
परवेज मुशर्रफ. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति. पूर्व सेना प्रमुख. 1999 के करगिल युद्ध के आर्किटेक्ट. रविवार को मुशर्रफ का निधन हो गया. वो लंबी बीमारी से जूझ रहे थे. दुबई के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था.
परवेज मुशर्रफ एमिलॉयडोसिस नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. इस बीमारी में शरीर में अमीलॉयड नाम का प्रोटीन बढ़ जाता है, जिस कारण शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं. मुशर्रफ 2016 से ही दुबई में थे. उनका शव सोमवार को पाकिस्तान लाया जाएगा.
परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के विवादित सेना प्रमुखों में से रहे हैं. 1999 में करगिल जंग के बाद उन्होंने नवाज शरीफ सरकार का तख्तापलट कर दिया था. उन पर दो राजनीतिक हत्याओं के आरोप भी लगे. लाल मस्जिद कांड में भी उनका नाम आया. आखिरी समय में उन्हें अपना देश छोड़कर जाना पड़ा. सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं मुशर्रफ की जिंदगी में कैसे-कैसे उतार-चढ़ाव आए.
जिसने आर्मी चीफ बनाया, उसका ही तख्तापलट
फरवरी 1997 में पाकिस्तान में आम चुनाव हुए. नवाज शरीफ ने बहुत बड़ा बहुमत हासिल किया और दूसरी बार प्रधानमंत्री बने. उनकी सरकार में पाकिस्तान ने परमाणु हथियार का परीक्षण किया जो सफल रहा.
लेकिन कुछ ही समय बाद नवाज शरीफ की तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जहांगीर करामात से ठन गई. शरीफ ने उन्हें हटाकर जनरल परवेज मुशर्रफ को आर्मी चीफ बना दिया.
1999 में भारत के साथ करगिल में जंग हुई. इसमें पाकिस्तान बुरी तरह हारा. इस हार के बाद पाकिस्तान की आवाम में गुस्सा भर गया. सेना अपने ऊपर इस हार का दोष नहीं लेना चाहती थी. सरकार भी इससे बच रही थी.
नतीजा ये हुआ कि जिस समय मुशर्रफ श्रीलंका में थे, उस समय नवाज शरीफ को बर्खास्त कर दिया. शरीफ ने मुशर्रफ के विमान को कराची एयरपोर्ट पर उतरने नहीं दिया गया. लेकिन मुशर्रफ के वफादार अफसरों ने नवाज शरीफ को पहले तो नजरबंद कर दिया और फिर जेल में डाल दिया.
आखिरकार 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार का तख्तापलट कर दिया. मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति बन गए. अगस्त 2008 तक वो राष्ट्रपति बने रहे.
दो राजनीतिक हत्याओं के आरोप लगे
परवेज मुशर्रफ का नाम दो राजनीतिक हत्याओं में भी सामने आया. पहला नाम था- पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो. और दूसरा था- बलूच नेता अकबर बुगती.
अकबर बुगती बलूचिस्तान के गवर्नर और मुख्यमंत्री रहने के अलावा पाकिस्तान की केंद्रीय सरकारों में मंत्री भी रहे थे. वो बलूचिस्तान के सबसे बड़े कबायली नेता थे. जब मुशर्रफ राष्ट्रपति थे, तब 2005 में सैन्य अभियान शुरू हुआ था.
बुगती की हत्या से कुछ महीने पहले मुशर्रफ ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'बलूचिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उसके पीछे दो या तीन नेता है. पिछली सरकारों ने उनके साथ समझौते किए थे, हम ऐसा नहीं करेंगे. ये खत्म करने की जंग होगी.'
26 अगस्त 2006 को पाकिस्तानी सेना के सैन्य अभियान में अकबर बुगती मारे गए थे. पाकिस्तानी सरकार बुगती को विद्रोही नेता मानती थी. बुगती की हत्या के मामले में 2013 में मुशर्रफ को गिरफ्तार भी किया गया था.
बुगती के बाद 27 दिसंबर 2007 को बेनजीर भुट्टो की हत्या हो गई थी. भुट्टो रावलपिंडी के लियाकत बाग से एक चुनावी रैली कर वापस लौट रही थीं. उनका काफिला निकल ही रहा था, हजारों समर्थक लियाकत बाग के गेट के बाहर खड़े हो गए थे.
