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स्वीडन में ईद पर मस्जिद के सामने जलाई गई कुरान! सऊदी, तुर्की समेत भड़के ये मुस्लिम देश

ईद के मौके पर स्वीडन में एक मस्जिद के सामने कुरान जलाने का मामला सामने आया है. इस पर सऊदी अरब, तुर्की, मोरक्को समेत कई मुस्लिम देश भड़क गए हैं. सऊदी अरब ने इस घटना को जघन्य अपराध करार दिया है तो मोरक्को ने विरोध में स्वीडन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

स्वीडन में कुरान जलाए जाने पर तुर्की और सऊदी भड़क गए हैं (Photo- Reuters) स्वीडन में कुरान जलाए जाने पर तुर्की और सऊदी भड़क गए हैं (Photo- Reuters)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2023,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

स्वीडन में बकरीद के मौके पर कुरान जलाने जाने की घटना को लेकर इस्लामिक देशों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. स्वीडन में बुधवार को स्टॉकहोम सेंट्रल मस्जिद के सामने 37 साल के एक शख्स ने कुरान को फाड़कर उसमें आग लगा दी थी. शख्स ने यह काम लगभग 200 लोगों की मौजूदगी में किया जिनमें से कई लोग कुरान जलाए जाने का समर्थन कर रहे थे. ईद-उल-अजहा की छुट्टियों में मस्जिद के सामने कुरान जलाए जाने की घटना पर सऊदी अरब, तुर्की, मोरक्को जैसे मुस्लिम देशों के साथ-साथ मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने भी भारी नाराजगी जाहिर की है.

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स्टॉकहोम सेंट्रल मस्जिद के सामने कुरान जलाने वाले शख्स का नाम सलवान मोमिका है जो सालों पहले इराक से भागकर स्वीडन आ गया था. स्वीडन के अधिकारियों से कुरान को लेकर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मिलने के बाद मोमिका ने बुधवार को कुरान जलाने के काम को अंजाम दिया.  

शख्स का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें मोमिका सिगरेट का धुआं उड़ाते हुए कुरान की एक प्रति को हवा में उछालते दिख रहा है. इसके बाद वो कुरान को फाड़कर उसे आग के हवाले कर देता है. वो स्वीडन का झंडा लहराता हुआ भी दिख रहा है.

वहां उपस्थित कुछ लोग कुरान जलाने के विरोध में अरबी भाषा में 'अल्लाह महान है' चिल्ला रहे थे तो कुछ लोग कुरान जलाए जाने के समर्थन में भी नारे लगा रहे थे. 

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कुरान जलाए जाने पर भड़का सऊदी अरब

इस्लामिक देश सऊदी अरब ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है. सऊदी के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के घृणित कृत्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा, 'इन घृणित और बार-बार गए जा रहे कृत्यों को किसी भी औचित्य के साथ स्वीकार नहीं किया जा सकता है. ऐसे कृत्य स्पष्ट रूप से नफरत और नस्लवाद को उकसाते हैं. ये सहिष्णुता, संयम और चरमपंथ खत्म करने के मूल्यों को आगे बढ़ाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के विरुद्ध हैं. ऐसे कृत्य नागरिक और देश के बीच के संबंधों में पारस्परिक सम्मान को कम करते हैं.'

तुर्की भी भड़का

स्वीडन में कुरान के कथित अपमान की घटनाओं से तुर्की हमेशा से नाराज रहा है. इसी कारण वो स्वीडन के नेटो में शामिल होने के रास्ते में रोड़ा भी बनता रहा है. अब एक बार फिर स्वीडन में कुरान जलाने की घटना से तुर्की नाराज हो गया है. कुरान जलाए जाने को जघन्य कृत्य करार देते हुए तुर्की के विदेश मंत्री ने इसकी कड़ी आलोचना की है.

उन्होंने एक बयान में कहा, 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस तरह के इस्लाम विरोधी कृत्यों को अंजाम देने की अनुमति देना अस्वीकार्य है. इस तरह के जघन्य कृत्यों को अनदेखा करना अपराधी में सहभागी होने की तरह है.'

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तुर्की सरकार के संचार निदेशक फहार्टिन अल्तुन ने एक ट्वीट में कहा, 'हम इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने और यूरोपीय अधिकारियों, विशेष रूप से स्वीडन अधिकारियों की तरफ से हमारे धर्म के प्रति नफरत की लगातार हो रही घटनाओं से थक गए हैं.'

उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा, 'जो लोग नाटो में हमारे सहयोगी बनना चाहते हैं, वे इस्लामोफोबिक आतंकवादियों के इस तरह के विनाशकारी कृत्य को बर्दाश्त नहीं कर सकते.'

मोरक्को ने वापस बुला लिया अपना राजदूत

कुरान जलाए जाने की घटना के विरोध में मोरक्को ने स्वीडन से अपने राजदूत को अनिश्चितकाल के लिए वापस बुला लिया है. मोरक्को के विदेश मंत्रालय ने स्वीडन के राजनयिक (chargé d’affaires) को भी समन किया. मोरक्को ने राजनयिक से इस घटना को लेकर अपना असंतोष जाहिर किया और कहा कि इस तरह की घटनाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने क्या कहा?

मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने एक बयान जारी कर घटना की कड़ी निंदा की है. बयान में लीग के महासचिव शेख मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसान ने कहा है कि यह जघन्य कृत्य मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने वाला है.

बयान में कहा गया, 'पुलिस की सुरक्षा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस तरह के जघन्य अपराध को बार-बार करने पर चरमपंथियों की निंदा करते हैं. सच बात तो यह है कि ऐसे कृत्य स्वतंत्रता की अवधारणा और उसके मानवीय मूल्यों का अपमान करते हैं. अल-ईसा ने इन खतरों के प्रति चेतावनी दी है जो नफरत और धार्मिक भावनाओं को भड़काते हैं और केवल चरमपंथ के एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं.

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इस्लामिक देशों के अलावा अमेरिका ने भी दी प्रतिक्रिया

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता ने कहा है कि धार्मिक किताबों को जलाना दुखद है. उन्होंने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'धार्मिक ग्रंथों को जलाना अपमानजनक और दुखद है. ऐसा करना कानून के मुताबिक सही हो सकता है लेकिन निश्चित रूप से यह उचित नहीं है.'

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्वीडन पुलिस ने बाद में कुरान जलाने वाले शख्स पर एक जातीय समूह के खिलाफ आंदोलन करने का आरोप लगाया है.

स्वीडन के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?

स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घटना स्वीडन के नेटो में शामिल होने की प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करेगी, इसे लेकर वो किसी तरह की अटकलबाजी नहीं करना चाहते हैं.

उन्होंने आगे कहा, 'यह कानूनी है लेकिन उचित नहीं है. इस तरह के विरोध की अनुमति देना पुलिस पर निर्भर था.'

स्टॉकहोम सेंट्रेल मस्जिद के निदेशक और इमाम महमूद खल्फी ने बुधवार को कहा कि ईद उल-अजहा की छुट्टियों में पुलिस ने इस तरह के विरोध प्रदर्शन को अनुमति दी है जिससे मस्जिद के प्रतिनिधि निराश हैं. उन्होंने कहा कि हर साल ईद के लिए मस्जिद में दस हजार से ज्यादा मुसलमान आते हैं.

स्वीडन की आबादी में 8 प्रतिशत मुस्लिम हैं. 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, स्वीडन में करीब 8 लाख मुस्लिम रहते हैं.

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'कुरान को दुनियाभर में प्रतिबंधित कर देना चाहिए',  बोला प्रदर्शनकारी

बुधवार को सीएनएन से बात करते हुए सलवान मोमिका ने कहा कि वो पांच साल पहले इराक से स्वीडन आ गए थे और अब उनके पास स्वीडन की नागरिकता है. उसने बताया कि वह ईश्वर में विश्वास नहीं करता.

उसने आगे कहा, 'इस किताब (कुरान) को दुनियाभर में बैन कर देना चाहिए क्योंकि यह लोकतंत्र, नैतिकता मानवीय मूल्यों, मानवाधिकारों और महिला अधिकारों के लिए खतरा है. इस दौर में यह किताब किसी काम की नहीं है.'

स्वीडन में होती रही हैं इस तरह की घटनाएं

इससे पहले जनवरी के महीने में भी स्टॉकहोम में कुरान जलाने की घटना सामने आई थी. डेनमार्क के एक धुर-दक्षिणपंथी नेता ने कुरान को फाड़कर उसमें आग लगा दी थी जिससे तुर्की काफी नाराज हुआ था और नेटो के आवेदन को लेकर स्वीडन के साथ बातचीत को निलंबित कर दिया था.

नेटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन एक डिफेंसिव मिलिट्री संगठन है जिसमें फिलहाल 31 देश शामिल हैं. इस संगठन में किसी देश के शामिल होने के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी है. तुर्की नेटो में एक अहम स्थान रखता है. 

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