Advertisement

मुनि सभ्यता, हजारों साल रहा हिंदुओं का राज... फिर कैसे इंडोनेशिया बन गया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश

भारत और इंडोनेशिया की जड़े हजारों साल पुराने रिश्ते से जुड़ी हैं. इंडोनेशिया आज दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है. करीब 27 करोड़ आबादी वाले इंडोनेशिया में करीब 90 फीसदी आबादी मुस्लिम है. लेकिन एक समय यहां हिंदू और बौद्ध राजाओं का प्रभाव था.

इंडोनेशिया में स्थित प्रम्बानन मंदिर. इंडोनेशिया में स्थित प्रम्बानन मंदिर.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:47 PM IST

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो इस बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि हैं. ये 5वीं बार है जब गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के नेता बतौर गेस्ट भारत में पहुंचे हैं. 26 जनवरी 1950 को हुए पहले गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में भी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो ही चीफ गेस्ट थे. बता दें कि भारत और इंडोनेशिया की जड़े हजारों साल पुराने रिश्ते से जुड़ी हैं. इंडोनेशिया आज दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है. करीब 27 करोड़ आबादी वाले इंडोनेशिया में करीब 90 फीसदी आबादी मुस्लिम है. लेकिन एक समय यहां हिंदू और बौद्ध राजाओं का प्रभाव था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर हिंदू और बौद्ध प्रभाव वाले इंडोनेशिया में मुस्लिम धर्म कैसे आया और कैसे ये दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश बना...

Advertisement

इंडोनेशिया में पहले हिंदू और बौद्ध लोगों का दबदबा था

इंडोनेशिया हमेशा से व्यापार के लिहाज से काफी अहम रहा है. बुनी या मुनि सभ्यता इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता है. चौथी शताब्दी ईसा पूर्व तक ये सभ्यता काफी प्रगति कर चुकी थी. हिंदू और बौद्ध धर्म मानने वाले ऋषि परंपरा का अनुकरण करते थे. करीब दो हजार साल तक इंडोनेशिया में हिंदू और बौद्ध धर्म का दबदबा था.  यहां हिंदू और बौद्ध धर्म मानने वाले राजाओं का राज था. किर्तानेगारा और त्रिभुवना जैसे राजा यहां पहले राज करते थे. चीन और भारत का इंडोनेशिया से व्यापारिक संबंध था. इंडोनेशिया के प्राकृतिक संसाधनों की वजह से यह इलाका हमेशा विदेशियों के लिए प्राथमिकता वाला रहा है. इसलिए यहां अन्य धर्मों को मानने वाले लोग दुनिया के कोने-कोन से पहुंचे थे.

13वीं सदी के आखिर में पूर्वी जावा में हिंदू माजापाहित साम्राज्य का उदय हुआ. इसके मुखिया गजाह मदा थे. जिनका असर आज भी इंडोनेशिया में देखा जा सकता है. इस दौर को इंडोनेशिया का सुनहरा काल भी कहा जाता है.

Advertisement

व्यापार, तलवार और शादी के दम पर फैला इस्लाम

जानकारी के अनुसार, अरबी मुस्लिम व्यापारी 8वीं सदी में इंडोनेशिया पहुंचे थे. लेकिन इस्लाम का प्रसार 13वीं सदी के अंत में शुरू हुआ. शुरुआत में इस्लाम अरबी मुस्लिम व्यापारियों द्वारा और फिर विद्वानों द्वारा मिशनरी गतिविधियों के माध्यम से फैलने लगा. शुरुआत में इस्लाम धर्म स्थानीय शासकों द्वारा अपनाया गया और फिर कुछ बड़े घरानों ने इस्लाम धर्म अपना लिया. कई रिपोर्ट को खंगालने पर पता चलता है कि मिशनरी दक्षिण एशिया (जैसे गुजरात), दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे चंपा) और बाद में दक्षिणी अरबी प्रायद्वीप (जैसे हद्रमत) से आए थे.

