
एक समय था, जब पाकिस्तान में परवेज मुशर्रफ की तूती बोला करती थी. उन्होंने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख से लेकर राष्ट्रपति जैसे पदों को अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए बखूबी भुनाया. वह जब तक सत्ता में रहे, कश्मीर शब्द उनकी जुबान से नहीं उतरा. कह सकते हैं कि वह कश्मीर को लेकर ऑब्सेस्ड थे. लंबी बीमारी से दुबई में उनके निधन के बाद कश्मीर और मुशर्रफ से जुड़े इतिहास के वो पन्ने फिर से चर्चा में आ गए हैं, जो कभी दोनों मुल्कों में खूब सुर्खियां बटोरा करते थे.
मुशर्रफ का कश्मीर ऑब्सेशन किसी से छिपा हुआ नहीं था. ऐसा ही एक वाकया साल 1999 का है, उस समय मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे और नवाज शरीफ मुल्क के प्रधानमंत्री. उस साल रमजान के इफ्तार पर मुशर्रफ ने कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों को इनवायट किया था. इन पत्रकारों में पाकिस्तान के एक बेहद कद्दावर पत्रकार मोहम्मद जियाउद्दीन भी थे.
तीन दिन में कश्मीर पर कब्जे का दावा
इस बैठक में मुशर्रफ ने दावा किया कि अगर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ उन्हें मंजूरी दें तो वे सिर्फ तीन दिन में कश्मीर पर कब्जा कर लेंगे. इसके लिए बकायदा मुशर्रफ ने रोडमैप भी साझा किया कि वे किस तरह से सड़कों को बंद कर उन मुख्य पहाड़ियों को फतह कर लेंगे और महज तीन दिन में कश्मीर उनके कब्जे में होगा.
इस बैठक में पाकिस्तान के एक और पत्रकार हामिद मीर भी शामिल थे, जिन्होंने बाद में इस पूरे घटनाक्रम का ब्योरा सार्वजनिक किया. मीर ने बताया कि मुशर्रफ इस बैठक में बड़े जोश-खरोश के साथ अपना प्लान बता रहे थे. लेकिन उनके बगल में बैठे अपने बेखौफ अंदाज के लिए लोकप्रिय वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद जियाउद्दीन भड़क गए और उन्होंने मुशर्रफ को आईना दिखाते हुए कहा कि आप पाकिस्तान की कौम को तो फतह कर सकते हैं. लेकिन कभी कश्मीर पर फतह नहीं कर पाएंगे.
मीर साहब की जुबानी इस दौरान मुशर्रफ और जियाउद्दीन के बीच बिल्कुल ठन सी गई थी. एक तरफ मुशर्रफ अपने प्लान का खाका पेश कर रहे थे कि वे किस तरह कश्मीर पर कब्जा करेंगे. तो वहीं, जियाउद्दीन उनके हर एक दावे की पोल खोल रहे थे. वह जियाउद्दीन से इतने खफा हो गए थे, कहा जाता है कि उसके बाद उन्होंने जियाउद्दीन से कभी बात नहीं की.
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद जियाउद्दीन को बेहद तेज-तर्रार और अपनी कलम से वफादारी करने वाले पत्रकार के तौर पर जाना जाता है. उनके बारे में मशहूर है कि उन्होंने जहां-जहां काम किया, वहां इस्तीफा मेज की दराज में रखकर काम किया. वह सत्ता से बेखौफ होकर सवाल पूछने के लिए मशहूर थे. 1999 की जिस बैठक में मुशर्रफ ने कश्मीर पर तीन दिन में कब्जे का दावा किया था.
उस बैठक में मौजूद जियाउद्दीन ने आग बबूला होकर मुशर्रफ से कहा था कि आप पाकिस्तान जीत सकते हैं. लेकिन कश्मीर पर कभी फतह हासिल नहीं कर पाएंगे. उनका ऐसा बोलते ही मुशर्रफ गुस्से से लाल हो गए थे लेकिन जियाउद्दीन कहां डरने वाले थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मुशर्रफ के सामने एक-एक फैक्ट रखकर उन्हें आईना दिखाया था.
बेनजीर भुट्टो के सामने भी रखा था कश्मीर कैप्चर प्लान
13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद को इसका जिम्मेदार ठहराया था. इस हमले का आफ्टर इफैक्ट यह हुआ कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया. इसके बाद मुशर्रफ को कहना पड़ा कि वह अपनी धरती पर आतंकवाद को पनपने नहीं देंगे. लेकिन साथ में यह भी कहा कि कश्मीर पर पाकिस्तान का हक है.
