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फिलिस्तीनियों को भेजना है तो इजरायल में..., ट्रंप के गाजा पर कब्जे वाले बयान पर भड़के मुस्लिम देश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात के बाद कहा है कि अमेरिका गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और उसके विकास के लिए काम करेगा. डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर मुस्लिम देशों और संगठनों ने नाराजगी जताई है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 05 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 6:48 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई. ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक के बाद दोनों नेताओं की ओर से संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई. इस दौरान ट्रंप ने कहा कि, हम चाहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी का स्वामित्व लेकर उसका विकास करे. ट्रंप ने कहा कि, अमेरिका फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और इसका विकास करेगा.

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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, "हम गाजा पर अपना अधिकार जताएंगे और साइट पर मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने की जिम्मेदारी लेंगे. हम नष्ट हो चुकी इमारतों को गिरा देंगे और एक ऐसा आर्थिक विकास करेंगे जो क्षेत्र के लोगों को असीमित संख्या में नौकरियां और आवास प्रदान करेगा." 

बयान में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि, फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी को खाली करना होगा. उन्हें मिस्र, जॉर्डन और अन्य देशों में स्थाई तौर पर बस जाना चाहिए. अब गाजा रहने लायक नहीं रहा. मैंने सुना है कि गाजा उनके लिए बदकिस्मत है. वे वहां नरक की तरह रहते हैं. वे नरक में रह रहे हैं. गाजा के भविष्य में फिलिस्तीनी नहीं हैं. उन्हें किसी अच्छी जगह पर चले जाना चाहिए.

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया. इससे पहले भी ट्रंप राष्ट्रपति बनने से पहले गाजा के लोगों को दूसरे देशों में बसाने की बात कर चुके हैं. हालांकि, गाजा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का बयान फिलिस्तीनी प्रशासन समेत कई मुस्लिम देशों को रास नहीं आया है.  

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वैश्विक नेताओं को गाजा के लोगों की इच्छा का सम्मान करना चाहिए

यूएन में फिलिस्तीनी प्रतिनिधि रियाद मंसूर ने कहा कि फिलिस्तीनियों को दूसरे देशों में बसाने से ज्यादा ठीक है कि उन्हें इजरायल में उनके घरों में फिर बसा दिया जाए. रियाद मंसूर ने कहा कि, "जो गाजा के लोगों को अच्छी जगह भेजना चाहते हैं, वह उन्हें इजरायल में उनके असली घरों में वापस भिजवा दें, वहां कई अच्छी जगह हैं और गाजा के लोग वहां वापस जाकर काफी खुश होंगे." 

रियाद मंसूर ने आगे कहा कि, फिलिस्तीनी खुद चाहते हैं कि वह गाजा को फिर से स्थापित करें और वैश्विक नेताओं को उनकी इच्छा का सम्मान करना चाहिए. 

फिलिस्तीन और मिस्र ने दिया संयुक्त बयान, कहा- लोगों को निकाले बिना ही...

ट्रंप के गाजा पर कब्जे वाले बयान के बाद बुधवार को फिलिस्तीन और मिस्र ने एक संयुक्त बयान दिया. बयान में दोनों देशों ने फिलिस्तीनी लोगों को गाजा से बाहर निकाले बिना ही क्षेत्र का पुनर्निर्माण करने का आह्वान किया. दोनों देशों का यह बयान फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा और मिस्र के विदेश मंत्री की मुलाकात के बाद आया है.

हालांकि, बयान में डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा निशाना नहीं साधा गया है लेकिन यह जरूर कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदायों के सहयोग से फिलिस्तीनी लोगों को बिना बाहर निकाले ही गाजा का पुनर्निर्माण किया जाएगा.

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वहीं गाजा बेस्ड लड़ाका संगठन हमास ने ट्रंप के बयान पर नाराजगी जताई. हमास के सीनियर नेता समी अबू जुहरी ने कहा कि, गाजा पर कब्जा करने की इच्छा वाला ट्रंप का बयान बेहद घटिया है. 

हमास नेता ने आगे कहा कि, इस तरह का कोई भी विचार क्षेत्र में आग भड़का सकता है. हमारा मानना है कि यह योजना क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली है क्योंकि गाजा के लोग कभी इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

ट्रंप के बयान के बाद सऊदी अरब ने बिना नाम लिए दिया बड़ा बयान 
वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी फिलिस्तीन पर कब्जे के मामले में अपनी ओर से बयान जारी किया. हालांकि, इस बयान में ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया.

सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि, हम फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों के उल्लघंन, उन्हें दूसरी जगह पर बसाने या फिलिस्तीन की जमीन पर किसी देश के कब्जे को लेकर हमेशा से खिलाफ रहे हैं.

सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि, आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कर्तव्य है कि वह उन सभी फिलिस्तीनी लोगों को दी गई गंभीर मानवीय पीड़ा को कम करने के लिए काम करे जो अपनी भूमिका के प्रति प्रतिबद्ध हैं और गाजा को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे.

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बीते शनिवार को भी अरब देशों के एक समूह ने गाजा के लोगों को मिस्र और जॉर्डन में बसाने की ट्रंप की चाहत को सिरे से खारिज कर दिया. मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब समेत कई अरब देशों ने संयुक्त बयान में कहा कि, ऐसी योजनाएं मिडिल ईस्ट क्षेत्र में विवाद को बढ़ा सकती हैं.

संयुक्त बयान में कहा गया कि, ऐसी कोई भी योजना जो फिलिस्तीनियों को उनकी जमीन से जुदा कर रही हो, वह क्षेत्र में स्थिरता और लोगों की शांति के लिए खतरा है.

तुर्की बोला- अगर ऐसा हुआ तो इससे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ जाएगा

तुर्की ने डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पर कब्जे पर दिए बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने कहा कि, ट्रंप का यह बयान अस्वीकार्य है. इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर ऐसा कुछ होगा तो इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.

वहीं तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि,  अगर हालात बदले और फिलिस्तीनियों की हत्याएं रुक जाएं तो वह इजरायल के खिलाफ लिए गए फैसलों पर पुनर्विचार करेगा. इन फैसलों में कारोबार संबंधों को रोकना और अपने राजनयिकों को वापस बुलाना शामिल है.

डोनाल्ड ट्रंप की इस योजना के सफल होने की कोई संभावना नहीं है

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अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल में नेशनल एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर निहाद अवद ने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. निहाद अवद ने कहा कि, जबरन तरीके से अगर फिलिस्तीनियों को गाजा से निकाला जाएगा तो उससे विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है.  उन्होंने कहा कि, गाजा फिलिस्तीनियों का है, अमेरिका का नहीं.

निहाद अवद ने आगे कहा कि, ट्रंप की फिलिस्तीनियों को गाजा छोड़कर कहीं और भेजने की योजना के सफल होने की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि, जॉर्डन, मिस्र, सऊदी अरब समेत पूरा मुस्लिम समाज यह साफ कर चुका है कि इस तरह का कोई भी विचार उन्हें स्वीकार नहीं है.

वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी गाजा पट्टी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान की आलोचना की. हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि, ट्रंप का यह बयान अमेरिका का घमंड दिखा रहा है. हूती नेता ने कहा कि, अगर मिस्र या जॉर्डन या दोनों पक्ष अमेरिका को चुनौती देने का ठान लें तो यमन पूरी ताकत के साथ उनके साथ खड़ा रहेगा. 

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