13वीं सदी में, सुमात्रा के उत्तरी तट पर इस्लामी राज्यों का निर्माण शुरू हुआ. 1292 में, जब मार्को पोलो चीन से लौट रहा था तो उसने इंडोनेशिया में मुस्लिम नगरों का जिक्र किया. सुलतान मलिक अल-सालेह को यहां पहले मुस्लिम शासक के रूप में जाना जाता है. 13वीं सदी के अंत तक, इस्लाम ने उत्तरी सुमात्रा में अपना आधार स्थापित कर लिया था.

व्यापारियों ने स्थानीय महिलाओं से की शादी

बताते हैं कि सबसे पहले यहां के शासकों और व्यापारियों ने इस्लाम धर्म अपनाया. दरअसल, मुस्लिम व्यापारी स्थानीय महिलाओं से विवाह करते थे, जिनमें से कुछ बड़े  व्यापारी शाही परिवारों में भी शादी करते थे. जैसे-जैसे शासकों और उनके दरबारियों ने इस्लाम अपनाया, वैसे-वैसे उनके अधीनस्थों ने भी इसे अपनाया. हालांकि, इस्लाम का प्रसार धीरे-धीरे हुआ, लेकिन 15वीं सदी में इस्लामी राज्य जैसे मलक्का सुलतानत की सैन्य शक्ति और समुद्री व्यापार पर नियंत्रण के कारण यह और तेज हुआ. कई जगह यह भी जिक्र मिलता है कि इंडोनेशिया की कुछ जगहों पर तलवार के दम पर भी इस्लाम लाया गया और लोगों का धर्मांतरण कराया गया. हालांकि, ज्यादातर इलाके में यह मिशिनरी और व्यापार के जरिए ही फैला.

Advertisement

यह भी पढ़ें: भारत से 'ब्रह्मोस' खरीदेगा इंडोनेशिया, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ हो सकती है डील

मुस्लिम व्यापारी अपने साथ इस्लाम लाए. विदेशी मुस्लिम लुटेरों ने तलवार के बल पर इन हिंदुओ का जबरन धर्मांतरण करवाया . आज भी यहां की इस्लामी संस्कृति पर हिंदु धर्म का प्रभाव दिखता है. लोगों और स्थानों के नाम आज भी अरबी और संस्कृत में रखे जाते हैं. 


स्वतंत्रता के बाद चुना संवैधानिक रास्ता

इंडोनेशिया में इस्लाम सबसे बड़ा धर्म है, जहां 2023 में नागरिक रजिस्टर डेटा के अनुसार 87.06% इंडोनेशियाई लोग अपने आप को मुस्लिम मानते हैं. संप्रदाय के हिसाब से अधिकतर लोग सुन्नी मुस्लिम हैं. प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार 2011 में देश की मुस्लिम आबादी का 99% सुन्नी मुस्लिम था, और बाकी 1% शिया मुस्लिम हैं, जो मुख्य रूप से जकार्ता के आसपास बसे हुए हैं, और लगभग 4 लाख अहमदी मुस्लिम भी हैं. हालांकि, इंडोनेशिया में मुस्लिम बहुमत है, लेकिन यह इस्लामी राज्य नहीं है, बल्कि संवैधानिक रूप से एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, जिसमें सरकार छह आधिकारिक धर्मों को मान्यता देती है.

यह भी पढ़ें: 6 लेयर की सिक्योरिटी, 15 हजार जवान और AI कैमरे... गणतंत्र दिवस पर दिल्ली पुलिस ने की खास तैयारी

आज भी हिंदू और बौद्ध धर्म  की जड़ें मजबूत

Advertisement

भारत और इंडोनेशिया के रिश्ते काफी पुराने हैं. यही कारण है कि इंडोनेशिया और भारत में सांस्कृतिक समानताएं देखने को मिलती हैं. यहां की भाषा, संस्कृति और मिथकों पर भी इन धर्मों का असर है. उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में अगर आप महाभारत और रामायण का ज़िक्र करेंगे तो वे कहेंगे कि ये तो हमारे ग्रंथ हैं. वहां के उत्सवों और झांकियों आदि में इन ग्रंथों के पात्र कठपुतलियों के रूप में नजर आ जाते हैं. यहां बौद्ध और हिंदू धर्म की कई कथाएं आज भी संस्कृति का हिस्सा हैं. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement