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दुनिया की सबसे दिलकश रानी क्लियोपेट्रा को लेकर गहराया रहस्य, क्या मिस्र पर राज कर चुकी क्वीन अफ्रीका से थीं?

मौत के लगभग 2 हजार साल बीतने के बाद भी क्वीन क्लियोपेट्रा का जादू टूट नहीं रहा. कहा जाता है कि क्लियोपेट्रा दुनिया की सबसे हसीन रानी थीं, जो उतनी ही पैनी राजनीति भी जानती थीं. फिलहाल मिस्र की इस रानी पर एक बार फिर बात हो रही है, जिसकी वजह है नेटफ्लिक्स पर क्वीन क्लियोपेट्रा पर आई सीरीज. इसमें रानी को अफ्रीकी नैन-नक्श वाला दिखाया गया है.

क्वीन क्लियोपेट्रा को अधिकतर लोग मिस्र की रानी ही मानते रहे. सांकेतिक फोटो (Pixabay) क्वीन क्लियोपेट्रा को अधिकतर लोग मिस्र की रानी ही मानते रहे. सांकेतिक फोटो (Pixabay)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

मिस्रवासियों का कहना है कि उनकी रानी हल्के रंग और इजीप्ट के चेहरे-मोहरे वाली थीं. ऐसे में उनका रंग बदल देना देश की पहचान से खिलवाड़ जैसा है. सोशल मीडिया पर तो लोग गुस्सा जता ही रहे हैं, वहां के एक वकील ने इसी बात पर अपने देश में नेटफ्लिक्स को बैन करने तक की अपील कर दी. महमूद अल-सेमरी नाम के वकील ने याचिका में कहा कि शो बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए क्योंकि वे उनके देश की पहचान मिटाने की साजिश रच रहे हैं. 

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क्लियोपेट्रा को लेकर ये पहला बवाल नहीं

अक्सर मिस्र के लोग कहते हैं कि वो गोरी चमड़ी की और दुनिया की सबसे दिलकश रानी थीं. तो कई तर्क ये हैं कि क्लियोपेट्रा अफ्रीकी मूल से रही होंगी. यहां तक कि उन्हें बेहद सुंदर की बजाए औसत चेहरे वाली महिला भी कहा जा चुका. ऐसे में मिस्र के लोग इसे पश्चिमी साजिश तक मानने लगे हैं ताकि उनकी पहचान एक-एक कर छिनती जाए. 

क्या है रहस्यमयी क्वीन का सच? 

माना जाता है कि रानी ने 51 ईसा पूर्व से 30 ईसा पूर्व तक मिस्र पर शासन किया था. वह मिस्र पर राज करने वाली आखिरी फराओ थीं. अपने लगभग 20 साल के शासन के दौरान रानी ने देश की इकनॉमी को तो मजबूत किया है, कल्चरल तौर पर भी उसमें कई रंग जुड़े. इसकी एक वजह ये मानी जाती है कि क्वीन खुद कई लैंग्वेज जानने वाली और दुनियाभर के लोगों से मेल-मुलाकात पसंद करने वाली थीं. ऐसे में देश सांस्कृतिक तौर पर और मजूबत हुआ. 

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सांकेतिक फोटो (Netflix)

लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनकी खूबसूरत की

क्वीन क्लियोपेट्रा के बारे में कहते हैं कि वो दुनिया की सबसे हसीन रानी रहीं, जिनके बस में बड़े-बड़े शासक हो जाया करते थे. ग्रीक बायोग्राफर प्लूटार्क ने उनकी मौत के लगभग एक सदी बाद लिखा था कि जितना बताया जाता है, वो उतनी सौंदर्यमयी नहीं थीं. ऐसा भी नहीं था कि जो भी उन्हें देखता, बस देखता ही रह जाता था. हां लेकिन ये बात जरूर थी कि उनमें अद्भुत आकर्षण था. उनके बोलने और देखने का अंदाज भी बांध लेने वाला था. कोई इससे बच नहीं सकता था. 

सुंदरता बनाए रखने के लिए गधी के दूध से स्नान!

