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नए पोप का चुनाव कैसे होता है? काले और सफेद धुएं का क्या है कनेक्शन... बड़े सवालों के जवाब

पोप फ्रांसिस फिलहाल रोम के अस्पताल में भर्ती हैं. न्यूमोनिया की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं. पोप फ्रांसिस रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख हैं. पोप वैसे तो जीवनपर्यंत इस पद पर रहते हैं लेकिन असामयिक मौत या फिर किसी वजह से इस पद से इस्तीफा देने पर नए पोप का चुनाव होता है. 

पोप फ्रांसिस पोप फ्रांसिस
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

पोप फ्रांसिस इस समय हॉस्पिटल में हैं. उनके दोनों फेफड़ों में न्यूमोनिया है जिसकी वजह से उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह पद से इस्तीफा दे सकते हैं. अगर वह पद से इस्तीफा देते हैं तो उनके स्थान पर नए पोप का चुनाव होगा? तो आइए जानते हैं कि नए पोप का चुनाव कैसे होता है?

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पोप फ्रांसिस फिलहाल रोम के अस्पताल में भर्ती हैं. न्यूमोनिया की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं. पोप फ्रांसिस रोमन कैथोलिक चर्च के प्रमुख हैं. पोप वैसे तो जीवनपर्यंत इस पद पर रहते हैं लेकिन असामयिक निधन या फिर किसी वजह से इस पद से इस्तीफा देने पर नए पोप का चुनाव होता है. आखिरी बार 2013 में पोप बेनेडिक्ट XVI ने इस्तीफा दिया था. वह लगभग 600 साल में पद से इस्तीफा देने वाले पहले पोप थे. 

कैसे चुना जाता है पोप?

कैथोलिक परंपरा के अनुसार, जब किसी पोप का चुनाव होता है तो Papel Conclave का आयोजन होता है. इस कॉन्क्लेव के जरिए नए पोप को चुना जाता है. कार्डिनल्स पोप को चुनते हैं. कार्डिनल्स कैथोलिक चर्च के सबसे उच्च रैंक वाले पादरी होते हैं.

कार्डिनल्स दरअसल दुनियाभर के बिशप और वेटिकन के अधिकारी होते हैं जिन्हें निजी तौर पर पोप के द्वारा ही चुना जाता है. ये कार्डिनल्स नया पोप चुनने के लिए कई बैठकें करते हैं.

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बता दें कि नए पोप के लिए वोटिंग वेटिकन सिटी के सिस्टीन चैपल में होती है. 80 से कम उम्र के कार्डिनल्स को वोट देने का अधिकार होता है. वोटिंग और बैठक की पूरी प्रकिया गुप्त रखी जाती है. इस दौरान कार्डिनल्स को बाहरी दुनिया से संपर्क की अनुमति नहीं होती है. 

कार्डिनल्स सीक्रेट बैलेट से वोट करते हैं. हर दिन चार राउंड तक वोटिंग चलती है और तब तक चलती है जब तक किसी उम्मीदवार को दो-तिहाई वोट नहीं मिल जाते. इस प्रक्रिया की शुरुआत में स्पेशल मॉर्निंग गेदरिंग होती है, जहां 120 कार्डिनल सिस्टिन चैपल में इकट्ठा होते हैं. यही 120 कार्डिनल नए पोप का चुनाव करते हैं. 

इस अहम मीटिंग के बाद कार्डिल सभी को बाहर जाने को कहते हैं. इससे पहले ये कार्डिनल गोपनीयता की शपथ लेते हैं और नया पोप चुने जाने तक खुद को कॉनक्लेव के भीतर कैद कर लेते हैं. इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि पहले दिन की वोटिंग में ही नया पोप मिल जाए. 

क्या है काले धुएं और सफेद धुएं का फंडा?

नतीजों के ऐलान के लिए तीन कार्डिनल्स को नियुक्त किया जाता है. ये कार्डिनल्स हर बैलेट के नतीजों को जोर से पढ़ते हैं. अगर किसी भी उम्मीदवार को निर्धारित दो-तिहाई वोट नहीं मिलते तो बैलेट को स्टोव में जला दिया जाता है. जिन रसायनों के जरिए इन बैलेट को जलाया जाता है उससे बेहद काला धुंआ बाहर निकलता है. 

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ठीक इसी तरह जब किसी उम्मीदवार को किसी राउंड में जरूरी दो-तिहाई वोट मिल जाते हैं तो कॉलेज ऑफ कार्डिनल्स के डीन से कहा जाता है कि क्या वह इसे स्वीकार करते हैं. अगर वह इसे स्वीकार कर लेता है तो इसके बाद अंतिम राउंड के बैलेट को जला दिया जाता है लेकिन इस बार जिन रसायनों के इस्तेमाल से बैलेट जलाए जाते हैं उससे बाहर सफेद धुंआ निकलता है जिससे बाहरी दुनिया को पता चलता है कि नया पोप चुन लिया गया है.

पोप बनने की क्या हैं शर्तें?

पोप पुरुष ही बन सकता है. पोप बनने की कोई उम्र निर्धारित नहीं की गई है. पोप फ्रांसिस को जब चुना गया था तो वह 76 साल के थे और अभी उनकी उम्र 88 साल है. उनसे पहले पोप बेनेडिक्ट XVI को 78 साल की उम्र में चुना गया था जबकि उन्होंने 85 साल की उम्र में पद से इस्तीफा दे दिया था. 

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