
अफगानिस्तान (Afghanistan) में पैदा हुए संकट से पूरी दुनिया सकते में है. तालिबान (Taliban) का पूरे देश पर कब्जा हो गया है, ऐसे में दुनिया के देशों द्वारा अपने नागरिकों को निकालने का मिशन जारी है. भारत (India) ने भी अपने नागरिकों को बाहर निकालने का मिशन शुरू कर दिया है.
बीते दिन से ही अफगानिस्तान से लोगों को एयरलिफ्ट (Airlift) कर भारत वापस लाने की रणनीति पर काम किया जा रहा था. जिसका नतीजा देखने को मिला और मंगलवार सुबह गुजरात के जामनगर में वायुसेना का विमान करीब 120 लोगों को लेकर पहुंचा.
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भारत के ‘ऑपरेशन एयरलिफ्ट काबुल’ ने कैसे किया काम?
अफगानिस्तान के काबुल में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए विदेश मंत्रालय पहले से ही एक्टिव था. इसी मिशन के तहत हिंडन एयरबेस से भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर ने उड़ान भरी, जिसमें गरुड़ कमांडो तैनात थे. पूरी तैयारी के साथ सोमवार की शाम 4.20 बजे इस विमान ने उड़ान भरी.
जानकारी के मुताबिक, इस मिशन को पूरा करने के लिए पाकिस्तान या ईरान के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं किया गया. विमान ओमान और पर्शियन गल्फ होते हुए ताजिकिस्तान पहुंचा. इसके बाद मंगलवार सुबह विमान काबुल पहुंचा और नाटो फोर्स की सहमति के बाद भारतीय विमान एयरपोर्ट पर उतरा.
नाटो फोर्स की मदद से भारतीय नागरिकों को एयरपोर्ट तक लाया गया. सुबह करीब 7.30 बजे काफिला एयरपोर्ट पहुंचा और इसी के बाद C-17 ग्लोबमास्टर ने उड़ान भरी. इस विमान में भारतीय राजदूत, दूतावास से जुड़े अधिकारी, आईटीबीपी के जवान और अन्य पत्रकार शामिल थे. अफगानिस्तान के काबुल से उड़ान भरने के बाद ये विमान सुबह 11 बजे गुजरात के जामनगर पहुंचा था. यहां एयरफोर्स स्टेशन पर सभी का स्वागत किया गया. अब इन लोगों को हिंडन एयरबेस लाया जाएगा.
अजित डोभाल ने अमेरिकी एनएसए से की थी बात
काबुल में फंसे भारतीयों को बाहर निकालना इतना आसान नहीं था, क्योंकि काबुल एयरपोर्ट के हालात काफी खराब थे. सोमवार को हजारों की संख्या में लोग काबुल एयरपोर्ट पर जुटे रहे, हालात बेकाबू होते गए और यहां पर फायरिंग भी करनी पड़ी जिसमें कई लोगों की जान चली गई. ऐसे हालात में भारतीय विमान का वहां जाना और भारतीय नागरिकों को बाहर निकालना काफी मुश्किल काम था.
ऐसे में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने अमेरिकी एनएसए से फोन पर बात की. इसी के बाद दोनों देशों में सहमति बनी कि भारतीय नागरिकों के लिए एक सेफ पास बनाया जाएगा, ताकि वहां से उन्हें एयरपोर्ट लाया जा सके और फिर भारतीय विमान उड़ान भर सके.
काबुल एयरपोर्ट को अभी पूरी तरह से अमेरिकी और नाटो फोर्स ने घेरा हुआ है, उनकी कोशिश है कि वह अपने नागरिकों को सबसे पहले बाहर निकाल सकें. ऐसे में इनकी मदद से ही भारतीय नागरिकों को आसानी से बाहर निकाला गया है.
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अभी भी फंसे हैं भारत के कई लोग
ऐसा नहीं है कि भारत के सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है. काबुल की एक फैक्ट्री मंल करीब 18 कर्मचारी फंसे हैं, जो उत्तर प्रदेश के हैं. इन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है, सभी कर्मचारियों से आजतक से खास बात की और कहा कि वह किसी भी तरह यहां से निकलना चाहते हैं. उनके पासपोर्ट भी फैक्ट्री मालिकों ने रख लिए हैं.
इनके अलावा भी अन्य कई राज्यों से आने वाले कुछ लोग अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं. भारत की ओर से हेल्पलाइन शुरू की गई है और लोगों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि जल्द ही उन्हें वहां से निकाल लिया जाएगा. विदेश मंत्रालय लगातार स्थानीय लोगों के साथ संपर्क में बना हुआ है, ताकि इस मिशन को पूरा किया जा सके.
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तालिबान का बदला हुआ रुख, लोगों से काम पर आने का कहा
तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के दो दिन बाद अब मंगलवार को अफगान सरकार के कर्मचारियों से राजधानी में सामान्य स्थिति वापस लाने के प्रयास में काम पर लौटने का आग्रह किया गया है. तालिबान ने सभी के लिए सामान्य माफी का ऐलान किया और लोगों से कहा कि वह अपनी रूटीन लाइफ पर वापस लौट जाएं.
इतना ही नहीं तालिबान ने संकेत दिए हैं कि वो नई सरकार में महिलाओं को जगह देगा. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने ट्वीट किया कि काबुल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शहर में कानून-व्यवस्था बहाल हो गई है.
मुजाहिद ने कहा कि तालिबान नेतृत्व ने अपने सदस्यों को आदेश दिया है और एक बार फिर उन्हें निर्देश दिया है कि किसी को भी बिना अनुमति के किसी के घर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. किसी के भी जीवन, संपत्ति और सम्मान को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.
तालिबान के इस ऐलान के बीच मंगलवार को काबुल में महिलाओं द्वारा प्रदर्शन भी किया गया. महिलाओं द्वारा मांग की गई है कि नई सरकार में उनकी भी हिस्सेदारी होनी चाहिए. अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के छोटे-छोटे समूहों में प्रदर्शन किए गए हैं.