
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की 21 वर्षीय कोरियाई-अमेरिकी छात्रा यूंसेओ चुंग ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अपनी निर्वासन रोकने के लिए मुकदमा दायर किया है. चुंग ने फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. उनकी याचिका में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन मानता है कि उनके अमेरिका में होने से उनकी विदेशी नीति बाधित हो रही है.
कोलंबिया यूनिवर्सिटी की छात्रा यूंसेओ चुंग कानूनी तौर पर अमेरिका की स्थायी निवासी हैं. उन्होंने मुकदमा न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में दायर किया है. चुंग ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके स्थायी निवास का दर्जा खत्म किया जा रहा है. 21 वर्षीय चुंग 7 साल की उम्र से अमेरिका में रह रही हैं.
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डिपोर्टेशन एजेंट लगा रहे घर के चक्कर
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का कहना है कि फिलिस्तीन समर्थक छात्रा के अमेरिका में रहने से उनकी विदेशी नीति को नुकसान पहुंचा रहा है. खुद ट्रंप भी इन आरोपों को दोहरा चुके हैं. अमेरिका से जिन लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है उन्हें पहले पुलिस अरेस्ट कर रही है, लेकिन फिलिस्तीन सपोर्टर छात्रा के घर पर अमेरिकी डिपोर्टेशन एजेंट लगातार चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया गया है.
फिलिस्तीन समर्थकों को किया जा रहा डिपोर्ट
यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों को निर्वासित करने की योजना बनाई. उनका आरोप है कि ये प्रदर्शनकारी आतंकी समूह हमास का समर्थन कर रहे हैं, यूएस की विदेश नीति में बाधा डाल रहे हैं और यहूदी विरोधी हैं. हालांकि, कुछ यहूदी समूह भी हैं जो फिलिस्तीन का समर्थन करते हैं और प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं.
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यहूदी समूहों का भी कहना है कि ट्रंप प्रशासन उनके इजरायल की आलोचना और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन को गलत तरीके से यहूदी-विरोधी और हमास का समर्थन बताता है. मानवाधिकार समर्थकों ने सरकार की इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है.
महमूद खलील ने भी दी ट्रंप प्रशासन के फैसले को चुनौती
यूंसेओ चुंग के अलावा कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रदर्शन में महमूद खलील भी शामिल थे, जिन्हें इस महीने गिरफ्तार किया गया और वह भी अपनी गिरफ्तारी को कानूनी चुनौती दे रहे हैं. खलील भी स्थायी निवासी हैं. ट्रंप ने बिना प्रमाण खलील पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिसे खलील ने खारिज किया है.