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पाकिस्तान के बाद PoK में भी मिला MPox का केस, सऊदी अरब से लौटा था शख्स

एमपॉक्स वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के साथ संपर्क में आने से फैलता है. एमपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामक त्वचा या मुंह या जननांगों जैसे अन्य घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है.

मंकी पॉक्स (फोटो: डब्ल्यूएचओ) मंकी पॉक्स (फोटो: डब्ल्यूएचओ)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 10:48 AM IST

Mpox outbreak: दुनिया के कई देशों में एमपॉक्स (Mpox) वायरस बढ़ रहा है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भी इस वायरस का पहला केस सामने आया है. इसके बाद संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. 

पीओके के रहने वाले 47 साल के शख्स में यह वायरस पाया गया है. यह शख्स हाल ही में सऊदी अरब के जेद्दा से पाकिस्तान लौटा था. एमपॉक्स के लक्षण के साथ इस शख्स को इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में भर्ती किया गया था. 

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अस्पताल के डॉक्टर नसीम अख्तर ने बताया कि मरीज में मंकी पॉक्स के लक्षण थे. इस तरह के मरीजों को स्पेशल वॉर्ड में रखा जाता है. बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान में मंकी पॉक्स के तीन मामले सामने आए थे. ये सभी खैबर पख्तूनख्वाह से सामने आए थे.

डब्ल्यूएचओ ने एमपॉक्स को लेकर ग्लोबल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की है. स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे 'ग्रेड 3 इमरजेंसी' के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसका मतलब है कि इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. बता दें कि एमपॉक्स वायरस के केस अभी तक अफ्रीका में ही मिले थे लेकिन अब इसके मामले अफ्रीका से बाहर भी मिलने लगे हैं.

एमपॉक्स क्या है? 

एमपॉक्स एक वायरल बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के कारण होती है, जो ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस की एक प्रजाति है. एमपॉक्स को पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था. इस वायरस की पहचान वैज्ञानिकों ने पहली बार 1958 में की थी जब बंदरों में 'पॉक्स जैसी' बीमारी का प्रकोप हुआ था.

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एमपॉक्स कैसे फैलता है?

एमपॉक्स वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के साथ संपर्क में आने से फैलता है. एमपॉक्स एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रामक त्वचा या मुंह या जननांगों जैसे अन्य घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है. मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में अधिकांश मामले उन लोगों में देखे गए हैं जो संक्रमित जानवरों के साथ संपर्क में रहते थे.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संक्रमण कपड़ों या लिनेन जैसी दूषित वस्तुओं के उपयोग, टैटू की शॉप, पार्लर या अन्य पब्लिक जगहों पर यूज होने वाली कॉमन चीजों से भी फैल सकता है. संक्रमित पशुओं से मनुष्यों को काटने, खरोंचने, खाने या जानवरों के साथ अन्य एक्टिविटी से भी यह वायरस जानवरों से मनुष्यों में फैल सकता है.

एमपॉक्स के लक्षण क्या हैं?

एमपॉक्स से संक्रमित लोगों को अक्सर शरीर पर दाने हो जाते हैं जो हाथ, पैर, छाती, चेहरे या मुंह या जननांगों के आसपास हो सकते हैं. ये दाने अंततः फुंसी (मवाद से भरे बड़े सफेद या पीले दाने) और ठीक होने से पहले पपड़ी बनाते हैं. इसके अन्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द भी शामिल है.

वायरस से लड़ने की कोशिश करते समय लिम्फ नोड्स भी सूज सकते हैं और दुर्लभ मामलों में यह वायरस जानलेवा भी हो सकता है. इससे संक्रमित व्यक्ति शुरुआती लक्षण से दाने निकलने और फिर ठीक होने तक कई लोगों को संक्रमित भी कर सकता है.

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लक्षण कितने दिन तक रहते हैं?

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, एमपॉक्स के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के 21 दिनों के अंदर दिखना शुरू होते हैं. एमपॉक्स के संपर्क में आने और लक्षण दिखने का समय 3 से 17 दिन है. इस दौरान, व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखते. लेकिन इस समय के पूरा होने के बाद वायरस का असर दिखने लगता है.

एमपॉक्स का इलाज क्या है?

एमपॉक्स का अभी तक कोई खास इलाज नहीं है. हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके लक्षण दर्द और बुखार की दवा देने की सलाह देता है. सीडीसी का कहना है कि अगर किसी मरीज की इम्यूनिटी अच्छी है और उसे स्किन की बीमारी नहीं है तो वह बिना किसी ट्रीटमेंट के भी ठीक हो सकता है. बस उसे देखभाल की जरूरत होगी.

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