
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. दोनों नेताओं के बीच पांच साल बाद यह पहली औपचारिक मुलाकात होगी. इससे पहले दोनों नेता साल 2019 में ब्राजील में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे. कजान में मंगलवार शाम एक प्रेस वार्ता में, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर 23 अक्टूबर को होगी. मिस्त्री ने कहा कि द्विपक्षीय बैठक का समय बुधवार को तय होगा.
यह घटनाक्रम पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पेट्रोलिंग को लेकर भारत और चीन के बीच एक नई सहमति बनने के बाद सामने आया है. बता दें कि विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने एक बयान में कहा था कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत और चीन डेमचौक और देपसांग से अपनी सेनाओं को पीछे हटाने और इलाके में फिर से पूर्व की तरह पेट्रोलिंग शुरू करने के लिए सहमत हो गए हैं. उन्होंने कहा था दोनों देशों की सेनाओं ने पेट्रोलिंग शुरू कर दी है और सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया भी आगामी दिनों में शुरू हो जाएगी.
चीन ने अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फिर से वादा खिलाफी कर दी और समझौते का उल्लंघन किया तब क्या होगा? आजतक के इस सवाल के जवाब में विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने कहा, 'पहले डिसइंगेजमेंट होने दीजिए. देखते हैं कि यह जमीनी स्तर पर कैसे आगे बढ़ता है. आपने महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा कि फिर से झड़प की स्थिति ना उत्पन्न हो, इसे रोकने के लिए क्या उपाय हैं. हमारी आशा है और कोशिश है कि जो समझौता हुआ है, उस पर ईमानदारी से अमल किया जाए और ऐसी झड़पों पर रोक लगाई जाए जो पहले हुई हैं. इसके लिए दोनों देशों को लगातार प्रयास करने होंगे ताकि पहले की घटनाएं रिपीट ना हों.'
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समझौते पर भारत के साथ मिलकर करेंगे काम: चीन
चीन ने भी मंगलवार को एलएसी पर तनाव कम करने के लिए भारत के साथ हुए सैन्य समझौते की पुष्टि की. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'प्रासंगिक मामलों पर एक प्रस्ताव पर पहुंचा गया है और इन प्रस्तावों को लागू करने के लिए हम नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेंगे.' भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच मई 2020 से यह गतिरोध चल रहा है और सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो पाया है. हालांकि दोनों पक्ष संघर्ष के कई बिंदुओं से पीछे हट गए हैं.
बता दें कि 15-16 जून, 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए थे. दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जबिक चीन के भी 40 से अधिक सैनिकों की मौत हुई थी. हालांकि, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने आज तक अपने सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. इस घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव काफी बढ़ गया था. दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैन्य तैनाती एलएसअी पर की थी और पेट्रोलिंग सस्पेंड कर दी गई थी. संघर्ष के दो प्रमुख बिंदु डेमचौक और देपसांग थे.
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मई 2020 के बाद से सामान्य नहीं हैं भारत-चीन संबंध
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प दोनों पक्षों के बीच दशकों में सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था. इसके बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई. भारत कहता रहा है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते. अब दोनों देशों के बीच मई 2020 के पहले वाली स्थिति बहाल करने के लिए हुए समझौते के बाद उम्मीद जगी है कि संबंध भी धीरे-धीरे सामान्य होंगे. पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता इस दिशा में एक बड़ी पहल होगी.