
पिछले कुछ समय से शाही घराना लगातार विवादों में रहा. इसी साल की शुरुआत में राजपरिवार के सदस्य प्रिंस हैरी की आत्मकथा स्पेयर रिलीज हुई. इसमें प्रिंस ने परिवार के कई सदस्यों को लेकर बेहद निजी बातें लिखी हैं. यहां तक कि उन्होंने ये भी कबूला कि खुद उनके पिता मजाक में उन्हें किसी और का बेटा कहा करते थे. ये सीधे-सीधे उनकी मां प्रिंसेज डायना पर आरोप था. डायना को लेकर रॉयल पैलेस में पहले भी घमासान होता रहा.
क्या है किताब में?
ब्रिटेन के शाही परिवार के करीबी रहे टॉम क्विन की किताब में कई सनसनीखेज दावे हैं. इसका एक चैप्टर इसी बात पर है कि शाही खानदान से बाहर की बहू लाने पर कैसे उसके साथ फर्क होता रहा. इसके मुताबिक, रॉयल फैमिली की पूर्व सदस्य प्रिंसेस डायना को साल 1981 में प्रिंस चार्ल्स से शादी के पहले फर्टिलिटी टेस्ट से गुजरना पड़ा था. यहां तक कि लगभग 20 साल की राजकुमारी को पता तक नहीं था कि उनकी जांच किस बात के लिए हो रही है. वे इसे रुटीन चेकअप का हिस्सा मानकर चल रही थीं.
इस वजह से बरतते थे सतर्कता
कई इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि फर्टिलिटी नहीं, ये वर्जिनिटी टेस्ट था. बात अस्सी के शुरुआती समय की है. तब दुनिया से ब्रिटिश राजशाही का सूरज डूबा ही डूबा था. रॉयल पैलेस तब भी आम लोगों की पहुंच से उतना ही दूर था, जितना कोई दूसरा राजघराना. ऐसे में शाही परिवार से अलग किसी आम परिवार की बहू लाते हुए काफी सतर्कता बरती जाती. हर बात की खूब देखभाल होती. यहां तक कि लड़की शादी से पहले यौन तौर पर एक्टिव न हो, ये भी देखा जाता. एक तरह से ये ब्रांड ब्रिटेन बनाए रखने की कोशिश थी.
डायना के अंकल ने किया दावा
डेली मेल और शिकागो ट्रिब्यून ने साल 1993 में लेडी डायना के बारे में लिखा था- रॉयल गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. पिंकर ने 20 साल की इस युवती को वर्जिन ब्राइड कहा, जो बिल्कुल अछूती थी. सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड ने साल 2002 में एक लंबी-चौड़ी रिपोर्ट इसी पर की थी कि कैसे डायना को राजपरिवार से अलग माना गया. उसमें लिखा था कि डायना स्पेंसर की प्रिंस चार्ल्स से शादी होने वाली थी, तभी खबर आई कि उनका एक गायनेकोलॉजिकल टेस्ट होगा. डायना के अंकल लॉर्ड फर्माय इसपर नाराज हो गए और कहा- डायना के बारे में मैं आश्वस्त करता हूं कि उसका कोई प्रेमी नहीं रहा. वे बोनाफाइड (प्रामाणिक तौर पर) वर्जिन हैं.
ये बात प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई थी. इसके बाद डायना की कई तस्वीरें आईं, जिसमें वे शर्मीली मुस्कान दे रही हैं. लोग उन्हें शाय डाय बुलाने लगे. ये एक तरह से उनके अनछुए होने पर मुहर थी.
खास अच्छे नहीं थे रिश्ते
शाही परिवार से अलग अपने नियम बनाने वाली इस राजकुमारी से राजघराना कभी भी खुश नहीं रहा. कई मौकों पर ये तनाव खुलकर सामने आया. कार हादसे में प्रिंसेज की मौत के पीछे भी कई कंस्पिरेसी थ्योरीज चलती हैं, जो मानती हैं कि शाही घराने के ही किसी सदस्य ने ऐसा करवाया. ये भी कहा जाता है कि मौत के समय डायना प्रेग्नेंट थीं और अपने नए रिश्ते का खुलासा करना चाहती थीं. हालांकि जांच में इस तरह की कोई बात निकलकर नहीं आई.
केट मिडलटन की शादी पर क्या हुआ?
पूरे 30 साल बाद साल 2011 में डायना के बेटे प्रिंस विलियम की शादी होने वाली थी. इस दौरान ब्रिटिश मीडिया में वापस कानाफूसी होने लगी. जैसे 3 दशक पहले सास की वर्जिनिटी का एलान हुआ था, वैसा क्या एक बार फिर होगा. कई जगहों पर लिखा जाने लगा कि विलियम और केट लगभग 8 सालों से रिश्ते में है, ऐसे में कम से कम ये टेस्ट तो नहीं होना चाहिए. केट का ये टेस्ट शायद न हुआ हो, लेकिन इस बात की मेडिकल जांच हुई कि वे मां बन सकती हैं.
किताब के लेखक का दावा है कि केट का भी फर्टिलिटी टेस्ट हुआ था क्योंकि शाही घराने के लिए ये जानना जरूरी होता है कि आने वाली बहुएं उन्हें वारिस दे सकेंगी.
जापान का शाही परिवार भी करता है भेदभाव
ब्रिटेन के राजपरिवार के अलावा जापानी शाही खानदान पर भी दकियानूसी होने के आरोप लगते रहे. इंपीरियल हाउस लॉ के अनुसार राजकुमारियों के बाहरी लोगों से शादी करने पर उनकी पदवी छीन ली जाती है. कई राजकुमारियों ने शाही परिवार के भीतर कोई वर न मिलने के कारण शादी नहीं की. वहीं कुछ आम लोगों से जुड़ने के कारण शाही परिवार से निकाल दी गईं. वहीं राजकुमारों के लिए ये नियम लागू नहीं होता है. वे आम लड़की से शादी करके उसे परिवार का हिस्सा बना सकते हैं. हालांकि साल 1965 से 2006 तक जापान के राज परिवार में एक भी लड़के का जन्म नहीं हुआ, जिसके बाद लोगों में डर बैठ गया कि अब शायद इंपीरियल पैलेस खत्म होने वाला है.
लगभग 41 साल बाद एक प्रिंस के जन्म पर देश को कुछ तसल्ली हो सकी. हालांकि वहां लगातार ये बहस चल रही है कि शाही परिवार को लड़की-लड़के का भेद खत्म करने की जरूरत है. इससे राजगद्दी पर रॉयल ब्लडलाइन से कोई भी बैठ सकेगा.