रानी क्लियोपेट्रा की खूबसूरती को लेकर अलग-अलग बातें होने लगीं. कहा जाने लगा कि वो गधी के दूध में नहाया करतीं ताकि सौंदर्य बना रहे. बालों और शरीर पर इत्र लगाने के लिए रानी की सेविकाएं दिन-रात काम करती थीं. फूलों और जड़ी-बूटियों से इत्र बनाया जाता था. लेकिन इन सारी बातों का कोई प्रमाण नहीं है. बल्कि इन्हें मिथक ही माना जाता है क्योंकि रानी ने अपना बड़ा समय देश के विकास में लगाया था.

सांकेतिक फोटो (Netflix)

इस लेखक पर लगा झूठ फैलाने का आरोप

ग्रीक लेखक प्लिनी द एल्डर ने अपनी किताब नेचुरल हिस्ट्री में जिक्र किया था कि क्वीन रोज गधी के दूध में 300 गुलाब के फूल डालकर स्नान करती थीं. इसके बाद से ये बात चल पड़ी. हालांकि इतिहासकार ये भी मानते हैं कि प्लिनी द एल्डर को क्लियोपेट्रा से चिढ़ थी क्योंकि वो बेहद राजसी शौक रखतीं. शायद ये भी वजह हो, जिसके कारण प्लिनी ने बात को बढ़ा-चढ़ाकर लिखा हो. 

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सिक्कों ने बदली सोच

क्लियोपेट्रा की खूबसूरती को तब चुनौती मिली, जब साल 2020 में उनके एलेक्जेंड्रिया शहर के आसपास शाही सिक्के मिले. इन सिक्कों पर बने चेहरे में रानी की नाक और आंखें खूबसूरती के लिहाज से वैसी नहीं थीं, जैसा आज तक बताया जाता रहा. टैपोसिरिस मैग्ना मंदिर के पास  मिले इन सिक्कों के दूसरी ओर ग्रीक भाषा में क्लियोपेट्रा लिखा हुआ था, जिससे तय है कि चेहरा रानी का ही रहा होगा.

ये भी हो सकता है कि क्लियोपेट्रा सुंदर तो रही हों, लेकिन उस दौर में सुंदरता के मायने अलग रहे हों. जैसे सौंदर्य और प्रेम की देवी एफ्रोडाइट को भी आज के हिसाब से कतई खूबसूरत नहीं कहा जा सकेगा, लेकिन तब के समय में वे सौंदर्य का पैमाना थीं. 

सांकेतिक फोटो (Getty Images)

अफ्रीकी मूल का माना जाने लगा

अब लौटते हैं, इस सवाल पर कि क्यों मिस्र के लोग रानी के अफ्रीकी दिखने पर बौखलाए हुए हैं. क्लियोपेट्रा कहां की थीं, इसपर भी अक्सर विवाद होता रहा. मिस्र के लोग उन्हें अपनी रानी मानते हैं क्योंकि उन्होंने लंबे दौर तक वहां शासन किया. देश के सिक्कों से लेकर लोककथाओं में भी उनका जिक्र मिलता है. वहीं कई बार उन्हें यूनानी मूल का कहा जाता है. यहां तक तो ठीक था, लेकिन असल मुश्किल तब हुई, जब कुछ इतिहासकार उन्हें अफ्रीका से जुड़ा बताने लगे. 

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दरअसल तुर्की के इफेसस में जो अवशेष मिले, उनकी स्टडी के बाद एक्सपर्ट इस बात पर राजी हुए कि वहां क्वीन क्लियोपेट्रा की बहन राजकुमारी अरसीनोई का शव रखा रहा होगा. इसके बाद एक के बाद एक खुलासे होते चले गए. वहां शोध कर रहे ऑस्ट्रेलियाई पुरातत्वविद हाइक थुयेर ने कहा कि राजकुमारी अरसीनोई और क्लियोपेट्रा की मां अफ्रीकी मूल से थीं. हालांकि ये बात भी साबित नहीं हो सकी क्योंकि बहुत से लोग तर्क करने लगे कि हो सकता है दोनों सौतेली बहनें रही हों.

तो इस तरह क्लियोपेट्रा मिस्र की रानी होकर भी पूरी तरह से मिस्र की नहीं हो सकीं. अब फिल्मों और डॉक्युमेंट्रीज में भी उनकी नस्ल को लेकर ये प्रयोग हो रहे हैं.

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