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अमेरिकी दबाव से झुका पाक! डेनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई का होगा रिव्यू

साल 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल आईएसआई और अलकायदा के बीच संबंधों पर एक खबर के लिए कराची में जानकारी जुटा रहे थे. इसी दौरान उनका अपहरण कर लिया गया और बाद में उनका सिर कलम करके उनकी हत्या कर दी गई थी.

डेनियल पर्ल हत्या मामले का मुख्यारोपी उमर सईद शेख (फाइल फोटो) डेनियल पर्ल हत्या मामले का मुख्यारोपी उमर सईद शेख (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • इस्लामाबाद,
  • 31 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST
  • डेनियल पर्ल अमेरिकी पत्रकार था
  • 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के लिए काम करता था
  • पाकिस्तान के कराची में उसकी हत्या कर दी गई
  • मुख्य हत्यारोपी को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने रिहा कर दिया है

अमेरिका और ब्रिटेन से पड़ने वाले भारी दबाव के बाद अब पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया है. पाकिस्तान ने कहा है कि वो पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमेरिकी मूल के पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई के मामले को रिव्यू करेगा. पाकिस्तानी सरकार ने कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए फैसले के संबंध में सिंध प्रान्त के प्रशासन द्वारा चलाई जा रही रिव्यू प्रक्रिया में भाग लेगी. जिस फैसले के तहत 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या करने वाले हत्यारे उमर सईद शेख और उसके तीन सथियों को रिहा कर दिया गया है.

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आपको बता दें कि साल 2002 में पाकिस्तान के शहर कराची में डेनियल पर्ल की हत्या कर दी गई थी. डेनियल पर्ल ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दक्षिण एशिया ब्यूरो प्रमुख थे. साल 2002 में डेनियल पर्ल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और अलकायदा के बीच संबंधों पर एक खबर के लिए कराची में जानकारी जुटा रहे थे. इसी दौरान उनका अपहरण कर लिया गया और बाद में उनका सिर कलम करके उनकी हत्या कर दी गई थी.

गुरुवार के दिन पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने डेनियल पर्ल की हत्या मामले के मुख्य अभियुक्त उमर सईद शेख और उसके सहयोगियों - फहद नसीम, शेख आदिल और सलमान साकिब को रिहा कर दिया था. पर्ल के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को "न्याय की पूर्ण हत्या" कहा था. सिंध प्रान्त की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में उसके द्वारा दिए गए फैसले पर दोबारा से विचार करने के लिए रिव्यी पिटीशन डाली गई है.

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आपको बता दें कि उमर सईद शेख भारत में भी मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी है, इसे कंधार हाईजैक कांड में छोड़ा गया था. इसकी रिहाई पर भारत ने भी आपत्ति जताते हुए निंदा की थी, क्योंकि ऐसा खूंखार आतंकी जेल से छूटने के बाद एक बार फिर भारत में आतंकवादी साजिशों को अंजाम दे सकता है.

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