मी के ये लोग उन परिवारों से होते हैं, जिनकी पुरानी पीढ़ियां भी जोंग परिवार के लिए अपनी वफादारी साबित कर चुकी हों. इन्हें हर तरह के हथियार चलाने की ट्रेनिंग मिलती है. 

अनुमानतः 10 हजार गार्ड्स करते हैं सुरक्षा
किम के चारों ओर सुरक्षा की तीन लेयर्स की बात हमेशा होती है, जिसे तोड़कर भीतर जाना लगभग नामुमकिन है, यही वजह है कि छोटा देश होने के बाद भी उत्तर कोरिया अमेरिका जैसी महाशक्ति को भी धमकाकर सेफ रह रहा है. वैसे किम की सुरक्षा में तैनात गार्ड्स को सुप्रीम गार्ड कमांडो कहते हैं, जिनकी असल संख्या लगभग 10 हजार है. 

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नॉर्थ कोरिया के सैन्य शासक किम जोंग उन सुरक्षा के मामले में भी काफी रहस्यमयी है. (AP)

DNA सैंपल के बारे में भी सतर्क
वैसे इस नेता की सुरक्षा के बारे में समझना हो तो ये भी जानते चलें कि कहीं जाने पर स्मोक करने के बाद ये अपना सिगरेट बट भी वहां नहीं छोड़ते. सिगरेट के शौकीन किम के सिगरेट पीने के बाद सिगरेट बट कहीं भी नहीं फेंकी जाती, बल्कि नष्ट कर दी जाती है ताकि किम के DNA सैंपल किसी गलत हाथ में न चले जाए. कई मौकों पर किम की बहन किम यो जोंग उनकी सिगेरट बट संभालती दिखीं.

जिनपिंग भी नहीं हैं कम
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम दुनिया के सबसे ज्यादा सुरक्षा पाने वाले नेताओं में लिया जाता रहा. डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शी हांगकांग या किसी दूसरे देश का दौरा करते हैं, तब भी उनके पास उस देश की सुरक्षा के अलावा पर्सनल गार्ड्स होते हैं. सेंट्रल गार्ड्स ब्यूरो नाम से काम करने वाले ये कमांडो ब्लेंकेट की तरह अपने नेता को घेरे रखते हैं. इनमें कुछ पैदल, कुछ मोटरबाइक तो कुछ कार में होते हैं. एरियल प्रोटेक्टशन के लिए हेलीकॉप्टर और ड्रोन होते हैं. लेकिन जैसा कि ज्यादातर वर्ल्ड लीडर्स के साथ प्रोटेक्शन लेयर की निश्चित जानकारी यहां भी साफ नहीं. 

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सऊदी प्रिंस के पास है टाइगर स्क्वाड
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन सलमान की गिनती फिलहाल अरब के सबसे ताकतवर नेताओं में होती है. उनकी ताकत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार और बिन सलमान के सबसे बड़े आलोचक माने जाते जमाल खशोगी की हत्या का आरोप अमेरिकी इंटेलिजेंस ने प्रिंस पर लगाया, लेकिन इसके बाद भी कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सका. 

खाड़ी मामलों पर नजर रखने वाली न्यूज वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक क्राउन प्रिंस के चारों पर सुरक्षा का घेरा इतना तगड़ा है कि कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. ये कई लेयर्स में बंटा हुआ है और समय-समय पर बदलता रहता है. इसमें टाइगर स्क्वाड से भी कई गार्ड्स प्रिंस की सुरक्षा में हैं. ये वही स्क्वाड है, जो हवा-पानी और जमीन तीनों ही जगहों पर खुफिया हमले करके सब तबाह करने के लिए जाना जाता है. 

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (AFP)

राजनैतिक ही नहीं, धर्मगुरुओं की सुरक्षा अच्छी-खासी 
वेटिकन सिटी में कैथोलिक समुदाय के 266वें पोप फ्रांसिस के पास सिक्योरिटी गार्ड्स की पूरी फौज है. स्विस आर्म्ड फोर्स से ट्रेनिंग ले चुके जवान चौबीसों घंटे पोप के आसपास रहते हैं. मजबूती और फुर्ती वाले इन गार्ड्स की उम्र 19 से 30 साल के बीच होती है, साथ ही वजन और कद का भी क्राइटेरिया है. मॉर्डन हथियारों के साथ इन्हें तलवार, लाठी और लड़ाई के बाकी पारंपरिक तरीके भी आते हैं. एक समय पर 125 जवानों की इस टुकड़ी को दुनिया की सबसे छोटी आर्मी भी कहते हैं. 

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बॉडी डबल की भी होती रही बात
कंस्पिरेसी थ्योरी ये भी कहती है कि कई देशों के नेता अपने बॉडी डबल का इस्तेमाल करते हैं. ये हमशक्ल तो नहीं होते लेकिन कद-काठी में लगभग एक जैसे होते हैं. इन्हें पॉलिटिकल डेकॉय भी कहते हैं. नेताओं के बॉडी डबल के लिए बाकायदा इंटरव्यू, और सलेक्शन के बाद ट्रेनिंग भी होती है ताकि किसी को शक न हो. हालांकि बॉडी डबल थोड़ी देर के लिए ही काम करते हैं और उन जगहों, जहां मुश्किल सवाल होने हों, या राजनैतिक पेंच आ सकता हो, वहां इन्हें नहीं भेजा जाता. 

किनका रह चुका बॉडी डबल
ये सिर्फ अनुमान है, लेकिन कई रिपोर्ट्स कई लीडर्स के बॉडी डबल की बात करती हैं. इराक के भूतपूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के बारे में अमेरिकी इंटेलिजेंस का कहना था कि उनके एक नहीं, कई बॉडी डबल थे. वे इतने असली लगा करते कि साल 2003 में सद्दाम हुसैन के पकड़ाने के बाद तत्कालीन डिफेंस सेक्रेटरी डोनाल्ड एच हम्सफेल्ड को चेक करवाना पड़ा कि असल शख्स ही पकड़ाई में आया है.

वॉशिंगटन पोस्ट समेत कई मीडिया हाउसेज ने कहा था कि सद्दाम हुसैन के शरीर पर अगर किसी जख्म का निशान रह जाए तो बॉडी डबल को भी अपने शरीर पर वही निशान बनवाना पड़ता था.

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अमेरिकी नेता हिलेरी क्लिंटन के बारे में भी कई बार ट्विटर पर बात हो चुकी कि वे पब्लिक में खुद नहीं आतीं, बल्कि हमशक्ल को भेजती हैं. तीन साल पहले 9/11 की बरसी पर श्रद्धांजलि देने के लिए वे पहुंची, जबकि कुछ घंटों पहले ही उनके निमोनिया के चलते बहुत बीमार होने की खबर आई थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर #हिलेरीबॉडीडबल ट्रेंड करने लगा. 

 

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