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'जिंदा है सरबजीत का हत्यारा सरफराज', पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अफसर का दावा, पाकिस्तानी मंत्री ने भारत पर मढ़े आरोप, कहा- 'पैटर्न सेम है...'

सरबजीत सिंह की हत्या करने वाले अंडरवर्ल्ड डॉन अमीर सरफराज तांबा की रविवार को गोली मार कर हत्या कर दी थी. अब इस मामले में नया मोड़ आया है. पाकिस्तान के एक पुलिस अफसर ने दावा किया है कि सरफराज अभी जिंदा और गंभीर रूप से घायल है, जबकि पाकिस्तान के गृह मंत्री ने इस मामले में भारत पर आरोप मढ़े हैं.

सरबजीत सिंह और अमीर सरफराज तांबा. (फाइल फोटो) सरबजीत सिंह और अमीर सरफराज तांबा. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • इस्लामाबाद,
  • 16 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

पाकिस्तान में अंडरवर्ल्ड डॉन अमीर सरफराज तांबा की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है. पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अफसर ने दावा किया है कि सरफराज अभी भी जिंदा है और गंभीर रूप से घायल है. वहीं, पाकिस्तान सरकार में मंत्री ने भारत पर आरोप मढ़े हैं.

बता दें कि पाकिस्तान की जेल में बंद भारत के रहने वाले सरबजीत सिंह की साल 2013 में हत्या कर दी गई थी. पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में हाफिज सईद के करीबी अमीर सरफराज तांबा ने पॉलीथीन से गला घोंटकर और पीट-पीटकर सरबजीत को मौत के घाट उतार दिया था. पाकिस्तान में तांबा की अज्ञात हमलावरों ने रविवार को गोली मार कर हत्या कर दी. अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि सरफराज तांबा जिंदा है.

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लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक हाफिज सईद के करीबी सहयोगी तांबा पर सनंत नगर स्थित उसके घर पर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने हमला किया था. तांबा को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया. लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ऑपरेशंस लाहौर सैयद अली रजा ने डॉन अखबार को बताया कि तांबा अभी भी जिंदा है पर वो गंभीर रूप से घायल है. दिलचस्प बात ये है कि पुलिस अधिकारी ने यह नहीं बताया कि अगर तांबा जिंदा है तो उसे इलाज के लिए कहां रेफर किया गया है.

पुलिस प्रवक्ता ने टिप्पणी से किया इनकार

पुलिस अधिकारी के दावे के बाद जब पीटीआई ने सोमवार को एसएसपी के बयान के बारे में लाहौर पुलिस के प्रवक्ता फरहान शाह से बात की तो उन्होंने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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सेम है हत्या का पैटर्न: गृह मंत्री

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सोमवार को सरफाज तांबा की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने की आशंका जताई है. 

उन्होंने सोमवार को मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि पिछले दिनों कुछ हत्या की घटनाओं में भारत सीधे तौर पर शामिल था. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और इस स्तर पर तांबा मामले में भारत की संलिप्तता के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. हालांकि, उन्हें भारत की संलिप्तता संदेह है, क्योंकि पिछले दिनों हुई हत्याओं और इसका एक जैसा पैटर्न है. 

यह भी पढ़ें: सरबजीत के गुनहगार को भारत ने निपटाया? पाकिस्तान के मंत्री का आया बयान

2 अज्ञात के खिलाफ दर्ज की FIR

बता दें कि रविवार दोपहर को पुराने लाहौर के धनी आबादी वाले इलाके सनंत नगर में दो अज्ञात हमलावरों ने तांबा को उनके घर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी. तांबा के खून से लथपथ शव की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं. पुलिस ने सरफराज तांबा के छोटे भाई जुनैद सरफराज की शिकायत पर दो अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. 

FIR के अनुसार, जुनैद सरफराज ने कहा कि वह और उनके बड़े भाई अमीर सरफराज तांबा, जो लगभग 40 वर्ष के थे. घटना के वक्त सनंत नगर स्थित अपने घर पर मौजूद थे.

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यह भी पढ़ें: दो हत्यारे, 3 गोलियां और भारत के दुश्मन का काम तमाम... 11 साल बाद ऐसे हुआ सरबजीत सिंह के हत्यारे अमीर सरफराज का खात्मा

लाहौर कोर्ट ने किया हत्यारों को बरी

साल 2013 में सरफराज तांबा और उसके साथी मुदस्सर ने मौत की सजा पाए सरबजीत की लाहौर की कोट लखपत जेल में हमला कर दिया था. जिससे उनकी मौत हो गई थी. 2018 में लाहौर सत्र न्यायालय ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए सरबजीत के हत्यारों को बरी कर दिया था.

अनजाने में पहुंचे थे सीमा पार

सरबजीत सिंह को 1990 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. सरबजीत सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के रहने वाले ‍किसान थे. 30 अगस्त 1990 को वह अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में पहुंच गए थे. जहां पाकिस्तानी सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. हालांकि, भारत में सरबजीत के परिवार का कहना है कि वह अनजाने में सीमा पर चले गए थे.

सरबजीत की बहन ने लड़ी लंबी लड़ाई

खुद को बेगुनाह बताते हुए सरबजीत ने एक चिट्ठी में लिखा था कि 'मैं एक बहुत ही गरीब किसान हूं और मेरी गिरफ्तारी गलत पहचान की वजह से की गई है. 28 अगस्त 1990 की रात मैं बुरी तरह शराब के नशे में धुत था और चलता हुआ बॉर्डर से आगे निकल गया.मैं जब बॉर्डर पर पकड़ा गया तो मुझे बेरहमी से पीटा गया. मैं इतना भी नहीं देख सकता था कि मुझे कौन मार रहा है. मुझे चेन में बांध दिया गया और आंखों पर पट्टी बांध दी गई'. उनकी बहन दलबीर कौर ने पाकिस्तान से उनकी रिहाई के लिए लंबी लड़ाई लड़ी थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.

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