
दुनिया में सबसे शक्तिशाली समुद्री डाकू कौन हुआ? इसके जवाब में लॉन्ग जॉन सिल्वर या ब्लैक बियर्ड का नाम ही ध्यान में आता है. लेकिन सच तो यह है कि दुनिया में सबसे ताकतवर समुद्री लुटेरा कोई पुरुष नहीं बल्कि एक महिला थी. उसका नाम सुनकर ही दक्षिण चीन सागर में व्यापार और सफर करने वाले खौफ खाते थे.
1800 से अधिक जहाज और 80 हजार लुटेरों पर राज
इस समुद्री डाकू का नाम था झेंग यी साओ (सन 1775-1844) जिसे पहले "चिंग शिह (Ching Shih)" के नाम से भी जाना जाता है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 1800 से अधिक लुटेरे जहाज और 80 हजार लुटेरों पर राज करने वाली चिंग दुनिया की सबसे शक्तिशाली समुद्री डाकू हुई. वहीं इसकी तुलना में ब्लैक वीयर्ड के पास केवल 4 जहाज और 300 लुटेरे थे.
जन्म से ही गरीबी ने वैश्यैवृति में ढकेल दिया
चिंग शिह का जन्म 1775 में दक्षिणपूर्व चीन के गुआंग्डोंग प्रांत के गरीबी से जूझ रहे समाज में शिह यांग के रूप में हुआ था. चिंग जवान हुई तो परिवार की जरूरतों और गरीबी ने उसे वैश्यैवृति में ढकेल दिया. वह कैंटोनीज बंदरगाह शहर में एक Floating Brothel (तैरते वेश्यालय) में काम करती थी, जिसे फ्लावर बोट भी कहा जाता था.
बतौर सेक्स वर्कर अपनी सुंदरता, व्यवहार और तेजी के चलते वह जल्दी ही इलाके में प्रसिद्ध हो गईं. उसने शाही दरबारियों, सैन्य कमांडरों और अमीर व्यापारियों जैसे कई हाई-प्रोफाइल कस्टमर्स को आकर्षित किया.
चिंग को दिल दे बैठा कुख्यात समुद्री डाकू
साल 1801 में गुआंग्डोंग में कुख्यात समुद्री डाकू कमांडर झेंग यी (Zheng Yi) की मुलाकात 26 साल की चिंग शीह से हुई. वह उसकी सुंदरता और ग्राहकों से उनके बिजनेस सीक्रेट निकलवाने की की उसकी कला का दीवाना हो गया. अलग-अलग रिपोर्टों में कहा गया है कि वह या तो खुद झेंग यी से शादी को तैयार हो गई थी या फिर झेंग यी के लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था. लेकिन ये साफ है कि चिंग ने झेंग से दो टूक कह दिया था कि अगर वह उससे शादी करेगी तो उसकी कमाई की आधा हिस्सा वह रखेगी. झेंग इसपर राजी हो गया और दोनों ने शादी कर ली. इनके दो बेटे हुए.
शादी होते ही बेड़े में लागू किए कई नए नियम
शादी के बाद से ही चिंग शिह ने रेड फ्लैग फ्लीट में अपने पति की लूट और अंडरवर्ल्ड डीलिंग में पूरी तरह से भाग लिया. उसने बेड़े में कई नियम लागू किये. इनमें आदेशों का पालन करने से इनकार करने वालों के लिए तत्काल फांसी, किसी भी महिला बंदी के बलात्कार के लिए फांसी, पार्टनर से बेवफाई के लिए फांसी और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के लिए फांसी शामिल थे.
महिला बंदियों के कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
चिंग के रहते महिला बंदियों के कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती थी. उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता था, और कमजोर, अनाकर्षक या गर्भवती महिलाओं को जल्द से जल्द छोड़ दिया जाता था, जबकि आकर्षक महिलाओं को बेच दिया जाता था. हालांकि इन महिलाओं को आपसी सहमति से समुद्री डाकू से शादी करने की अनुमति दी जाती थी. दूसरी ओर, वफादारी और ईमानदारी के लिए लुटेरों को इनाम भी दिया जाता था और बेड़े को एकजुट होकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था.
दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री डाकू बेड़ा बना रैड फ्लैग
झेंग यी और चिंग शिह की ज्वाइंट कमांड के तहत, रेड फ्लैग बेड़े का आकार विस्फोट तरीके से बढ़ा. नए नियम कठोर लेकिन निष्पक्ष होने के साथ-साथ अवार्ड सिस्टम का नतीजा ये हुआ कि क्षेत्र के कई समुद्री डाकू समूहों ने खुद को रेड फ्लैग बेड़े में मिला लिया. झेंग यी और चिंग शिह की शादी के समय उनका बेड़ा 200 जहाजों का था जो बढ़कर अगले कुछ महीनों में 1800 जहाजों तक पहुंच गया. इसके साथ ही रैड फ्लैग धरती पर सबसे बड़ा समुद्री डाकू बेड़ा बन गया.
