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यूक्रेन को चुकानी होगी कीमत! न्यूक्लियर चीफ की हत्या ने पुतिन को दे दिया अटैक का मौका?

यूक्रेन दरअसल इगोर को युद्ध अपराधी मानता है. यूक्रेन का मानना है कि इगोर कई बार खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल उनके देश के खिलाफ कर चुका है. रूस के न्यूक्लियर प्रोग्राम से पहले वह देश के रेडिएशन, केमिकल और जैविक हथियारों जैसे विभागों की कमान भी संभाल चुके हैं.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:12 AM IST

रूस की राजधानी मॉस्को में राष्ट्रपति भवन से महज सात किलोमीटर दूर पुतिन के बेहद करीबी और न्यूक्लियर प्रोग्राम चीफ की हत्या ने तहलका मचा दिया है. पुतिन खफा हैं क्योंकि यूक्रेन ने बेहद सटीक प्लानिंग के साथ इगोर किरिलोव का कत्ल किया. ऐसे में फिर से कयास लगने लगे हैं कि क्या इस घटना से तिलमिलाए पुतिन यूक्रेन पर न्यूक्लियर अटैक करने से भी नहीं हिचकेंगे?

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मॉस्को में तड़के लगभग छह बजे रूस के न्यूक्लियर प्रोग्राम के चीफ इगोर अपने असिस्टेंट के साथ अपार्टमेंट से बाहर निकले. वह कुछ ही दूर चले होंगे कि वहां पास में खड़े स्कूटर में ब्लास्ट हो गया. दोनों ही मौके पर ही मौत हो गई. इससे पहले कि इस घटना पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू होती यूक्रेन की सीक्रेट सर्विस ने हमले की जिम्मेदारी ले ली.

यूक्रेन ने क्यों उठाया ये कदम?

यूक्रेन दरअसल इगोर को युद्ध अपराधी मानता है. यूक्रेन का मानना है कि इगोर कई बार खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल उनके देश के खिलाफ कर चुका है. रूस के न्यूक्लियर प्रोग्राम से पहले वह देश के रेडिएशन, केमिकल और जैविक हथियारों जैसे विभागों की कमान भी संभाल चुके हैं. ब्रिटेन यूक्रेन में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर इगोर पर बैन भी लगा चुके हैं. 

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क्या जेलेंस्की ने खोद ली अपनी कब्र?

इगोर किरिलोव सिर्फ रूस के न्यूक्लियर प्रोग्राम के चीफ ही नहीं थे बल्कि वह पुतिन के करीबी और उनके सिपहसालार भी थे. पुतिन उन पर अथाह भरोसा करते थे. वह उन चंद लोगों में शामिल थे, जो पुतिन से सीधे संपर्क में थे. यूक्रेन के खिलाफ रूस की रणनीति में इगोर केंद्रीय भूमिका में थे.

रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इगोर की हत्या से पुतिन बौखलाए हुए हैं. रूस के एक सरकारी टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपनी कब्र खुद खोद ली है. ऐसे में कयास लग रहे हैं कि इस हमले का बदला लेने के लिए पुतिन किसी भी हद तक जा सकते हैं.

क्या पुतिन देंगे न्यूक्लियर अटैक की मंजूरी?

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समय दुनियाभर में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उन्हें देखकर लगता है कि तीसरे विश्व युद्ध का वक्त अब बहुत दूर नहीं है. जानकारों का कहना है कि रूस की नई परमाणु नीति से तीसरे विश्व युद्ध का खतरा बढ़ा है. यही वजह है कि डरे हुए नाटो देशों ने अपने नागरिकों को पर्चे जारी किए हैं और उन्हें युद्ध की तैयारी करने की सलाह दी है.

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रूस ने नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि अगर गैर-परमाणु देश किसी न्यूक्लियर पावर वाले देश के सपोर्ट से हमला करता है तो इसे रूस के खिलाफ जंग माना जाएगा. रूस के खिलाफ बैलिस्टिक मिसाइल का जवाब परमाणु हमले से दिया जाएगा.

रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पुतिन के करीबी दिमत्री मेदवेदेव ने तीसरे विश्व युद्ध की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि रूस के खिलाफ दागी गईं मिसाइलों को हमला माना जाएगा. इसके जवाब में रूस, यूक्रेन और नाटो के ठिकानों पर अटैक कर सकता है. इसका मतलब है कि तीसरे विश्व युद्ध का समय आ गया है. रूस का कहना है कि अमेरिका की निवर्तमान सरकार अब युद्ध को भड़काना चाहती है. राष्ट्रपति पुतिन ने सितंबर में ही साफ कर दिया था कि रूस के खिलाफ मिसाइलों के इस्तेमाल का मतलब रूस और नाटो का युद्ध होगा.

रूस में बन रहा न्यूक्लियर प्रतिरोधक बंकर

रूस ने मोबाइल बम शेल्टर बनाना शुरू कर दिया है. ये परमाणु विस्फोट से उत्पन्न होने वाली तरंगों और विकिरण समेत विभिन्न प्रकार के खतरों से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं. इमरजेंसी मिनिस्ट्री के अनुसंधान संस्थान ने कहा, 'KUB-M' शेल्टर प्राकृतिक और मानव निर्मित खतरों से 48 घंटे तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है. पारंपरिक हथियारों से होने वाले विस्फोट और छर्रे, इमारतों से गिरने वाला मलबा, खतरनाक रसायन और आग से बचाव किया जा सकता है.

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'KUB-M' एक मजबूत शिपिंग कंटेनर की तरह दिखता है और इसमें दो मॉड्यूल हैं. 54 लोगों के लिए एक कमरा और एक तकनीकी ब्लॉक. संस्थान ने कहा, ज़रूरत पड़ने पर और मॉड्यूल जोड़े जा सकते हैं. माना जा रहा है कि N-Resistant मोबाइल बंकर न्यूक्लियर अटैक होने की स्थिति के लिए तैयार किए जा रहे हैं. हालांकि, रूस ने यह साफ नहीं किया है.

बता दें कि रूस एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है. रूस को दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार संपन्न देशों में गिना जाता है. जबकि यूक्रेन ने अपना पूरा परमाणु भंडार छोड़ दिया है. यूक्रेन 1994 में अपने परमाणु शस्त्रागार को छोड़ने पर सहमत हुआ था, जो उस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा और सोवियत संघ से विरासत में मिला था, लेकिन यूक्रेन को अमेरिका समेत कई परमाणु शक्तियों का समर्थन प्राप्त है. 

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