समर्थकों का जवाब देने के लिए भुट्टो कार से बाहर आईं, तभी 15 साल का बिलाल उनके पास आया, उसने तीन गोलियां मारीं और फिर खुद को बम से उड़ा लिया. इस हमले में बेनजीर भुट्टो की मौत हो गई. उनके अलावा और भी दो दर्जन लोग मारे गए थे.
बेनजीर भुट्टो की हत्या के आरोप भी परवेज मुशर्रफ पर लगे. उनपर मुकदमा भी चला था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्वासन झेल रहीं भुट्टो जब वॉशिंगटन में थीं, तब मुशर्रफ ने उन्हें फोन कर धमकी दी थी. मुशर्रफ ने भुट्टो को पाकिस्तान न लौटने को कहा था, लेकिन धमकाया भी था कि वापस आने पर उनके साथ कुछ होता है तो इसके लिए वो जिम्मेदार नहीं होंगे.
मुशर्रफ इन आरोपों को हमेशा खारिज करते रहे. लेकिन बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो दावा करते थे कि मुशर्रफ ने जानबूझकर उनकी मां की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया ताकि उन्हें खत्म किया जा सके.
क्या था लाल मस्जिद कांड?
साल 2007 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में स्थित लाल मस्जिद में मिलिट्री ऑपरेशन हुआ था. इस ऑपरेशन में कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल रशिद गाजी की मौत हो गई थी. उनके अलावा सैकड़ों और लोग भी मारे गए थे.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी सरकार और सेना कई महीनों तक इस ऑपरेशन को टालती रही. आखिरकार 3 जुलाई 2007 को लाल मस्जिद को घेर लिया गया. सेना टैंकों और भारी हथियारों के साथ मस्जिद में दाखिल हो गई.
कई दिनों तक लाल मस्जिद में खूनखराबा चलता रहा. सैकड़ों लोग मारे गए. आरोप लगा कि इस पूरे ऑपरेशन के आदेश मुशर्रफ ने दिए थे. उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. हालांकि, मुशर्रफ इन आरोपों को भी खारिज करते रहे.
फिर सात साल का निर्वासन, दुबई में निधन
मार्च 2007 में मुशर्रफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि वो और 5 साल तक राष्ट्रपति बने रहना चाहते हैं. लेकिन विपक्ष उनके खिलाफ आ गया. मुशर्रफ को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई.
8 सितंबर 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से मुशर्रफ को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी. हालांकि, मुशर्रफ के खिलाफ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा था. 3 नवंबर 2007 को मुशर्रफ ने पाकिस्तान में इमरजेंसी का ऐलान कर दिया. उन्होंने संविधान को भी निलंबित कर दिया और चीफ जस्टिस को भी बर्खास्त कर दिया.
एक महीने बाद 15 दिसंबर 2007 को मुशर्रफ ने इमरजेंसी हटा दी. फरवरी 2008 में पाकिस्तान में आम चुनाव हुए. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) सबसे बड़ी पार्टी बनी. सैयद युसुफ रजा गिलानी प्रधानमंत्री बने. नई सरकार ने मुशर्रफ को पद से हटाने के लिए महाभियोग की तैयारी शुरू कर दी. हालांकि, 18 अगस्त 2008 को मुशर्रफ ने खुद ही पद से इस्तीफा दे दिया.
2013 के आम चुनाव में जीत के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) सत्ता में आई. नवाज शरीफ प्रधानमंत्री बने. नवाज शरीफ की सरकार ने मुशर्रफ के खिलाफ संविधान की अवहेलना करने पर देशद्रोह का केस दर्ज किया.
दिसंबर 2013 में मुशर्रफ के खिलाफ केस दर्ज हुआ और 31 मार्च 2014 को उन्हें आरोपी बनाया गया. इसी बीच 18 मार्च 2016 को मुशर्रफ इलाज के लिए दुबई चले गए. तब से लौटकर ही नहीं आए. हालांकि, उनके खिलाफ मुकदमा चलता रहा.
करीब 7 साल तक चली सुनवाई के बाद 17 दिसंबर 2019 को पेशावर की स्पेशल कोर्ट ने मुशर्रफ को अनुच्छेद 6 के तहत फांसी की सजा सुनाई.