एस. पॉल कपूर ने 2007 में आई अपनी किताब डेंजरेस डेटेरंट: न्यूक्लियर वेपन्स प्रोलिफेरेशन एंड कॉन्फ्लिक्ट इन साउथ एशिया में बताया है कि 1988-1989 में मुशर्रफ ने पाकिस्तान की तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के सामने कारगिल पर कब्जा करने की योजना पेश की थी. लेकिन भुट्टो उससे सहमत नहीं थी. बाद में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने लाहौर में एक रैली के दौरान बताया था कि बेनजीर भुट्टो सौहार्दपूर्ण तरीके से कश्मीर समस्या का हल निकालना चाहती थी. बेनजीर ने 1990 में भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी से इस पर बात भी की थी. लेकिन 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो गई.
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध पर पाकिस्तान की पत्रकार नसीम जेहरा की किताब फ्रॉम कारगिल टू द कूप: इवेंट्स दैट शूक पाकिस्तान में बताया है कि मुशर्रफ लंबे समय से कारिगल को लेकर जो साजिश बुन रहे थे, उन्होंने 1999 में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अंधेरे में रखकर उसे अंजाम दिया. इससे खफा शरीफ ने उन्हें सेना प्रमुख के पद के बर्खास्त कर दिया. लेकिन मुशर्रफ ने उनके ही तख्तापलट की तैयारी कर ली थी.
कारगिल में पाकिस्तान ने भारत को गर्दन से पकड़ा था
1999 का कारगिल युद्ध शायद ही कोई भूल सके. भारत ने भले ही इस युद्ध में पाकिस्तान को चारों खाने चित्त कर दिया था. लेकिन 2013 में कराची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुशर्रफ ने कहा था कि कारगिल युद्ध पाकिस्तानी फौज का सबसे सफल ऑपरेशन रहा है. उन्होंने कहा था कि कारगिल में भारत के खिलाफ लड़ाई पर पाकिस्तान को गर्व होना चाहिए क्योंकि इस युद्ध में पाकिस्तान ने भारत को गर्दन से पकड़ लिया था.
मुशर्रफ का भारत विरोधी एजेंडा
इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि कारगिल युद्ध के बाद कश्मीर में हिंसा बढ़ी. मुशर्रफ अपने एजेंडे से पीछे हटने वाले नहीं थे. इससे पहले वह 2015 में भी यह कबूल कर चुके थे कि पाकिस्तान ने 1990 के दशक में कश्मीर में आतंकवाद को पनपने देने के लिए लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को ट्रेन किया था.
मुशर्रफ ने 2015 में दुनिया न्यूज को दिए एक इंटव्यू के दौरान कहा था कि 1990 के दशक में कश्मीर में आजादी की जंग शुरू हुई थी. उस समय लश्कर और ऐसे 11 से 12 आतंकी संगठनों की स्थापना हुई थी. हमने उन्हें पूरा सपोर्ट किया और उन्हें ट्रेनिंग भी दी क्योंकि वे अपनी जान की कीमत पर कश्मीर में लड़ रहे थे.
मुशर्रफ ने हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसे आतंकियों को दो टूक फ्रीडम फाइटर्स कहा था. यह उन्हीं का बयान है कि हाफिज सईद और लखवी जैसे कश्मीर के फ्रीडम फाइटर्स उस समय नायकों का दर्जा हासिल कर चुके थे. लेकिन बाद में जिहाद की यह लड़ाई आतंकवाद में तब्दील हो गई.
पाकिस्तान के एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में मुशर्रफ ने कहा था कि जिस वक्त वह पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे, उस समय जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में कई हमले किए थे. उन्होंने साफतौर पर कहा था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां जैश-ए-मोहम्मद का इस्तेमाल भारत में हमले कराने के लिए कर रही थी, जिस वजह से उन्होंने इस आतंकी संगठन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.
वह पठानकोट हमले पर भी विवादित बयान दे चुके हैं. मुशर्रफ ने पठानकोट हमले के बाद एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत पर अभी और भी पठानकोट जैसे हमले होते रहेंगे. उन्होंने मोदी सरकार पर बरसते हुए कहा था कि भारत सरकार जो रुख अपना रही है, वह सही नहीं है.
11 अगस्त 1943 को दिल्ली में जन्मे मुशर्रफ का परिवार 1947 में बंटवारे के बाद दिल्ली से कराची चला गया था. यह भी कितनी अजीब विडंबना है कि जिस शख्स का जन्म भारत में हुआ, वह भारत का ही जानी दुश्मन बन गया और उसके लिए ताउम्र जहर उगलता रहा.