
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा को बड़ी कामयाबी मिली है. नासा ने चंद्रमा की सतह पर पानी खोजने का दावा किया है. नासा के स्ट्रैटोस्फेरिक ऑर्ब्जवेटरी फॉर इंफ्रारेड एस्ट्रोनॉमी (SOFIA) ने इस बात की पुष्टि की है कि पहली बार चंद्रमा की सतह पर सूरज की किरणें पड़ने वाले क्षेत्र में पानी यह खोज की गई है.
इस खोज से यह साफ हो जाता है कि पानी को चंद्रमा की सतह तक वितरित किया जा सकता है, और यह सिर्फ ठंड या छाया वाले स्थानों तक सीमित नहीं है. एसओएफआईए (SOFIA) ने चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध में स्थित, पृथ्वी से दिखाई देने वाले सबसे बड़े गड्ढों में से एक, क्लेवियस क्रेटर में पानी के अणुओं (H2O) का पता लगाया है.
चंद्रमा की सतह के अब तक पिछले ऑबजरवेशन के दौरान हाइड्रोजन के कुछ रूप का पता लगाया गया, लेकिन यह पानी और उसके करीबी रासायनिक चीज हाइड्रॉक्सिल (OH) के बीच अंतर करने में असमर्थ था. इस स्थान से प्राप्त डेटा के अनुसार, 100 से 412 पार्ट्स प्रति मिलियन की सांद्रता में पानी का पता चलता है और यह लगभग 12 औंस पानी की बोतल के बराबर है जो चंद्रमा की सतह पर फैली मिट्टी के घन (क्यूबिक) मीटर में फंसा हुआ है. इस खोज को नेचर एस्ट्रोनॉमी के नए एडिशन में प्रकाशित किए गए हैं.
वॉशिंगटन में नासा मुख्यालय में साइंस मिशन निदेशालय में एस्ट्रोफिजिक्स डिवीजन के निदेशक पॉल हर्ट्ज ने कहा, "हमें H2O के संकेत मिले थे जिसे हम पानी के रूप में जानते हैं और वह चंद्रमा के सूर्य की ओर मौजूद हो सकता है." उन्होंने आगे कहा कि अब हम जानते हैं कि यह वहां है. यह खोज चंद्रमा की सतह की हमारी समझ को चुनौती देती है और गहन अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए प्रासंगिक संसाधनों के बारे में पेचीदा सवाल उठाती है.
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तुलनात्मक रूप में SOFIA ने चंद्रमा की सतह पर जितनी पानी की खोज की है उसकी मात्रा अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में मौजूद पानी की तुलना में 100 गुना कम है. पानी की इस छोटी मात्रा के बावजूद यह खोज नए सवाल उठाती है कि चंद्रमा की सतह पर पानी कैसे बनता है. इससे भी बड़ा सवाल यह है कि चंद्रमा के कठोर और वायुमंडलहीन वातावरण में यह कैसे बना रहता है. हालांकि अभी यह तय किया जाना बाकी है कि एक संसाधन के रूप में पानी का कितना इस्तेमाल किया जा सकेगा.
अमेरिकी एजेंसी नासा की महत्वाकांक्षी योजना चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने की है. नासा पहले से ही आर्टेमिस (Artemis) कार्यक्रम के जरिए साल 2024 तक चांद की सतह पर मानव मिशन भेजने की तैयारी में जुटा हुआ है. नासा अपने आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए चांद की सतह पर 2024 तक इंसानों को पहुंचाना चाहता है. चंद्रमा पर पानी की उपस्थिति के बारे में जानने के लिए नासा उत्सुक है और इसके लिए वह 2024 में चंद्रमा की सतह पर पहले महिला और फिर एक आदमी को भेजने की तैयारी में है. वह अगले एक दशक में वहां पर एक स्थायी मानव उपस्थिति सुनिश्चित करना चाहता है.
SOFIA के परिणाम चंद्रमा पर पानी की उपस्थिति की जांच करने वाले पिछले सभी शोधों का योगदान है. जब 1969 में अपोलो अंतरिक्ष यात्री पहली बार चंद्रमा से लौटे थे, तो इसे पूरी तरह से सूखा माना जाता था. लेकिन पिछले 20 सालों में नासा के लूनर क्रेटर ऑब्जर्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट, ने चंद्रमा के ध्रुवों के चारों ओर स्थायी रूप से छाया रूप में बर्फ के होने की पुष्टि की. इस बीच, कई अन्य अंतरिक्ष यान जिसमें कैसिनी मिशन और डीप इम्पैक्ट कॉमेट मिशन, के अलावा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का चंद्रयान-1 मिशन और नासा का ग्राउंड बेस्ड इन्फ्रारेड टेलीस्कोप फैसिलिटी के जरिए व्यापक रूप से चंद्रमा के सतह पर देखा गया और सूरज की किरणों वाले क्षेत्रों में हाइड्रेशन के संकेत मिले. हालांकि ये यह पता करने में नाकाम रहे कि यह H2O है या OH.