एक लड़के को गोद लिया, फिर उससे ही कर ली शादी
झेंग यी और चिंग शिह ने पास के एक तटीय गांव से चेउंग पो नाम के लगभग 20 साल के एक युवा मछुआरे को गोद लिया. यह कहा जाता है कि चिंग शिह का चेउंग पो के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. चिंग शिह के पति की मृत्यु 1807 में 42 वर्ष की आयु में हो गई. अपने व्यापार की समझ और झेंग यी के संबंधों के जरिए चिंग ने अन्य जहाजों के युद्धरत सत्ता के भूखे कप्तानों को काबू किया और अपने गोद लिए बेटे को बेड़े का नेता बनाया. अपने पति की मृत्यु के दो सप्ताह से भी कम समय के बाद, झेंग यी ने घोषणा की कि वह अपने इसी गोद लिए बेटे से शादी करेगी. चेउंग पो की चिंग के प्रति वफादारी का मतलब था कि चिंग शिह ने रेड फ्लैग फ्लीट पर प्रभावी ढंग से शासन किया.
दक्षिण चीन सागर पर रेड फ्लैग फ्लीट का दबदबा
चिंग शिह के नेतृत्व में, रेड फ्लैग फ्लीट ने नए तटीय गांवों पर कब्जा कर लिया और दक्षिण चीन सागर पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया. पूरा गांव बेड़े के लिए काम करता था और उन्हें सामान और भोजन की सप्लाई करता था और कोई भी जहाज जो दक्षिण चीन सागर को पार करना चाहता था उस पर टैक्स लगाया जाता था. उन्होंने कई बार ब्रिटिश और फ्रांसीसी कोलोनाइजर शिप्स को लूटा. 1809 में रिचर्ड ग्लासपूल नामक ईस्ट इंडिया कंपनी के एक कर्मचारी को फ्लीट ने बंधक बना लिया और 4 महीने तक अपने पास रखा. रिचर्ड ने ही बताया कि उसके अनुमान के अनुसार चिंग शिह की कमान के तहत 80,000 समुद्री डाकू थे.
Qing Dynasty की नौसेना को हराया
चीनी Qing Dynasty स्वाभाविक रूप से रैड फ्लैग फ्लीट का अंत चाहता था. मेंड्रिन नौसेना के जहाजों को दक्षिण चीन सागर में रेड फ्लैग बेड़े का सामना करने के लिए भेजा गया था. कुछ ही घंटों में मेंड्रिन नौसेना को रेड फ्लैग बेड़े ने हरा दिया. चिंग शिह ने घोषणा की कि अगर मेंड्रिन नौसेना रेड फ्लैग बेड़े में शामिल हो जाए तो उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा. नतीजा ये हुआ कि, रेड फ्लैग बेड़े का आकार बढ़ गया और किंग राजवंश ने अपनी नौसेना का एक बड़ा हिस्सा खो दिया.
पुर्तगालियों के हाथों से मिली हार
चीन के सम्राट को ये बात चुभ रही थी कि एक महिला भूमि, समुद्र, लोगों और संसाधनों के इतने बड़े हिस्से पर कंट्रोल करती जा रही है जो उनका था. उन्होंने रेड फ्लैग फ्लीट के सभी समुद्री डाकुओं के साथ शांति का प्रस्ताव रखा. उसी समय, बेड़े पर पुर्तगाली नौसेना का हमला हुआ. हालाँकि पुर्तगाली पहले भी दो बार हार चुके थे, फिर भी वे जहाजों और हथियारों की बेहतर सप्लाई के साथ तैयार होकर आए थे. इस बार रैड फ्लैग तबाह हो गया. आखिरकार चिंग शिह 1810 में चीनी सरकार से शांति की पेशकश स्वीकार करके रिटायर हो गई.
अच्छी शर्तों पर हुआ रेड फ्लैग फ्लीट का अंत
रेड फ्लैग फ्लीट के पूरे दल को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा. हालांकि, आत्मसमर्पण की शर्तें अच्छी थीं. उन्हें अपनी सारी लूट रखने की इजाजत दी गई थी, और कई समुद्री डाकुओं को सेना और चीनी सरकार में नौकरियां दी गई थीं. यहां तक कि चिंग शिह का गोद लिया बेटा चेउंग पो भी बाद में किंग राजवंश की गुआंग्डोंग नौसेना का कप्तान बन गया.
जिंदगी के आखिरी दिनों में खोला वैश्यालय
चिंग शिह को 1813 में तीसरे पति से एक बेटा हुआ और बाद में एक बेटी हुई. 1822 में उसके पति की समुद्र में जान चली गयी. फिर वह अपने बच्चों के साथ मकाऊ चली गयी. यहां उसने एक जुआ घर खोला, और नमक के व्यापार में भी शामिल हो गई. अपने जीवन के अंत में, उसने मकाऊ में एक वेश्यालय भी खोला.
चिंग के वंशज आज भी चलाते हैं वैश्यालय
69 वर्ष की आयु में परिवार के बीच उसकी मौत हो गई. कहा जाता है कि उसके वंशज उसी क्षेत्र में आज भी इसी तरह के जुए और वेश्यालय का बिजनेस चलाते हैं. चिंग को फिल्म, टेलीविजन, मंगा और लोककथाओं में इतिहास की सबसे डरावनी और सफल समुद्री डाकुओं में से एक के रूप में याद किया जाता है.